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पूर्वोत्तर बनेगा भारत की ऊर्जा क्रांति का नया केंद्र, डुलियाजान में हरदीप सिंह पुरी ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

असम-नागालैंड की हाइड्रोकार्बन क्षमता के दोहन, प्राकृतिक गैस बाजार सुधार और हरित ऊर्जा संक्रमण पर हुआ मंथन

 

Amar sandesh नई दिल्ली/असम। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करने और पूर्वोत्तर भारत को ऊर्जा क्षेत्र के विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की अध्यक्षता में असम के डुलियाजान में 12वें ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र का आयोजन किया गया। बैठक में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख ऊर्जा कंपनियों के अध्यक्षों एवं प्रबंध निदेशकों ने भाग लिया।

बैठक में ओएनजीसी के अध्यक्ष एवं सीईओ अरुण कुमार सिंह, इंडियन ऑयल के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी, गेल (इंडिया) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक दीपक गुप्ता, अन्य उपकरणों के सीएमडी सहित ऊर्जा क्षेत्र के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में असम और नागालैंड के लिए तेल एवं गैस अन्वेषण (E&P) रणनीति तथा हाल ही में हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) के कार्यान्वयन रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से पूर्वोत्तर क्षेत्र की विशाल हाइड्रोकार्बन क्षमता का दोहन होगा, आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे।

इस बैठक में वर्ष 2030 तक एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और एकीकृत प्राकृतिक गैस बाजार विकसित करने के लिए आवश्यक विधायी, नियामकीय और संस्थागत सुधारों की भी समीक्षा की गई। इसके साथ ही देश की रिफाइनरियों की कार्यक्षमता बढ़ाने तथा ऊर्जा अवसंरचना को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

ऊर्जा परिवर्तन के वैश्विक दौर में भारत की भूमिका को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से हरित ऊर्जा और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों और उद्योग प्रमुखों ने अगली पीढ़ी के जैव ईंधनों (Next Generation Biofuels) को अपनाने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने तथा ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करने के उपायों पर अपने विचार रखे।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पूर्वोत्तर भारत की ऊर्जा क्षमता का अधिकतम उपयोग करते हुए देश को वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर और अधिक मजबूत स्थान दिलाने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि डुलियाजान में आयोजित यह उच्चस्तरीय मंथन भारत की ऊर्जा रणनीति को नई दिशा देने के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों को विकास और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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