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पूर्वी दिल्ली शिवोहम की ध्वनि से गूंजा सभागार, ‘आदिशंकराचार्य सम्मान’ से हुआ गौरवपूर्ण आगाज”

Amar sandesh पूर्वी दिल्ली।आदि शंकराचार्य जनसेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में पूर्वी दिल्ली सांस्कृतिक केंद्र में भगवत्पाद जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जयंती का भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अनंत श्री विभूषित श्री श्री 1008 स्वामी बालकानंद गिरी जी महाराज ने की।

इस अवसर पर निजस्वरूपानंद दाती महाराज, महामंडलेश्वर विद्यागिरी महाराज, महामंडलेश्वर हरि ओम गिरी महाराज, शिवप्रेमानंद जी सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभागार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं धर्म प्रेमी जन उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि जगद्गुरु आदि शंकराचार्य को सन्यास परंपरा, पीठों एवं अखाड़ों का संगठक माना जाता है, जिससे संत परंपरा में उनका अत्यंत गौरवपूर्ण स्थान है।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध गायक डॉ शुभम आर्या की संगीतमय प्रस्तुतियों से हुआ। उन्होंने “निर्वाण षट्कम” (शिवोहम शिवोहम) एवं “भज गोविंदम” का भावपूर्ण गायन प्रस्तुत करके उपस्थित जनसमुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिससे पूरा सभागार गड़गड़ाती करतल-ध्वनि से गुंजायमान हो उठा।

दीप प्रज्वलन के पश्चात् लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के डॉ विनोद शर्मा एवं प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ आलोक कुमार मिश्रा ने अपने व्याख्यानों के माध्यम से आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन की गहन व्याख्या प्रस्तुत की। दिल्ली प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान के निदेशक एवं संस्कृत अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ जीतराम भट्ट ने आचार्य शंकर की दिग्विजय यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने संपूर्ण भारत का भ्रमण करके विविध मतों एवं समुदायों को एक सूत्र में पिरोया और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ किया।

मुख्य वक्ता एवं अद्वैत वेदांत के विद्वान प्रो॰ डॉ रामनाथ झा ने अपने उदबोधन में आचार्य शंकर की प्रमुख कृतियों एवं अद्वैत दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अल्पायु (32 वर्ष) में केरल के कालडी से निकलकर संपूर्ण भारतवर्ष का भ्रमण करते हुए आचार्य शंकर ने अपने भाष्यों और सिद्धांतों के माध्यम से राष्ट्र को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधने का अनुपम कार्य किया।

कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों एवं शिक्षकों की सक्रिय उपस्थिति ने विषय के प्रति अकादमिक रुचि एवं गंभीर अध्ययन को भी रेखांकित किया।

अध्यक्षीय संबोधन में स्वामी बालकानंद गिरी जी महाराज ने आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत, भाष्यों, सिद्धांतों एवं दृष्टांतों का विस्तृत विवेचन करते हुए चारों पीठों के ब्रह्मवाक्यों की सारगर्भित व्याख्या प्रस्तुत की।

इस अवसर पर ट्रस्ट द्वारा “आदिशंकराचार्य सम्मान” की परंपरा का शुभारंभ किया गया। प्रथम सम्मान प्रो॰ डॉ रामनाथ झा को मंचासीन संत-महात्माओं एवं गणमान्य अतिथियों के कर-कमलों द्वारा स्मृति-चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का प्रभावी संचालन आकाशवाणी-दूरदर्शन के कलाकार एवं लेखक कुमार सुबोध शर्मा ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए उपस्थित जनों से आह्वान किया कि वह भी आदि शंकराचार्य के विचारों के प्रचार-प्रसार हेतु ट्रस्ट से जुड़ें।

कार्यक्रम में वासुदेव गर्ग, घनश्याम गुप्ता जावेरी, अनुराग गुप्ता, अशोक गुप्ता, बलदेव गुप्ता, विधायक डॉ अनिल गोयल, रजत रस्तोगी, तारा चंद तायल, शिल्पी गुप्ता सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

अंत में ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष दीपक गुप्ता ने अपने सहयोगियों महेश हिंगोरानी, वासुदेव बंसल, अरविंद कुमार, राजकमल शर्मा, प्यारे कृष्ण गड़रू, विनोद सिंघल, दीपक अग्रवाल, प्रदीप गर्ग, लज्जावती गुप्ता एवं कुमार सुबोध शर्मा के योगदान की सराहना करते हुए कार्यक्रम की सफलता का श्रेय उन्हें दिया। साथ ही, उन्होंने सभागार में उपस्थित सभी संत-महात्माओं, विद्वानों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

इसी के साथ यह भव्य एवं सफल आयोजन संपन्न हुआ।

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