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अब सपना नहीं, अपना घर: 1 करोड़ परिवारों को मिली पक्की छत

  पीएम आवास योजना-शहरी ने बदली लाखों परिवारों की जिंदगी, 2.09 लाख नए घरों को मंजूरी; महिलाओं के नाम होंगे 2.03 लाख घर

 

अमरचंद |

नई दिल्ली। कभी किराये के छोटे से कमरे में जिंदगी गुजारने को मजबूर परिवार, कभी टीन की छत के नीचे बच्चों के भविष्य की चिंता और कभी अपने घर की चाबी हाथ में आने का इंतजार—देश के ऐसे लाखों परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना उम्मीद की बड़ी किरण बनकर सामने आई है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) और पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत अब तक 1.25 करोड़ से अधिक घर मंजूर किए जा चुके हैं। इनमें से 1 करोड़ से ज्यादा घर बनकर तैयार हो चुके हैं और लाभार्थी परिवारों को सौंपे जा चुके हैं। यानी करोड़ों लोगों के लिए ‘अपना घर’ अब केवल सपना नहीं रहा।

इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत 2.09 लाख से अधिक नए घरों को मंजूरी दी है। इन घरों का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद शहरी परिवारों को मिलेगा।

2.03 लाख घर महिलाओं के नाम—घर के साथ बढ़ा सम्मान

इस नई मंजूरी की सबसे खास बात यह है कि 2.09 लाख स्वीकृत घरों में से 2.03 लाख घर महिलाओं को आवंटित किए गए हैं। यानी घर की छत के साथ महिलाओं को संपत्ति में अधिकार और परिवार की आर्थिक सुरक्षा भी देने पर जोर दिया गया है।

अब तक पीएमएवाई-यू और पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत स्वीकृत 1.25 करोड़ से अधिक घरों में करीब 1 करोड़ घर महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में हैं।

यह बदलाव केवल आंकड़ा नहीं है। जिस महिला के नाम परिवार का अपना घर होता है, उसके लिए वह संपत्ति सुरक्षा, सम्मान और भविष्य की एक मजबूत गारंटी बन जाती है।

अपने प्लॉट पर घर बनाने के लिए मिलेंगे 2.5 लाख रुपये तक

नई मंजूरियों में करीब 1.42 लाख घर लाभार्थी नेतृत्व निर्माण (बीएलसी) के तहत हैं। इसके तहत पात्र परिवार अपनी जमीन पर पक्का मकान बना सकते हैं और उन्हें 2.5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है।

वहीं 67,045 घर किफायती आवास साझेदारी (एएचपी) के तहत बनाए जाएंगे। इसमें सरकारी और निजी एजेंसियां राज्यों के साथ मिलकर ऐसे आवास तैयार करेंगी, जिन्हें पात्र परिवारों को उपलब्ध कराया जाएगा।

18.38 लाख से ज्यादा घर पीएमएवाई-यू 2.0 में मंजूर

6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुई केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की आठवीं बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके बाद पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत स्वीकृत घरों की संख्या 18.38 लाख से अधिक हो गई है।

इनमें करीब 14.40 लाख बीएलसी, 2.48 लाख एएचपी, 1.36 लाख ब्याज सब्सिडी योजना और 13,046 किफायती किराये के आवास शामिल हैं।

नई मंजूरियों का लाभ आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पात्र परिवारों को मिलेगा।

एससी, एसटी, ओबीसी और बुजुर्गों को भी प्राथमिकता

योजना में समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को भी प्राथमिकता दी गई है। नई मंजूरियों में 21,954 घर अनुसूचित जाति, 14,252 अनुसूचित जनजाति और 75,511 घर अन्य पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों के लिए हैं। इसके अलावा 16,662 घर वरिष्ठ नागरिकों को आवंटित किए गए हैं।

सरकार अब केवल मकानों की मंजूरी तक सीमित नहीं रहना चाहती। निर्माण की गति, लाभार्थियों का सत्यापन, जियो-टैगिंग, धनराशि के उपयोग और मकानों के समय पर पूरा होने की भी निगरानी की जा रही है।

एक घर की चाबी, पूरे परिवार के चेहरे पर मुस्कान

पीएम आवास योजना की सबसे बड़ी तस्वीर आंकड़ों में नहीं, बल्कि उन परिवारों के चेहरों पर दिखाई देती है जिन्हें वर्षों के इंतजार के बाद अपने घर की चाबी मिलती है।

अपने घर की छत का मतलब है बच्चों के लिए सुरक्षित जगह, परिवार के लिए स्थायित्व और आने वाली पीढ़ी के लिए एक मजबूत आधार। यही वजह है कि पीएमएवाई-यू 2.0 को केवल आवास योजना के तौर पर नहीं, बल्कि शहरी गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव लाने वाले अभियान के रूप में देखा जा रहा है।

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