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सेव डेमोक्रेसी मार्च और मतदाता सूची को लेकर भी कांग्रेस पर साधा निशाना
Amar sandesh नई दिल्ली, 30 सितंबर। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने INDI गठबंधन की बैठक को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा। भाजपा केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में चौहान ने कहा कि लगातार चुनावी हार के बाद कांग्रेस आत्ममंथन करने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप और भ्रम की राजनीति कर रही है।
शिवराज सिंह चौहान ने INDI गठबंधन की बैठक में प्रमुख सहयोगी दलों की अनुपस्थिति का उल्लेख करते हुए गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य के प्रमुख विपक्षी नेता अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने तमिलनाडु की डीएमके, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन से जुड़े दलों की अनुपस्थिति का भी जिक्र किया।
चौहान ने कहा कि विपक्षी गठबंधन में नेतृत्व को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। उनके अनुसार, INDI गठबंधन राहुल गांधी को नेता मानने के लिए तैयार नहीं है और कांग्रेस के भीतर भी नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति है। उन्होंने बैठक के परिणाम पर टिप्पणी करते हुए इसे ‘शून्य विजन, 100 प्रतिशत हताशा और हार का एडवांस बहाना’ बताया।
‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ पर भी कांग्रेस को घेरा
केंद्रीय मंत्री ने 2 से 8 अक्टूबर तक प्रस्तावित ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोकतंत्र के नाम पर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए।
मतदाता सूची के शुद्धिकरण का किया समर्थन
शिवराज सिंह चौहान ने मतदाता सूची के शुद्धिकरण को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि मृत व्यक्तियों के नाम, दोहरी प्रविष्टियां अथवा ऐसे नाम जो नियमों के अनुसार मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए, उन्हें हटाना जरूरी है।
उन्होंने विपक्ष द्वारा मतदाता सूची के शुद्धिकरण पर उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि मतदाता सूची को व्यवस्थित और शुद्ध रखने की प्रक्रिया का विरोध लोकतंत्र के हित में नहीं है।
‘प्रधानमंत्री कौन बनेगा, यह जनता तय करती है’
चौहान ने कहा कि चुनाव आयोग अपना संवैधानिक दायित्व निभाता है और किसी राजनीतिक दल को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि आयोग किस तरह काम करे। उन्होंने ईवीएम को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों का भी जिक्र किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में नहीं होता, बल्कि जनता अपने मताधिकार के माध्यम से यह निर्णय करती है।
उन्होंने विपक्षी दलों से चुनावी परिणामों और जनता के जनादेश को स्वीकार करते हुए सकारात्मक राजनीति पर ध्यान देने की अपील की।
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