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डॉ.नितिन उपाध्याय ने 21 वर्षों की सेवा का अनुभव, नई पीढ़ी के अफसरों को सौंपा जिम्मेदार डिजिटल आचरण का मंत्र
Amar sandesh देहरादून। उत्तराखंड सरकार में अपनी सेवा के 21 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उत्तराखंड के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में **संयुक्त निदेशक (Joint Director) डॉ. ** ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय वित्तीय प्रशासन शिक्षण एवं शोध संस्थान (PDUCTRFA), देहरादून में आयोजित 15वें फाउंडेशन कोर्स के 59 नवचयनित ऑफिसर ट्रेनीज़ को संबोधित किया। संयोगवश अपनी वर्क एनिवर्सरी के दिन ही उन्हें “Digital Professionalism: Social Media for Civil Servants” विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखने का अवसर मिला।
डॉ. नितिन उपाध्याय ने डिजिटल युग में लोक सेवकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोशल मीडिया आज जनसंवाद का एक प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसके उपयोग में संयम, सत्यनिष्ठा और जिम्मेदारी सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि किसी भी पोस्ट, टिप्पणी या विचार को सार्वजनिक करने से पहले उसे ‘THINK’ सिद्धांत की कसौटी पर अवश्य परखें।
उन्होंने बताया कि T (True) अर्थात क्या जानकारी सत्य है, H (Helpful) क्या वह समाज के लिए उपयोगी है, I (Inspiring) क्या वह प्रेरणा देती है, N (Necessary) क्या उसे साझा करना वास्तव में आवश्यक है तथा K (Kind) क्या उसकी भाषा मर्यादित और विनम्र है—इन पांच सिद्धांतों का पालन प्रत्येक लोक सेवक के डिजिटल आचरण का आधार होना चाहिए।
अपनी सार्वजनिक फेसबुक पोस्ट में डॉ. नितिन उपाध्याय ने इस अवसर को अपने सरकारी जीवन का एक यादगार पड़ाव बताते हुए लिखा कि 21वीं वर्क एनिवर्सरी पर नवचयनित और ऊर्जावान अधिकारियों के साथ संवाद करना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। उन्होंने इस अवसर के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय वित्तीय प्रशासन शिक्षण एवं शोध संस्थान, कोर्स डायरेक्टर तथा समस्त आयोजन टीम के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
डिजिटल युग में प्रशासनिक सेवाओं के बदलते स्वरूप के बीच यह संवाद केवल सोशल मीडिया के तकनीकी उपयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोक सेवकों के लिए नैतिक, जिम्मेदार और संवेदनशील डिजिटल व्यवहार का भी प्रभावी संदेश बनकर उभरा। प्रशासनिक प्रशिक्षण के इस महत्वपूर्ण सत्र में डॉ. नितिन उपाध्याय का व्याख्यान नवचयनित अधिकारियों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा।
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