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बेथुन कॉलेज में “संचार एवं विज्ञान” विषय पर थिएटर कार्यशाला आयोजित

Amar sandesh कोलकाता।बेथुन कॉलेज, भारतीय इतिहास में महिला शिक्षा और सशक्तिकरण के अग्रदूत के रूप में एक विशिष्ट स्थान रखता है। एशिया के प्रथम महिला महाविद्यालय के रूप में स्थापित यह संस्थान लंबे समय से सामाजिक बाधाओं को तोड़ने की प्रेरणा देता आया है। इसी संस्थान में वर्ष 1883 में कादंबिनी गांगुली और चंद्रमुखी बोस ने कलकत्ता विश्वविद्यालय तथा ब्रिटिश साम्राज्य की प्रथम महिला स्नातक बनने का गौरव प्राप्त किया। वर्तमान में बेथुन कॉलेज भारत का सबसे प्राचीन महिला महाविद्यालय है तथा NAAC A+ मान्यता प्राप्त संस्था के रूप में कला एवं विज्ञान के 16 स्नातक और 7 स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करता है।

महाविद्यालय परिसर अपनी दो विरासत इमारतों के माध्यम से समृद्ध परंपरा का गौरवपूर्ण परिचय देता है। इसके प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों में प्रीतिलता वाड्डेदार और कमला दास गुप्ता सहित अनेक विख्यात विद्वान, वैज्ञानिक, प्रशासक एवं कलाकार शामिल हैं, जिन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए समाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

बेथुन कॉलेज केवल एक शैक्षणिक संस्थान ही नहीं, बल्कि प्रगतिशील विचारधारा का प्रतीक है। जिस समय महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, उस समय इस संस्थान ने यह सिद्ध किया कि महिलाओं की शिक्षा समाज को रूपांतरित करती है। नेतृत्व और “प्रथम” होने की यह परंपरा आज भी इस संस्थान की पहचान बनी हुई है।

यह महाविद्यालय विविध सामाजिक, आर्थिक एवं भाषाई पृष्ठभूमि की महिलाओं को समावेशी शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे वे गतिशील, बौद्धिक रूप से समृद्ध, तकनीकी रूप से दक्ष एवं सामाजिक रूप से उत्तरदायी वैश्विक नागरिक बन सकें।

इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, हिंदी विभाग ने स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेल (ड्रामा क्लब) के सहयोग से बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को “थिएटर, संचार एवं विज्ञान” विषय पर एक थिएटर कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे तक आयोजित की गई तथा हिंदी, बांग्ला और अंग्रेज़ी- तीनों भाषाओं में संचालित की गई।

इस कार्यक्रम में बेथुन कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ-साथ विभिन्न अन्य महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं एवं उनके शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अंतर-महाविद्यालयीय सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक समृद्ध एवं विविधतापूर्ण बनाया तथा इसके व्यापक शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक महत्व को उजागर किया।

कार्यशाला का संचालन प्रख्यात रंगनिर्देशक, पटकथा लेखक एवं अभिनेता प्लाबन बसु द्वारा मौलाली रंगशिल्पी समूह के सहयोग से किया गया। उनकी टीम में आवेरी नाथ, निरद्वार नंदी, रंजन सेनगुप्ता, भूमिका साहा, अद्रिजा बनर्जी, तन्मय पोद्दार, जिया झा, विक्की नंदी, राजू खान, सूर्य देव राय, अर्पिता साहा तथा अल्पना बनर्जी शामिल थे, जिन्होंने विभिन्न सत्रों के दौरान प्रतिभागियों के साथ सक्रिय रूप से सहभागिता की।

कार्यशाला में अभिनय तकनीक, समूह समन्वय एवं एंसेंबल प्रदर्शन, स्वर नियंत्रण (वॉयस मॉड्यूलेशन) तथा नाट्य इम्प्रोवाइजेशन जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त “विज्ञान एवं थिएटर” विषय पर एक रोचक क्विज़ ने कार्यक्रम को अधिक संवादात्मक एवं बौद्धिक रूप से प्रेरक बनाया। कार्यशाला का समापन प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत 15-20 मिनट के एक लघु नाट्य प्रदर्शन के साथ हुआ, जिसमें उनके सीखने और सृजनात्मक अभिव्यक्ति का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला।

यह कार्यक्रम बेथुन कॉलेज की प्राचार्या डॉ. राज्यश्री रॉय के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया तथा इसका समन्वयन डॉ. नमिता जायसवाल, एसोसिएट प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग द्वारा किया गया। इस आयोजन में डॉ. नीलांजना बागची, संयोजक, स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेल (ड्रामा क्लब) का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

उल्लेखनीय है कि इस कार्यशाला में आयोजक संस्था बेथुन कॉलेज सहित 5 प्रमुख विश्वविद्यालयों एवं 14 महाविद्यालयों से लगभग 160 विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

यह कार्यशाला एक सार्थक एवं प्रभावी मंच के रूप में व्यापक रूप से सराही गई, जिसने विद्यार्थियों को थिएटर, संचार एवं विज्ञान के गतिशील अंतर्संबंधों को समझने का अवसर प्रदान किया तथा उनकी सृजनात्मकता, आत्मविश्वास एवं सहयोगात्मक अधिगम को प्रोत्साहित किया।

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