कारोबारदिल्लीराष्ट्रीय

दिल्ली में PSB कॉन्फ्लुएंस-2026 का आगाज, निर्मला सीतारमण बोलीं निम्न NPA ने बैंकिंग क्षेत्र को सुधारों के अगले चरण के लिए बनाया मजबूत

युवाओं की आकांक्षाओं से लेकर निवेश, जमा और GCC तक सात अहम मुद्दों पर मंथन; वित्त मंत्री ने कहाभारत के बैंकिंग भविष्य में युवाओं की जरूरतों की झलक जरूरी

अमर चंद्र
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) की ओर से आयोजित दो दिवसीय पीएसबी कॉन्फ्लुएंस-2026 का दिल्ली में आगाज हुआ। सम्मेलन के पहले दिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी), सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों, सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों ने बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र के सामने उभर रहे अवसरों तथा भविष्य की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर व्यापक मंथन किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकिंग क्षेत्र, वित्तीय समावेशन और ऋण व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए सम्मेलन में निर्धारित सात विषयों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर पर पहुंचा एनपीए बैंकिंग क्षेत्र को सुधारों के अगले चरण को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत स्थिति में रखता है।
वित्त मंत्री ने ‘युवाओं के लिए बैंकिंग’ विषय पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बैंकिंग के भविष्य में भारत के युवाओं की आकांक्षाओं की झलक दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की करीब 29 प्रतिशत आबादी 15 से 29 वर्ष की आयु के बीच है। ऐसे में युवाओं की आकांक्षाओं और वित्तीय जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग सेवाओं और उत्पादों को विकसित करना महत्वपूर्ण है।
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने सम्मेलन के उद्देश्यों को ठोस और लागू किए जा सकने वाले परिणामों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों को उभरते अवसरों का पूर्वानुमान लगाने, संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने और विभिन्न संस्थानों के सफल अनुभवों से सीख लेने की जरूरत है, ताकि देश के आर्थिक विकास के अगले चरण को प्रभावी समर्थन दिया जा सके।
सात विषयों पर केंद्रित है सम्मेलन
पीएसबी कॉन्फ्लुएंस-2026 को बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र से जुड़े सात प्रमुख विषयों के इर्द-गिर्द संरचित किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे व्यावहारिक उपायों और रणनीतियों की पहचान करना है, जिन्हें विभिन्न वित्तीय संस्थानों में लागू और व्यापक स्तर पर विस्तार दिया जा सके।
सम्मेलन के पहले दिन इनमें से चार विषयों—जमा जुटाना, युवाओं के लिए बैंकिंग, निवेश चक्र को समर्थन और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी)—पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
जमा जुटाने के मुद्दे पर ग्राहकों के साथ बेहतर एवं गहरे जुड़ाव के माध्यम से बैंकों के जमा आधार को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा हुई। वहीं युवाओं के लिए बैंकिंग के तहत उनकी बदलती आकांक्षाओं और वित्तीय जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग प्रस्ताव विकसित करने पर जोर दिया गया।
निवेश चक्र से जुड़े सत्र में बदलते निवेश माहौल के अनुरूप संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने और प्रभावी वित्तपोषण समाधान विकसित करने पर विचार हुआ। इसके साथ ही तेजी से विकसित हो रहे जीसीसी इकोसिस्टम में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए उभर रहे अवसरों पर भी चर्चा की गई।
इन सत्रों में विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। जेएसडब्ल्यू के समूह मुख्य अधिकारी शेषगिरी राव एमवीएस ने निवेश चक्र को समर्थन देने से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी, जबकि जीसीसी उद्यम परिवर्तन विशेषज्ञ तनाय केडियाल ने बदलते जीसीसी इकोसिस्टम और उससे पैदा हो रहे अवसरों पर विचार रखे।
युवाओं को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने की पहल
‘युवाओं के लिए बैंकिंग’ विषय पर चर्चा के दौरान युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय के युवा मामलों के विभाग के राष्ट्रीय मंच ‘मेरा युवा भारत’ (एमवाई भारत) के व्यापक युवा संपर्क नेटवर्क का उपयोग करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
एमवाई भारत की सीईओ डॉ. प्रियंका शुक्ला ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में भाग लिया और युवाओं तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने से जुड़े अपने विचार साझा किए। 26 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं और व्यापक संपर्क नेटवर्क वाले एमवाई भारत के माध्यम से युवाओं को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने के साथ-साथ शिक्षा वित्त, उद्यमिता, इंटर्नशिप और वित्तीय क्षेत्र में करियर के अवसरों के बारे में जागरूक करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
दूसरे दिन तीन अहम विषयों पर मंथन
सम्मेलन के दूसरे दिन शेष तीन विषयों—कृषि एवं बागवानी मूल्य श्रृंखला अवसंरचना, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण और क्रेडिट कार्ड कारोबार की पुनर्कल्पना—पर विस्तृत चर्चा होगी। इसके बाद सभी सात विषयगत समूहों से सामने आने वाली व्यावहारिक रणनीतियों और नवीन समाधानों को प्रस्तुत किया जाएगा।
पीएसबी कॉन्फ्लुएंस-2026 बैंकिंग क्षेत्र की अब तक की प्रगति को आगे बढ़ाने और भविष्य में उभरने वाले अवसरों के लिए वित्तीय संस्थानों को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सम्मेलन के माध्यम से सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सामूहिक प्रयासों को एक मंच मिला है।
इस मंथन का लक्ष्य संस्थागत क्षमताओं और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना है, ताकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और वित्तीय संस्थान भारत की बढ़ती विकास आकांक्षाओं के अनुरूप अपनी भूमिका को और प्रभावी बना सकें तथा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में मजबूती से योगदान दे सकें।

Share This Post:-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *