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-डॉ के सी पांडेय
नई दिल्ली: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के जनपद संपदा विभाग और ‘सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ ट्रेडिशन एंड सिस्टम्स’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं मधुबनी साहित्य महोत्सव “वैदेही: सीता शरीर से परे” का सफलतापूर्वक समापन हुआ। 25 अप्रैल से 1 मई, 2026 तक चले इस सप्ताह भर के उत्सव ने राजधानी के कला प्रेमियों को मिथिला की समृद्ध परंपरा और माता सीता के आध्यात्मिक स्वरूप से रूबरू कराया।
महोत्सव का शुभारंभ आईएनजीसीए ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। उद्घाटन समारोह में अंतरराष्ट्रीय संबंधों और उद्यमिता जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिरकत की। मुख्य अतिथि के रूप में नेपाल दूतावास के उप मिशन प्रमुख डॉ. सुरेंद्र थापा और विशिष्ट अतिथि के रूप में ‘योर स्टोरी मीडिया’ की संस्थापक सुश्री श्रद्धा शर्मा उपस्थित रहीं। इस अवसर पर प्रदर्शनी कैटलॉग का विमोचन और माता सीता के जीवन पर आधारित विशेष संगीतमय प्रस्तुति “अठ-सीतायन” ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
इस आयोजन का मुख्य विषय ‘जानकी सत्व’ (जानकी का सार) पर केंद्रित था। प्रदर्शनी ने माँ सीता को केवल एक पौराणिक पात्र के रूप में नहीं, बल्कि शक्ति, त्याग और लचीलेपन की एक शाश्वत मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया। “वैदेही” के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि सीता का अस्तित्व उनके भौतिक शरीर से कहीं परे एक गहरे आध्यात्मिक आयाम में समाहित है, जो आज के युग में भी पहचान की खोज और स्त्री गरिमा के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
महोत्सव के दौरान 26 से 30 अप्रैल तक आयोजित कला प्रदर्शनी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की मिथिला कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया। दर्शकों के लिए ये कलाकृतियाँ बिक्री हेतु भी उपलब्ध थीं। इसके साथ ही, प्रतिदिन आयोजित होने वाली संवादात्मक कार्यशालाओं में युवाओं और कला साधकों ने मिथिला पेंटिंग की बारीकियों को सीखा। कार्यक्रम का एक अन्य मुख्य आकर्षण ‘वैदेही सम्मान’ रहा, जिसमें कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया।
1 मई, 2026 को इस महोत्सव का औपचारिक समापन हुआ। समापन समारोह में सभी प्रतिभागी कलाकारों और कार्यशाला के प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनकी कला साधना को सराहा गया। आयोजकों ने बताया कि इस मंच का उद्देश्य “कला यस्मिन प्रतिष्ठाः” (जहाँ कला स्थापित होती है) के भाव को सार्थक करना था। जनपद संपदा विभाग और मधुबनी साहित्य महोत्सव की टीम के आपसी सहयोग ने इस कार्यक्रम को एक ऐतिहासिक सफलता प्रदान की, जिसने मिथिला की लोक कला को वैश्विक पटल पर एक नई दृष्टि दी।
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