भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को धर्मस्थल जीवंत बनाएं— महंत ज्ञानदेव सिहं

दिल्ली 2 अप्रैल । नवसंवत्सर 2079 का स्वागत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अखंड पाठ के साथ गुरुद्वारा संत पुरा मॉडल टाउन में किया गया ।

श्री निर्मल पंचायती अखाड़े के प्रमुख परम पूज्य श्री महंत श्री ज्ञानदेव सिंह जी की अध्यक्षता में देश-विदेश से पधारी संगत के साथ धूमधाम से नव वर्ष मनाया गया । गुरुद्वारा डेरा संत पुरा के संस्थापक ब्रह्मलीन संत श्री भक्त सिंह जी महाराज की 101वीं पुण्यतिथि पर आज उन्हें नमन किया गया ।

वर्तमान पाकिस्तान की तहसील केमलपुर के पिंडीघेव में संत पुरा आश्रम की स्थापना भक्त सिंह जी महाराज ने की थी और उनके सानिध्य में पारंपरिक भारतीय नववर्ष को धूमधाम से मनाया जाता था । जो आज विभाजन के बाद भी गुरुद्वारा संत पुरा मॉडल टाउन दिल्ली, मोदीनगर और धुंधाथेह, गोविंद वाल जिला अमृतसर में प्रतिवर्ष मनाया जाता है और संतों की महान परंपरा को याद किया जाता है ।

नव वर्ष के पावन आगमन के अवसर पर हरिद्वार से पधारे श्री महंत ज्ञानदेव सिंह महाराज जी ने कहा कि श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज द्वारा स्थापित सिख परंपरा में प्रत्येक परिवार से एक बालक संस्कृति रक्षा के लिए भेजा गया । एक ही परिवार में एक बालक केशधारी सिख होता था तो दूसरा बिना केशधारी मोना। सब मिलकर राष्ट्र, संस्कृत की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तत्पर रहते थे, अलगाववाद कहां था।

आज पूज्य गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा स्थापित परंपरा का चिंतन करना होगा । हम सभी को एक होना होगा । आज अलगाववादी भयावह स्थिति में धर्मस्थलों को सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाना होगा । अलगाववाद के स्थान पर एकजुटता स्थापित करनी होगी । संत पुरा गुरुद्वारे के महंत ओंकार सिंह जी ने कहा कि हमारी संस्कृति परंपरा को संत जीवंत नहीं रखेंगे तो कौन रखेगा । आने वाली पीढ़ी को कौन संस्कार सिखाएगा। हमारी पीढ़ियां बिना बताए भारतीय संस्कृति परंपरा का पालन कैसे करें । हमें हमारे धर्म स्थलों की जिम्मेदारी को समझना होगा । गुरुओं के स्थान को परंपराओं को जीवंत करना होगा । आज के कार्यक्रम में लोकेश शर्मा जी ने कहा की संत भक्त सिंह जी की परंपरा को संत श्री ओंकार सिंह जी की छत्रछाया में गुरुद्वारा संतपुरा जीवंत बनाए हुए हैं । उन्होंने आई हुई संगत से आग्रह किया कि वह अपने साथ बच्चों को अवश्य लेकर आएं जिससे हमारी महान सांस्कृतिक परंपरा को वह समझ सकें और उस को जीवंत बनाए रखने का मन में संकल्प लें । कार्यक्रम के समापन पर श्री रामायण रिसर्च काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत जी, मेदांता हॉस्पिटल के डॉक्टर जगदीप सिंह जी, समाजसेवी अशोक सिंघारिया जी का शाल ओढ़ाकर सम्मान किया। अजय पंवार और ब्रह्मचारी रूपक जी की देखरेख में तीन दिन तक चले श्री गुरुग्रंथ साहिब के अखंड पाठ की पूर्णाहुति गुरु के अटूट लंगर भंडारे के साथ की गई।
नववर्ष के उपलक्ष में गुरुद्वारा माडल टाउन के श्री जसविंदर सिंह और द्वारका से पधारे नामधारी संत श्री बलजिंदर सिंह ने भावपूर्ण कीर्तन से सबको भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

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