राजस्थान

लोकमंथन 2026 का जयपुर से भव्य शंखनाद, ‘हम भारत के लोग’ बनेगा राष्ट्रीय सांस्कृतिक विमर्श का आधार

राजस्थान स्वागत समिति के उपाध्यक्ष बने डॉ. आदित्य नाग, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा संभालेंगे अध्यक्ष की जिम्मेदारी

 

amar sandesh दिल्ली/जयपुर।भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति, कला और राष्ट्रीय विमर्श को एक साझा मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले ‘लोकमंथन 2026’ का भव्य शंखनाद जयपुर के कांस्टीट्यूशन क्लब में किया गया। “हम भारत के लोग” विषय पर आधारित यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन 4, 5 और 6 दिसंबर 2026 को गुलाबी नगरी जयपुर में आयोजित होगा।

कर्टेन रेज़र कार्यक्रम में आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि लोकमंथन 2026 भारतीय लोकबुद्धि, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय चिंतन को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा। इसमें देशभर के विद्वान, शिक्षाविद, चिंतक, कलाकार, लोक परंपराओं के संवाहक और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जे. नंदकुमार रहे, जिन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनका स्वागत डॉ. आदित्य नाग ने किया। इस अवसर पर तनगाराम मील, जिन्हें पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है, विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

समारोह में राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा तथा क्षेत्र संचालक डॉ. रमेश अग्रवाल की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। वहीं केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के आयोजन से जुड़ने की जानकारी भी दी गई।

कर्टेन रेज़र समारोह के दौरान दिसंबर में होने वाले महाआयोजन के लिए राजस्थान राज्य स्वागत समिति की औपचारिक घोषणा की गई। इसके तहत भजनलाल शर्मा को स्वागत समिति का अध्यक्ष तथा डॉ. आदित्य नाग को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। आयोजन समिति ने इसे व्यापक जनसहभागिता, सांस्कृतिक समन्वय और सफल आयोजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

आयोजकों के अनुसार, लोकमंथन 2026 केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की लोक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक भविष्य पर केंद्रित राष्ट्रीय संवाद का मंच है। इसका उद्देश्य भारतीय समाज की विविध लोक परंपराओं, ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।

देशभर के विद्वानों, शोधकर्ताओं, कलाकारों, शिक्षाविदों और नागरिकों से इस राष्ट्रीय आयोजन में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया गया है, ताकि भारतीय संस्कृति और लोकचिंतन की समृद्ध विरासत को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

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