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अनुसंधान से पुनः विश्वगुरु बनेगा भारत : रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री  रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि शोध एवं अनुसंधान किसी भी देश के विकास की मजबूत नींव हैं तथा भारत भी शोध एवं अनुसंधान के बल पर ही पुनः विश्वगुरु बनेगा। यह बात केंद्रीय मंत्री ने नई दिल्ली में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर देश भर के उच्च शिक्षा सचिवों की बैठक को संबोधित करने के दौरान कही। श्री निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति में राज्यों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी राज्यों को आह्वान किया कि शिक्षा नीति पर अधिक से अधिक मंथन होना चाहिए। शिक्षा नीति पूरे देश के लिए है और देश की नीति में सबकी सहभागिता सुनिश्चित होनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा पिछले  4 वर्षों में सभी हितधारकों के साथ हुए विस्तृत विचार-विमर्श का परिणाम है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य भारतीय शिक्षा प्रणाली का पुनर्गठन करना है ताकि भारत वैश्विक ज्ञान प्रणाली में एक प्रमुख भूमिका निभा सके। उन्होंने आगे कहा कि इस मसौदे में कई प्रावधान हैं   जिससे भारतीय शिक्षा प्रणली को नई दिशा मिलेगी। स्नातक शिक्षा का पुनर्गठन, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन द्वारा अनुसंधान को बढ़ावा देना, भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना, अधिक वित्तीय संसाधनों को इस क्षेत्र में लाना और उच्च शिक्षा प्रणाली में अधिक स्वायत्तता को बढ़ावा देना इसी दिशा में उठाये जाने वाले प्रावधान है। श्री निशंक ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज उच्च शिक्षा को अधिक रोजगार परक,शोध परक, नवाचार युक्त, प्रौद्योगिकी युक्त और जवाबदेह होने की आवश्यकता है ताकि युवाओं को सही दिशा मिल सके। केंद्रीय मंत्री ने जर्मनी, जापान और इस्राइल जैसे विकसित देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को भी अपनी मातृभाषाओं में अधिक से अधिक शोध को बढ़ावा देना चाहिए। श्री निशंक ने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने  के लिए राज्यों को और अधिक प्रयास करना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने साथ ही कहा कि देश के बेहतर भविष्य के लिए हमारे ऊपर अपनी रणनीतियों को समयबद्ध रूप से क्रियान्वित करने की महती जिम्मेदारी है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली पर अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरकर देश को वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। श्री निशंक ने सभी राज्यों के सचिवों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने हेतु सभी शैक्षणिक संस्थानों में रिक्त पड़े पदों को तुरंत भरने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी राज्यों को इस विषय में गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है।

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