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Amar sandesh कोलकाता । विश्व योग दिवस 2026 के अवसर पर शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ विषय पर राष्ट्रीय ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ज़ूम माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्वानों एवं प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी गायत्री उपाध्याय ने किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में योग केवल एक दिवस तक सीमित रहने वाला उत्सव नहीं, बल्कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। उन्होंने शब्दभूमि प्रकाशन की साहित्यिक एवं सामाजिक गतिविधियों की जानकारी भी दी।
संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ पर विशेष चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि योग शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का प्रभावी माध्यम है तथा वृद्धावस्था को सक्रिय, आत्मनिर्भर एवं स्वस्थ बनाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा की शोधार्थी संगीता सिंह ने ‘परिवार, समाज और नीति निर्माण में योग की भूमिका’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि योग व्यक्ति के समग्र विकास का माध्यम है। योग पारिवारिक संबंधों को मजबूत करता है, सामाजिक समरसता बढ़ाता है तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी नीतियों को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ की सहायक आचार्य डॉ. सुधा मौर्य ने ‘स्वस्थ आयु के लिए योग : भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि संतुलित, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की समग्र पद्धति है। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से वृद्धजनों की शारीरिक क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य एवं जीवन संतुष्टि में वृद्धि होती है।
बिहार के आशीष कुमार ने योग पर अपनी काव्यात्मक प्रस्तुति दी तथा योग को दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाने का आह्वान किया। पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार से जुड़े मंगल पांडे ने महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। मध्यप्रदेश के शिक्षक नंद किशोर गौतम ने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है और योग स्वस्थ समाज एवं राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है।
उत्तर प्रदेश की छात्रा रागिनी पांडेय ने ‘योग और प्रतिरक्षा तंत्र : उम्र के साथ संतुलन’ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नियमित योगाभ्यास बढ़ती आयु के प्रभावों को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
संगोष्ठी का खुला मंच प्रतिभागियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। बेंगलुरु की प्रतिभागी अनीता मोदी ने योग पर अपनी स्वरचित कविता प्रस्तुत की और कहा कि समयाभाव का बहाना छोड़कर योग को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
अंत में पतंजलि विश्वविद्यालय की छात्रा जान्हवी पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियाँ समाज में स्वास्थ्य जागरूकता और सकारात्मक जीवन मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अमर संदेश को कोलकाता से शिक्षाविद् विनोद यादव द्वारा दी गई।
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