Post Views: 0
हिमाचल बुरान घाटी पास फतह कर लौटी दिल्ली की टीम, खुशहाल सिंह रावत के नेतृत्व में युवाओं ने रचा साहस का नया इतिहास
अमर चंद्र
नई दिल्ली।
हिमालय की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित विश्वप्रसिद्ध बुरान घाटी पास ट्रेक को सफलतापूर्वक पूरा कर दिल्ली की टीम के अंतर्गत भारत के विभिन्न शहरों से आये हुए 26 टेकर्स ने एक कठिन एवं साहस से भरे, अनुशासन और टीम भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। 
यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (वाईएचएआई) दिल्ली राज्य शाखा के तत्वावधान में आयोजित इस रोमांचक अभियान का सफल नेतृत्व वरिष्ठ ट्रेक लीडर खुशहाल सिंह रावत ने किया।
करीब 15,000 फीट की ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण बुरान घाटी दर्रे को पार करते हुए दल ने हिमालय की कठिनतम परिस्थितियों का सामना किया और सफलता का परचम फहराया। ट्रेक पूर्ण होने के बाद खुशहाल सिंह रावत ने अमर संदेश से दूरभाष पर बातचीत में बताया कि सभी प्रतिभागियों ने सुरक्षित रूप से अभियान पूरा कर लिया है तथा पूरी टीम उत्साह और अविस्मरणीय अनुभवों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो चुकी है।
यह ट्रेक हिमाचल प्रदेश के सबसे रोमांचक और चुनौतीपूर्ण अभियानों में शामिल माना जाता है। अभियान के दौरान प्रतिभागियों ने चंद्रनाहन झील, लिथम, धुंडा, बुरान घाटी दर्रा, मुनिरंग तथा कल्पा जैसे मनमोहक स्थलों का भ्रमण किया। बर्फ से ढकी चोटियों, हरे-भरे बुग्यालों, घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर घाटियों ने सभी प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ट्रेक का मुख्य आकर्षण 15,000 फीट ऊंचे बुरान घाटी पास को पार करना रहा, जिसे हिमालय के सबसे रोमांचक ट्रेक मार्गों में गिना जाता है।
इस अभियान के नेतृत्वकर्ता खुशहाल सिंह रावत की कुशल योजना, अनुभव और प्रेरणादायी नेतृत्व की प्रतिभागियों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। कठिन पर्वतीय मार्गों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच उन्होंने पूरे दल का मनोबल बनाए रखा तथा प्रत्येक चरण में मार्गदर्शन कर अभियान को सफल बनाया। प्रतिभागियों ने कहा कि रावत के नेतृत्व में ट्रेक न केवल सुरक्षित रहा बल्कि सीख और रोमांच से भरपूर अनुभव भी बना।
खुशहाल सिंह रावत ने बताया कि इस अभियान ने युवाओं में साहसिक गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने और नेतृत्व क्षमता को निखारने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। अभियान के दौरान प्रतिभागियों ने स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और हिमाचली जीवनशैली को भी करीब से जाना तथा स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि बुरान घाटी की अद्भुत वादियां, चंद्रनाहन झील का अलौकिक सौंदर्य, धुंडा के हिमाच्छादित कैंप और कल्पा से दिखाई देने वाली किन्नौर कैलाश पर्वतमाला के दृश्य जीवन भर स्मृतियों में बसे रहेंगे। यह ट्रेक सभी प्रतिभागियों के लिए साहस, आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का स्रोत बन गया है।
सफल अभियान के बाद पूरी टीम सुरक्षित रूप से दिल्ली लौट रही है। इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सक्षम नेतृत्व के बल पर हिमालय जैसी कठिन चुनौतियों को भी सफलता में बदला जा सकता है।
Related