Monday, September 28, 2026
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गांधी स्मृति में गूंजा ‘हनुमान अंश’ का आध्यात्मिक संदेश, विजय गोयल और डॉ. संजीत कुमार से फिल्म की टीम ने की आत्मीय मुलाकात

डॉ. संजीत कुमार के प्रेरणादायी संबोधन ने किया मंत्रमुग्ध; बोले शक्ति का वास्तविक उद्देश्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि सेवा, विनम्रता और राष्ट्र निर्माण होना चाहिए

 

अमर चंद्र

नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की टीम ने गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं समिति के उपाध्यक्ष विजय गोयल तथा समिति के निदेशक डॉ. संजीत कुमार से आत्मीय मुलाकात की। इस अवसर पर फिल्म की टीम ने गांधी स्मृति का अवलोकन किया और महात्मा गांधी के शहीद स्थल पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित की एवं उनके विचारों, सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए फिल्म ‘हनुमान अंश’ के उद्देश्य पर विस्तार से चर्चा की।

मुलाकात के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री और उपाध्यक्ष गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति श्री विजय गोयल ने टीम के साथ संवाद किया एवं उनको सम्मानित किया । श्री गोयल ने फिल्म की सफलता की कहानी इसके निर्देशक विशाल भारद्वाज ,प्रोड्यूसर नम्रता सिंह और रागिनी सोना से जानी।मुख्य अभिनेता शोभिनव सत्या ,बाल कलाकार विहान शेडगे और अभिनेत्री पूर्णिमा तिवारी से भी इस फिल्म में उनके अभिनय के बारे में जाना। इसके पश्चात गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के निदेशक डॉ. संजीत कुमार ने अपने विचारों और प्रेरणादायी संबोधन से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लगभग पांच मिनट के अपने सारगर्भित संबोधन में उन्होंने भगवान हनुमान के जीवन, महात्मा गांधी के सिद्धांतों, भारतीय संस्कृति, युवा पीढ़ी और सिनेमा की सामाजिक जिम्मेदारी को एक सूत्र में पिरोते हुए महत्वपूर्ण संदेश दिया।उन्होंने कहा कि

हनुमान जी का जीवन,शक्ति, भक्ति और विनम्रता का अद्भुत संगम है।

डॉ. संजीत कुमार ने कहा कि भगवान हनुमान का चरित्र केवल अद्भुत शक्ति और पराक्रम का प्रतीक नहीं है, बल्कि भक्ति, समर्पण, विनम्रता, सेवा और निस्वार्थ भाव का भी अनुपम उदाहरण है। हनुमान जी के पास अपार शक्ति थी, लेकिन उन्होंने कभी उसका उपयोग अहंकार या व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिए नहीं किया। उन्होंने अपनी संपूर्ण क्षमता प्रभु श्रीराम के कार्य, जनकल्याण और धर्म की स्थापना के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा कि हनुमान जी के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि वास्तविक शक्ति वही है, जो दूसरों के काम आए। सामर्थ्य का अर्थ केवल स्वयं को शक्तिशाली साबित करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद की सहायता करना, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना और राष्ट्रहित में योगदान देना है।

आज का युग विज्ञान, तकनीक और बौद्धिक प्रगति का युग है। ऐसे समय में आवश्यक है कि हमारी शक्ति के साथ विनम्रता, हमारे ज्ञान के साथ संवेदनशीलता और हमारी सफलता के साथ समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी जुड़ा रहे। व्यक्ति की उपलब्धियां तभी सार्थक होती हैं, जब उनका लाभ समाज और राष्ट्र को मिले।

हर व्यक्ति के भीतर विद्यमान है हनुमान का अंश

डॉ. संजीत कुमार ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण विचार रखते हुए कहा कि हनुमान जी का अंश प्रत्येक व्यक्ति के भीतर विद्यमान है। जब कोई व्यक्ति संकट में पड़े हुए इंसान की सहायता करता है, समाज और राष्ट्र के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करता है, अपनी कला के माध्यम से सकारात्मक संदेश देता है अथवा सफलता प्राप्त करने के बाद भी विनम्र बना रहता है, तब उसके आचरण में हनुमान जी का आदर्श दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान की भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके गुणों को अपने जीवन में उतारना भी आवश्यक है। सेवा, समर्पण, अनुशासन, साहस और विनम्रता ही वे मूल्य हैं, जो व्यक्ति को समाज के लिए उपयोगी बनाते हैं।

गांधी जी के विचारों और हनुमान जी के आदर्शों में मानवीय मूल्यों का सेतु

डॉ. संजीत कुमार ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी जी ने भी वास्तविक शक्ति को आत्मबल, सत्य, अनुशासन, सेवा और नैतिक साहस से जोड़ा था। उनके लिए शक्ति का अर्थ केवल शारीरिक सामर्थ्य नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना और समाज के कल्याण के लिए निरंतर कार्य करना था।

उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान के आदर्शों और महात्मा गांधी के विचारों के बीच मानवीय मूल्यों का एक गहरा संबंध दिखाई देता है। एक ओर हनुमान जी का समर्पण, सेवा और विनम्रता का आदर्श है, तो दूसरी ओर गांधी जी का सत्य, अहिंसा, आत्मबल और जनसेवा का संदेश। दोनों ही हमें यह सिखाते हैं कि महानता का वास्तविक आधार अहंकार नहीं, बल्कि त्याग, सेवा और मानवता है।

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति का उद्देश्य भी केवल महात्मा गांधी की स्मृतियों को संजोकर रखना नहीं, बल्कि उनके विचारों को वर्तमान जीवन और समाज से जोड़ना है। इस दिशा में कला, साहित्य और सिनेमा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

नई पीढ़ी तक भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक संदेश पहुंचाएगी ‘हनुमान अंश’

फिल्म ‘हनुमान अंश’ की चर्चा करते हुए डॉ. संजीत कुमार ने कहा कि बाबा नीम करौली जी के आध्यात्मिक संदेशों और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से प्रेरित ऐसी फिल्में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बन सकती हैं।

उन्होंने कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देने और सकारात्मक विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की प्रभावशाली शक्ति भी है। यदि फिल्म के माध्यम से युवाओं तक भक्ति, सेवा, मानवता, एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश पहुंचता है, तो यह समाज के लिए सार्थक योगदान होगा।

आज की युवा पीढ़ी डिजिटल माध्यमों और तकनीकी प्रभावों के बीच आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में आवश्यक है कि उसे अपनी सांस्कृतिक विरासत और जीवन मूल्यों से भी परिचित कराया जाए। भगवान हनुमान के जीवन से जुड़े साहस, पराक्रम, निष्ठा और विनम्रता जैसे गुण युवाओं को सही दिशा प्रदान कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्म का उद्देश्य केवल दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि उनके भीतर सकारात्मक सोच, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण की भावना को जागृत करना होना चाहिए।

अहंकार को सेवा और सफलता को समाज के कल्याण में बदलने का संदेश

अपने संबोधन के समापन में डॉ. संजीत कुमार ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर की शक्ति और सामर्थ्य को पहचानना चाहिए। युवाओं के साहस, ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग राष्ट्र निर्माण, सामाजिक उत्थान और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने में होना चाहिए।

उन्होंने संदेश दिया कि हमें अपने अहंकार को सेवा में, अपनी क्षमता को पराक्रम में और व्यक्तिगत सफलता को समाज तथा राष्ट्र की प्रगति में परिवर्तित करना चाहिए। यही भगवान हनुमान के आदर्शों और महात्मा गांधी के विचारों की वास्तविक सार्थकता है।

फिल्म ‘हनुमान अंश’ की टीम की गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति में यह मुलाकात भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सिनेमा के माध्यम से सामाजिक जागरूकता के प्रयासों को लेकर महत्वपूर्ण रही। इस दौरान गांधी के दर्शन ,उनके विचार और फिल्म के उद्देश्य पर हुए संवाद ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति की शक्ति उसके मानवीय मूल्यों, सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति समर्पण में निहित है।

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