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“भक्ति, संस्कार और सामाजिक एकता का संगम बना मुस्याखांद का श्रीमद्भागवत कथा
अमर चंद्र
दिल्ली/मुस्याखांद (उत्तराखंड)। श्री मुस्याखांद ग्वेल भैरव मंदिर, थान अस्थाना मुस्याखांद में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का धार्मिक एवं भक्तिमय वातावरण में भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्म, भक्ति और मानवता के संदेश को आत्मसात किया।
व्यासपीठ से पूज्य आचार्य सतीश ध्यानी, आचार्य योगेश ध्यानी एवं उनकी विद्वान टीम द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया गया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर नजर आए। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में संस्कार, सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का कार्य करते हैं।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में सर्व भैरव देवता, श्री ग्वेल महाराज एवं माता महाकाली की विधिवत पूजा-अर्चना, पुष्प श्रृंगार एवं हवन का आयोजन किया गया। इसके उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी रघुवीर सिंह बिष्ट सहित जिला पंचायत सदस्य नीरज पंत, पूर्व प्रधान दीपक कंडारी, सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र सिंह कांडरी, मुकेश बिष्ट, भौन प्रधान बीरेंद्र सिंह रावत तथा अनेक गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
वहीं थानस्थान मुस्याखांद के पुजारी सादर सिंह घूरकुंडी, सोहन सिंह, मान सिंह, राम सिंह, सुरजीत सिंह एवं रविन्द्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
श्री मुस्याखांद ग्वेल भैरव मंदिर सेवा ट्रस्ट (पंजीकृत) ने आयोजन की सफलता के लिए सभी श्रद्धालुओं, सेवाभावी कार्यकर्ताओं एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। ट्रस्ट के प्रतिनिधि सोहन बिशन सिंह ने अमर संदेश बताया कि ग्वेल भैरव महाराज की कृपा से यह धार्मिक आयोजन अत्यंत सफल एवं श्रद्धामय वातावरण में संपन्न हुआ।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करते हैं। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने श्री ग्वेल भैरव महाराज से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की।
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