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एनएचपीसी को मिला नया मानव संसाधन नेतृत्व, परेश राणपरा ने संभाला निदेशक (कार्मिक) का पद

Amar sandesh नई दिल्ली।विद्युत मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के नवरत्न उपक्रम एनएचपीसी लिमिटेड में परेश राणपरा ने गुरुवार को निदेशक (कार्मिक) का पदभार ग्रहण कर लिया। इससे पहले वह ग्रिड-इंडिया में निदेशक (मानव संसाधन) के रूप में कार्यरत थे और मानव संसाधन प्रबंधन, प्रतिभा विकास, संगठनात्मक क्षमता निर्माण तथा कार्यबल नियोजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

मानव संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में 31 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले राणपरा ने सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में कार्य किया है। उन्होंने महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा से सामाजिक कार्य (एमएसडब्ल्यू) तथा सरदार पटेल विश्वविद्यालय से व्यवसाय प्रशासन (बीबीए) की डिग्री प्राप्त की है। वह एक्सएलआरआई, जमशेदपुर से प्रमाणित मूल्यांकनकर्ता भी हैं।
ग्रिड-इंडिया में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षमता निर्माण, नेतृत्व विकास, उत्तराधिकार योजना और प्रतिभा प्रबंधन को नई दिशा दी। प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षण अवसंरचना को मजबूत किया तथा संगठन में दीर्घकालिक नेतृत्व तैयार करने के लिए योग्यता आधारित उत्तराधिकार योजना को सफलतापूर्वक लागू कराया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षमता निर्माण से जुड़े परामर्श अवसरों को भी आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही।।
ग्रिड-इंडिया से पहले राणपरा गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) में मानव संसाधन प्रमुख रहे, जहां उन्होंने 60 हजार से अधिक कर्मचारियों के लिए मानव संसाधन नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन का नेतृत्व किया। गुजरात विद्युत बोर्ड के पुनर्गठन, संगठनात्मक परिवर्तन, कार्य-निष्पादन प्रबंधन प्रणाली, कार्यबल नियोजन और नेतृत्व विकास जैसी कई महत्वपूर्ण पहलों में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप कर्मचारियों के कौशल विकास और नवाचार को भी बढ़ावा दिया।
एनएचपीसी में निदेशक (कार्मिक) के रूप में राणपरा कंपनी की मानव संसाधन रणनीति, प्रतिभा प्रबंधन, संगठनात्मक विकास, औद्योगिक संबंध, कर्मचारी सहभागिता, प्रशिक्षण एवं विकास सहित सभी प्रमुख मानव संसाधन कार्यों का नेतृत्व करेंगे। माना जा रहा है कि उनके अनुभव और नेतृत्व से एनएचपीसी की मानव संसाधन प्रणाली और अधिक सशक्त होगी तथा कंपनी के विकास और संगठनात्मक उत्कृष्टता के लक्ष्यों को नई गति मिलेगी।

Amar sandesh नई दिल्ली।विद्युत मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के नवरत्न उपक्रम एनएचपीसी लिमिटेड में परेश राणपरा ने गुरुवार को निदेशक (कार्मिक) का पदभार ग्रहण कर लिया। इससे पहले वह ग्रिड-इंडिया में निदेशक (मानव संसाधन) के रूप में कार्यरत थे और मानव संसाधन प्रबंधन, प्रतिभा विकास, संगठनात्मक क्षमता निर्माण तथा कार्यबल नियोजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
मानव संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में 31 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले राणपरा ने सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में कार्य किया है। उन्होंने महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा से सामाजिक कार्य (एमएसडब्ल्यू) तथा सरदार पटेल विश्वविद्यालय से व्यवसाय प्रशासन (बीबीए) की डिग्री प्राप्त की है। वह एक्सएलआरआई, जमशेदपुर से प्रमाणित मूल्यांकनकर्ता भी हैं।
ग्रिड-इंडिया में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षमता निर्माण, नेतृत्व विकास, उत्तराधिकार योजना और प्रतिभा प्रबंधन को नई दिशा दी। प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षण अवसंरचना को मजबूत किया तथा संगठन में दीर्घकालिक नेतृत्व तैयार करने के लिए योग्यता आधारित उत्तराधिकार योजना को सफलतापूर्वक लागू कराया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षमता निर्माण से जुड़े परामर्श अवसरों को भी आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही।।
ग्रिड-इंडिया से पहले राणपरा गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) में मानव संसाधन प्रमुख रहे, जहां उन्होंने 60 हजार से अधिक कर्मचारियों के लिए मानव संसाधन नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन का नेतृत्व किया। गुजरात विद्युत बोर्ड के पुनर्गठन, संगठनात्मक परिवर्तन, कार्य-निष्पादन प्रबंधन प्रणाली, कार्यबल नियोजन और नेतृत्व विकास जैसी कई महत्वपूर्ण पहलों में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप कर्मचारियों के कौशल विकास और नवाचार को भी बढ़ावा दिया।
एनएचपीसी में निदेशक (कार्मिक) के रूप में राणपरा कंपनी की मानव संसाधन रणनीति, प्रतिभा प्रबंधन, संगठनात्मक विकास, औद्योगिक संबंध, कर्मचारी सहभागिता, प्रशिक्षण एवं विकास सहित सभी प्रमुख मानव संसाधन कार्यों का नेतृत्व करेंगे। माना जा रहा है कि उनके अनुभव और नेतृत्व से एनएचपीसी की मानव संसाधन प्रणाली और अधिक सशक्त होगी तथा कंपनी के विकास और संगठनात्मक उत्कृष्टता के लक्ष्यों को नई गति मिलेगी।

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