राजधानी में दिखी मिथिला की सांस्कृतिक छटा, बाल साहित्यकारों ने जीता सबका दिल”
अमर चंद्र
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के संस्कार भारती सभागार में शनिवार को मैथिली साहित्य महासभा (मैसाम) द्वारा आयोजित मैथिली बाल कवि-कथाकार सम्मेलन ने मिथिला की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को नई पीढ़ी के सशक्त स्वर प्रदान किए। सम्मेलन में बाल कवियों और कथाकारों की प्रतिभा, भाषा के प्रति समर्पण और सांस्कृतिक चेतना ने उपस्थित साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं पारंपरिक ‘जय-जय भैरवी’ गीत की प्रस्तुति के साथ हुआ। सम्मेलन में 20 बाल रचनाकारों ने अपनी मातृभाषा मैथिली में कविता, कथा एवं गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया। राष्ट्रप्रेम, मिथिलाप्रेम, सामाजिक सरोकार, लैंगिक संवेदनशीलता, शिक्षा, प्रकृति एवं सांस्कृतिक मूल्यों जैसे विषयों पर आधारित रचनाओं ने कार्यक्रम को साहित्यिक ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित वैद्यनाथ झा ने कहा कि सम्मेलन में उपस्थित होकर ऐसा अनुभव हुआ मानो संपूर्ण मिथिला यहां सजीव रूप में उपस्थित हो।उन्होंने बाल रचनाकारों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में मिथिला की संस्कृति, लोकजीवन, परंपराओं, त्योहारों और संस्कारों का सुंदर चित्रण देखने को मिला।
विशिष्ट अतिथि एवं साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कार विजेता मुन्नी कामत ने कहा कि बाल साहित्य के क्षेत्र में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल है, जो नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सराहनीय प्रयास है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मैथिली साहित्य महासभा के अध्यक्ष हेमंत कुमार झा ने संस्था का परिचय प्रस्तुत किया और बताया कि वर्ष 2015 से मैसाम मैथिली भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने घोषणा की कि संस्था द्वारा दिए जाने वाले ‘मैसाम सम्मान’ और ‘युवा सम्मान’ के साथ अगले वर्ष से ‘मैसाम बाल साहित्य सम्मान’ भी प्रदान किया जाएगा।
सम्मेलन के दौरान प्रख्यात कवयित्री मंजूषा झा की नवीन कृति ‘स्वर्गक सीढ़ी मिथिला’ का लोकार्पण भी किया गया, जिसे उपस्थित साहित्यकारों ने मैथिली साहित्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित संस्कार भारती सभागार में संपन्न इस साहित्यिक आयोजन का कुशल एवं आकर्षक संचालन श्रीमती काजल चौधरी ने किया। उनकी प्रभावशाली वाणी, साहित्यिक समझ और मंच संचालन की दक्षता ने कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की तथा उपस्थित जनों की भरपूर सराहना प्राप्त की।
जबकि धन्यवाद ज्ञापन सरोज झा द्वारा प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन की संयोजिका प्रभा झा एवं अनीता मिश्रा थीं।
इस अवसर पर मैसाम की उपाध्यक्ष निवेदिता झा मिश्रा, महासचिव अरुण कुमार मिश्र एवं आशीष नीरज, सचिव राहुल वत्स, कविता पाठक, संजय कुमार झा, राहुल झा, संजीव सिन्हा, तपन झा, सुबोध झा, अखिलेश कुमार मिश्र, सुधा ठाकुर, संजीव कुमार झा, शुभ्रा झा, संतोष चौधरी सहित बड़ी संख्या में साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि यदि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहे तो साहित्य और संस्कृति की यह अमूल्य धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंचती रहेगी।