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टोटोपाड़ा का तुंगतुंग कामू उत्सव(Tungtang festival): टोटो जनजाति की संस्कृति और विरासत का जीवंत उत्सव

 – डॉ झिलिक सोम

 

भारत की सांस्कृतिक विविधता विश्वभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यहाँ प्रत्येक राज्य, प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक जनजाति अपनी अनूठी परंपराओं, लोककला और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से देश की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध बनाती है। पश्चिम बंगाल का अलीपुरद्वार जिला भी ऐसी ही एक अद्भुत सांस्कृतिक विरासत का संरक्षक है। हिमालय की तराई में बसे डुआर्स क्षेत्र का यह जिला प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवन, चाय बागानों और जनजातीय संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। अलीपुरद्वार जिले में भूटान की सीमा से सटा छोटा-सा गाँव टोटोपाड़ा भारत की सबसे छोटी और विशेष रूप से संवेदनशील जनजातियों (PVTG) में से एक टोटो जनजाति का एकमात्र प्रमुख निवास स्थान है। अपनी अनूठी भाषा, रीति-रिवाजों, लोक परंपराओं और प्रकृति-केंद्रित जीवन शैली के कारण टोटो समुदाय पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है।इसी जिले के टोटोपाड़ा में आयोजित तुंगतुंग कामु उत्सव आज स्थानीय संस्कृति और पर्यटन का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है। इसी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के उद्देश्य से “तुंगतुंग कामू (Tungtung Kamu)” उत्सव का आयोजन किया जाता है।

टोटो समुदाय और प्रकृति

टोटो जनजाति—जो कि एक मंगोलॉयड समुदाय है और विशेष रूप से टोटोटोपारा में निवास करती है—अपनी कम जनसंख्या के कारण भारत की सबसे लुप्तप्राय (खतरे में पड़ी) जनजातियों में से एक का प्रतिनिधित्व करती है. अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपराओं के लिए उल्लेखनीय, टोटो समुदाय के पास ‘डेन्का’ (Denka) नामक एक अनूठी भाषा है, जिसे एक लुप्तप्राय भाषा के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

टोटो जनजाति का जीवन प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके धार्मिक विश्वास, कृषि पद्धति, भोजन, लोकगीत और पारंपरिक ज्ञान का आधार जंगल, नदी और पहाड़ हैं। तुंगतुंग कामू उत्सव इस संबंध को समझने और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाने का भी माध्यम है।

तुंगतुंग कामू क्या है?

टोटो भाषा में सारस पक्षी को तुंगतुंग कामू कहते हैं। सारस का शिकार करने में घंटों लग जाते हैं। वह प्रतीक्षा करता रहा। अंततः उसे सफलता मिली। इसी प्रकार, टोटो समुदाय का मुख्य जीविका कभी जानवरों और पक्षियों का शिकार करना था। उन्हें शिकार के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था। टोटो समुदाय के जीवन और जीविका में इसीलिए तुंगतुंग कामू पक्षी का महत्व बहुत अधिक है।

तुंगतुंग कामू केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि टोटो समुदाय की पहचान, इतिहास, भाषा, लोकज्ञान और प्रकृति से जुड़े जीवन-दर्शन का उत्सव है। टोटो लोग प्रकृति की पूजा करते हैं। इस आयोजन में देश-विदेश से शोधकर्ता, कलाकार, विद्यार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यटक भाग लेते हैं। उत्सव का उद्देश्य टोटो समुदाय की परंपराओं को समझना, उनके संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।

आयोजन का उद्देश्य

तुंगतुंग कामू उत्सव हर साल देर शरद ऋतु में, आमतौर पर नवंबर या दिसंबर की शुरुआत में आयोजित किया जाता है。 यह पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के टोटो पारा में होने वाला 5 से 6 दिनों का एक गहन शैक्षिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम है。 यह उत्सव चित्तरंजन टोटो मेमोरियल एजुकेशन सेंटर द्वारा ‘पिपिलितारा फाउंडेशन’ और ‘मुहान एसोसिएशन फॉर कंजर्वेशन एंड टूरिज्म’ के सहयोग से टोटो जनजाति की विरासत को मनाने और संरक्षित करने के लिए आयोजित किया जाता है

इस उत्सव के प्रमुख उद्देश्य है

 टोटो जनजाति की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण।

स्थानीय टोटो भोजन को संरक्षित करना है।

 टोटो भाषा और लिपि के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

 ज्ञान, लोककला और हस्तशिल्प का प्रदर्शन।

 शिक्षा और सामुदायिक विकास के लिए सहयोग जुटाना।

 प्रकृति, पर्यावरण और आदिवासी जीवनशैली के महत्व को रेखांकित करना।

उत्सव की प्रमुख विशेषताएँ

तुंगतुंग कामू के दौरान कई प्रकार की गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जिनमें शामिल हैं—

तुंगतुंग कामु उत्सव में रंग-बिरंगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ आकर्षण का प्रमुख केंद्र होती हैं। टोटो समुदाय के युवक-युवतियाँ पारंपरिक वेशभूषा पहनकर लोकनृत्य और लोकगीत प्रस्तुत करते हैं। इन प्रस्तुतियों में प्रकृति, कृषि, सामुदायिक जीवन और पूर्वजों के प्रति सम्मान की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उत्सव में स्थानीय हस्तशिल्प, बाँस और लकड़ी से बनी वस्तुएँ, पारंपरिक आभूषण तथा घरेलू उपयोग की सामग्री भी प्रदर्शित की जाती हैं। स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल आगंतुकों को टोटो समुदाय की विशिष्ट खाद्य संस्कृति से परिचित कराते हैं। इसके अतिरिक्त लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक खेल, सांस्कृतिक संवाद तथा स्थानीय कला प्रदर्शनियाँ भी आयोजित की जाती हैं, जिससे पूरा वातावरण उत्साह और रंगों से भर उठता है।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

तुंगतुंग कामु उत्सव ने टोटोपाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन की नई संभावनाएँ विकसित की हैं। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले पर्यटक यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करते हैं।

इससे स्थानीय लोगों को हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों, भोजन तथा पर्यटन सेवाओं के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। सांस्कृतिक पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम

टोटोपाड़ा चारों ओर से पर्वतों, नदियों, हरियाली और वनों से घिरा हुआ है। उत्सव के दौरान यह प्राकृतिक परिवेश सांस्कृतिक रंगों के साथ मिलकर एक अनोखा अनुभव प्रदान करता है। पर्यटक यहाँ केवल एक उत्सव नहीं देखते, बल्कि प्रकृति और मानव संस्कृति के सुंदर सामंजस्य का अनुभव करते हैं।

सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

वैश्वीकरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण अनेक जनजातीय संस्कृतियाँ धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुँच रही हैं। ऐसे समय में तुंगतुंग कामु उत्सव जैसी पहलें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह उत्सव केवल परंपराओं का प्रदर्शन नहीं करता, बल्कि उन्हें जीवित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का कार्य भी करता है।

इस प्रकार के आयोजन स्थानीय समुदाय में सांस्कृतिक गौरव की भावना विकसित करते हैं और समाज को यह संदेश देते हैं कि विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है।

शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण

उत्सव से प्राप्त सहयोग का उपयोग टोटोपाड़ा के शैक्षणिक और सामुदायिक विकास में भी किया जाता है। विशेष रूप से बच्चों की शिक्षा, स्थानीय विद्यालयों के विकास तथा टोटो भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पर्यटन की नई पहचान

तुंग तांग कामू ने टोटोपाड़ा को सांस्कृतिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दी है। यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जहाँ आगंतुक आदिवासी जीवन, लोकसंस्कृति और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन को करीब से देख सकते हैं। इससे स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं। चूंकि यह एक स्थानीय समुदाय-आधारित कार्यक्रम है, इसलिए इसमें पर्यटकों की संख्या बहुत भारी नहीं होती है, लेकिन जो लोग ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपराओं का अनुभव करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन और जीवंत अनुभव होता है।चूंकि यह एक बड़ा वाणिज्यिक या राष्ट्रीय उत्सव नहीं है, इसलिए इसमें कोई निश्चित या आधिकारिक आगंतुक संख्या (visitors count) दर्ज नहीं होती है। हालाँकि, यह एक अंतरंग सामुदायिक आयोजन है जिसमें हर साल मुख्य रूप से स्थानीय आदिवासी समुदाय, आसपास के गांवों के निवासी और ग्रामीण पर्यटन के अनुभव के लिए आए कुछ पर्यटक मिलाकर कुछ सौ से लेकर लगभग एक हजार (1000) तक लोग भाग लेते हैं।

इसके आसपास कई शानदार पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जो आपके सफर को रोमांचक बना सकते हैं:

टोटोपाड़ा के निकट प्रमुख पर्यटन स्थल

 जलदापाड़ा नेशनल पार्क (Jaldapara National Park) टोटोपाड़ा से लगभग ३० किलोमीटर दूर स्थित, यह राष्ट्रीय उद्यान दुनिया भर में ‘एक सींग वाले गैंडों’ (One-horned Rhinoceros) की सबसे बड़ी आबादी के लिए प्रसिद्ध है。 यहाँ आप हाथी सफारी (Elephant Safari) और जीप सफारी (Jeep Safari) के जरिए बाघ, हाथी, हिरण और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों को निहार सकते हैं。

चिल्लापाटा जंगल और नालराजा गढ़ (Chilapata Forest) टोटोपाड़ा से लगभग ३१ किलोमीटर (लगभग ६० मिनट का सफर) की दूरी पर स्थित, यह घना जंगल हाथियों का एक प्रमुख गलियारा (Elephant Corridor) है。 यहाँ घने पेड़ों के बीच छिपे गुप्तकाल के ऐतिहासिक ‘नालराजा गढ़’ (Nalraja Garh) के अवशेष मौजूद हैं, जो इतिहास और रोमांच प्रेमियों को बहुत आकर्षित करते。

 दक्षिण खयरबारी नेचर पार्क (South Khayerbari Nature Park) टोटोपाड़ा से लगभग ४० किलोमीटर की दूरी पर स्थित, यह केंद्र रेस्क्यू किए गए बाघों और तेंदुओं के पुनर्वास के लिए जाना जाता है。 तोर्षा नदी के किनारे स्थित इस पार्क में आप शांत वातावरण और प्रकृति का आनंद ले सकते हैं。

 फुएंटशोलिंग, भूटान (Phuentsholing – Bhutan) यदि आप अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने का अनुभव लेना चाहते हैं, तो भूटान का प्रवेश द्वार ‘फुएंटशोलिंग’ टोटोपाड़ा के सबसे नजदीकी और बेहतरीन स्थलों में से एक है。 यहाँ की खूबसूरत वास्तुकला, ‘अमो चू’ (Amo Chhu) मगरमच्छ प्रजनन केंद्र और कार्रा बंड्री मोनेस्ट्री (Karbandi Monastery) देखने लायक हैं

बुक्सा टाइगर रिज़र्व और जयंती (Buxa Tiger Reserve & Jayanti) टोटोपाड़ा से कुछ घंटे की दूरी पर स्थित, यह विशाल टाइगर रिज़र्व अपने ट्रैकिंग रूट्स, राजभातखावा (Rajabhatkhawa) और ‘जयंती’ नामक नदी के किनारे बसे गाँव के लिए मशहूर है。 यहाँ की पहाड़ियां और नदियां इसे फोटोग्राफी और एडवेंचर के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं。

इस उत्सव को पूर्ण ‘शून्य-अपशिष्ट’ (जीरो-वेस्ट) आयोजन के रूप में तैयार किया गया है, जो प्लास्टिक के उपयोग को प्रतिबंधित करता है। इसका उद्देश्य प्लास्टिक कचरे के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और स्थानीय विकल्पों का समर्थन करते हुए कचरा-मुक्त सिद्धांतों को बढ़ावा देना है। उन्होंने बांस और लकड़ी के कटलरी, बर्तनों का इस्तेमाल किया, और अपने स्टालों को पत्तियों से सजाया।

आज जब अनेक आदिवासी भाषाएँ और परंपराएँ विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं, तब तुंग तांग कामू जैसे आयोजन सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक पहल हैं। यह उत्सव केवल टोटो समुदाय की विरासत का उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, आदिवासी ज्ञान और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है। टोटोपाड़ा का यह आयोजन हमें यह संदेश देता है कि विकास के साथ-साथ अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। तुंगतुंग कामु उत्सव अलीपुरद्वार की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत प्रतीक है। यह उत्सव टोटो जनजाति की समृद्ध परंपराओं, लोककला, सामुदायिक जीवन और प्रकृति के प्रति उनके गहरे संबंध को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है। सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण भारत में ऐसे उत्सव हमारी साझा विरासत को सुरक्षित रखने का सशक्त माध्यम हैं।

यदि कोई व्यक्ति पश्चिम बंगाल के डुआर्स क्षेत्र की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान को निकट से समझना चाहता है, तो टोटोपाड़ा का तुंगतुंग कामु उत्सव उसके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव सिद्ध होगा। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति, प्रकृति और सामुदायिक जीवन का जीवंत उत्सव है, जो भारत की विविधता में एकता की भावना को और अधिक सशक्त बनाता है।

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