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पी2पी भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा, ज्यादातर व्यापारिक लेन-देन भी निःशुल्क; चुनिंदा बड़े लेन-देन पर ही मामूली एमडीआर का प्रावधान
अमर चंद
नई दिल्ली। यूपीआई पर शुल्क लगाए जाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि यूपीआई से पैसे भेजने या प्राप्त करने वाले आम नागरिकों से कोई लेन-देन शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार ने कहा है कि रोजमर्रा के भुगतान पहले की तरह निःशुल्क रहेंगे।
सरकार के अनुसार पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा। यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को यूपीआई के जरिए पैसे भेजने पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगेगा।
व्यापारियों के लिए भी ज्यादातर भुगतान मुफ्त
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यापारियों को किए जाने वाले अधिकांश यूपीआई भुगतान भी निःशुल्क रहेंगे। भविष्य में यदि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किया जाता है, तो यह सभी लेन-देन पर नहीं लगाया जाएगा।
एमडीआर केवल कुछ चुनिंदा व्यापारिक लेन-देन और निर्धारित सीमा से अधिक के भुगतान पर मामूली दर से लागू किए जाने का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि यह शुल्क डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले एमडीआर की तुलना में काफी कम होगा।
क्यों किया गया कानून में बदलाव?
यूपीआई का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है। करोड़ों लोग रोजाना इसके जरिए भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में यूपीआई के नेटवर्क को सुरक्षित रखने, साइबर धोखाधड़ी रोकने, तकनीकी सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाने और बढ़ते लेन-देन का दबाव संभालने के लिए बड़े स्तर पर निवेश की जरूरत है।
सरकार का कहना है कि भविष्य में यूपीआई को केवल सरकारी सहायता पर निर्भर रखने के बजाय एक मजबूत और टिकाऊ व्यवस्था बनाना जरूरी है। भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में किया गया संशोधन इसी दिशा में एक कदम है।
एमडीआर पर अंतिम फैसला समिति करेगी
सरकार के अनुसार संसद से कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होने के बाद एमडीआर से जुड़े किसी भी फैसले पर एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली ‘यूपीआई और सेवा संचालन समिति’ विचार करेगी।
इसलिए अभी से यह कहना कि हर यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगने लगेगा, सही नहीं है। सरकार ने ऐसी आशंकाओं को स्पष्ट रूप से खारिज किया है।
यूपीआई बना भारत की डिजिटल पहचान
वर्ष 2016-17 में शुरू हुआ यूपीआई आज भारत के सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान माध्यमों में शामिल है। सरकार के अनुसार जुलाई 2026 में ही यूपीआई के जरिए 2,366 करोड़ लेन-देन हुए, जिनकी कुल राशि करीब ₹29.9 लाख करोड़ रही।
यूपीआई अब भारत की सीमाओं से बाहर भी पहुंच बना चुका है और 11 विदेशी देशों में सक्रिय है।कई अन्य देश भी भारत की इस डिजिटल भुगतान व्यवस्था में रुचि दिखा रहे हैं।
सरकार ने फर्जी खबरों से सावधान रहने को कहा
सरकार ने यूपीआई पर शुल्क लगाए जाने को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में चल रही अटकलों पर लोगों से सावधान रहने को कहा है। सरकार का कहना है कि यूपीआई भारत का अपना डिजिटल नवाचार है और इसे आम नागरिकों के लिए सुलभ और किफायती बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि यूपीआई से संबंधित किसी भी बदलाव की जानकारी के लिए वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और एनपीसीआई की आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और अपुष्ट खबरों को आगे न बढ़ाएं।
साफ शब्दों में सरकार का संदेश है आम आदमी के रोजमर्रा के यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
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