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देश के उच्च न्यायालयों में 355 न्यायाधीशों के पद रिक्त, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में लंबित है नियुक्तियां

Amar sandesh नई दिल्ली। देश के उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 तथा वर्ष 1998 में तैयार मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (एमओपी) के तहत की जाती है। यह प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के द्वितीय न्यायाधीश मामला (6 अक्टूबर 1993) और तृतीय न्यायाधीश मामला (28 अक्टूबर 1998) के निर्णयों एवं परामर्शात्मक राय पर आधारित है।

सरकार के अनुसार, उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियां कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच समन्वित एवं सतत प्रक्रिया के तहत होती हैं। उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्ताव भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) द्वारा प्रारंभ किए जाते हैं, जबकि उच्च न्यायालयों में संबंधित मुख्य न्यायाधीश अपने दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों से परामर्श कर नामों की सिफारिश करते हैं। इसके बाद राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम (एससीसी) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नियुक्तियां की जाती हैं।

एमओपी के अनुसार, किसी भी रिक्ति के उत्पन्न होने से कम से कम छह माह पहले संबंधित उच्च न्यायालय को नियुक्ति संबंधी सिफारिशें भेजनी चाहिए। हालांकि, अधिकांश मामलों में इस समय-सीमा का पालन नहीं हो पाता।

1 जुलाई 2026 की स्थिति के अनुसार देश के 25 उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के कुल 1,222 स्वीकृत पद हैं। इनमें 867 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जबकि 355 पद रिक्त हैं।

सबसे अधिक 52 रिक्तियां इलाहाबाद उच्च न्यायालय में हैं। इसके बाद **कलकत्ता में 31, पंजाब एवं हरियाणा में 30, मद्रास में 24, बंबई में 19, गुजरात में 18, दिल्ली और मध्य प्रदेश में 16-16, ओडिशा और तेलंगाना में 15-15, कर्नाटक में 14, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में 13, झारखंड में 12, केरल और राजस्थान में 11-11, छत्तीसगढ़ और पटना में 9-9, आंध्र प्रदेश में 8, गुवाहाटी में 6, हिमाचल प्रदेश में 5, उत्तराखंड में 3, मणिपुर में 2 तथा सिक्किम और त्रिपुरा में 1-1 पद रिक्त हैं। मेघालय उच्च न्यायालय में सभी स्वीकृत पद भरे हुए हैं और वहां कोई रिक्ति नहीं है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के 11 स्वीकृत पद हैं। इनमें 8 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जबकि 3 पद रिक्त हैं। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन रिक्तियों को शीघ्र भरने से लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी और न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति एक बहु-स्तरीय संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें उच्च न्यायालय, राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। केवल उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित व्यक्तियों की ही उच्च न्यायालयों में न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की जाती है।

यह संस्करण अखबार में प्रकाशित करने योग्य शैली में है और इसमें सभी प्रमुख राज्यों की रिक्तियों के साथ उत्तराखंड का अलग से प्रमुख उल्लेख भी शामिल किया गया है।

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