Post Views: 0
अमर चंद्र
नई दिल्ली। आजादी के 80वें पर्व पर शनिवार की सुबह राजधानी दिल्ली देशभक्ति के रंग में डूबी नजर आई। राष्ट्रगान, तिरंगे की शान और ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराकर देश को संबोधित किया। इसके साथ ही उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को नमन करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प देश के सामने रखा। इस वर्ष का आयोजन ‘युवा शक्ति से विकसित भारत@2047’ की भावना और वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के विशेष अवसर से भी जुड़ा रहा।
स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। इसके बाद प्रधानमंत्री लाल किले पहुंचे, जहां उनका औपचारिक स्वागत किया गया और उन्होंने ऐतिहासिक प्राचीर पर पहुंचकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
तिरंगा फहराए जाने के साथ ही 21 तोपों की सलामी दी गई और इसके बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष, मुख्य न्यायाधीश, केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ संवैधानिक पदाधिकारी, विपक्ष के प्रमुख नेता, तीनों सेनाओं के अधिकारी, दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में विशेष आमंत्रित अतिथि मौजूद रहे। समारोह में करीब 5,000 विशेष अतिथियों की भागीदारी रही।
‘हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा’ से शुरू हुआ राष्ट्र के नाम संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए की। उन्होंने कहा कि आज हर दिल की धड़कन वंदे मातरम के नाद से गूंज रही है। हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है और देश नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने आजादी के लिए संघर्ष करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों, महात्मा गांधी और महान क्रांतिकारियों को नमन करते हुए कहा कि उनके त्याग, तपस्या और बलिदान की प्रेरणा ही भारत की आगे की यात्रा का आधार है।
इस बार लाल किले के समारोह में वंदे मातरम का विशेष ऐतिहासिक महत्व भी रहा। स्वतंत्रता के बाद पहली बार लाल किले के आधिकारिक समारोह में ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति को विशेष रूप से रेखांकित किया गया, जबकि देश इसके 150 वर्ष पूरे होने का स्मरण कर रहा है।
2047 विकसित भारत का सबसे बड़ा संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत ने अब केवल विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से यह लक्ष्य हासिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश ने गरीबी से बाहर निकलने, रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग, मोबाइल उत्पादन, डिजिटल लेनदेन, पेटेंट, रेलवे, पाइप गैस, सौर ऊर्जा और आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की बढ़ती क्षमता यह विश्वास पैदा करती है कि विकसित भारत का संकल्प अधूरा नहीं रहेगा।
आत्मनिर्भर भारत से वैश्विक नेतृत्व तक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत को अपनी क्षमताओं और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा स्वयं करनी होगी। इसी सोच के साथ आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा को भविष्य के भारत की रणनीतिक ताकत बताते हुए प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य दोहराया।
उन्होंने कहा कि चिप से लेकर एआई और डेटा सेंटर तक नई अर्थव्यवस्था को बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होगी, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा अब केवल आर्थिक विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
‘शक्ति की सप्त धारा’ से बदलेगा भारत का विकास मॉडल
प्रधानमंत्री ने लाल किले से देश के सामने ‘शक्ति की सप्त धारा’ का आह्वान किया। इसके तहत मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोडक्शन, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की सॉफ्ट पावर को विकास की सात प्रमुख धाराओं के रूप में सामने रखा।
उन्होंने कहा कि भारत को केवल दुनिया का बाजार नहीं बनना है, बल्कि दुनिया के लिए मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का भरोसेमंद केंद्र बनना है।
युवा शक्ति बनेगी विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत
प्रधानमंत्री ने युवाओं को विकसित भारत का सबसे बड़ा लाभार्थी बताते हुए कहा कि देश की युवा शक्ति ही आने वाले भारत की दिशा तय करेगी।
उन्होंने आने वाले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को एआई स्किल की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य घोषित किया। स्टार्टअप, स्पेस, ड्रोन, रोबोटिक्स, क्वांटम तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था में युवाओं की भूमिका को उन्होंने भारत की वैश्विक शक्ति से जोड़ा।
खेलों में भी भारत को नई ऊंचाई देने की बात करते हुए उन्होंने 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी और देश में खेल प्रतिभाओं की खोज के लिए व्यापक टैलेंट हंट अभियान का उल्लेख किया।
नारी शक्ति को विकास की मुख्यधारा में लाने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने महिलाओं की आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी को विकसित भारत के लिए आवश्यक बताते हुए लखपति दीदी अभियान की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने अब 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य सामने रखा।
साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने के लिए महिला आरक्षण लागू करने का आग्रह किया।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी स्पष्ट संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते समय में युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, ड्रोन, काउंटर-ड्रोन, हाइपरसोनिक तकनीक और साइबर सुरक्षा को उन्होंने आने वाले समय की महत्वपूर्ण जरूरत बताया।
उन्होंने देश में आधुनिक सिविल डिफेंस नेटवर्क विकसित करने की घोषणा भी की।
अंतिम संदेश समय हमारा है, अवसर हमारा है’
अपने संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और कर्तव्य को जीवन की पहचान बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत को अपने सपनों को संकल्प में, संकल्प को सामर्थ्य में और सामर्थ्य को सफलता में बदलना होगा।
लाल किले से प्रधानमंत्री श्री मोदी का संदेश देश के सामने एक स्पष्ट दिशा के रूप में उभराभारत को आत्मनिर्भर बनाना है, विश्व में अपनी ताकत और पहचान मजबूत करनी है और 2047 में आजादी की शताब्दी तक विकसित भारत का सपना साकार करना है।
“
Related