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उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित होंगी लोकगायिका हेमा नेगी करासी

उत्तराखंड की लोक संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाली स्वर साधिका को मिली बड़ी राष्ट्रीय पहचान

प्रताप थलवाल

देहरादून। उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध लोकगायिका हेमा नेगी करासी का चयन देश के प्रतिष्ठित “उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार” के लिए होने पर प्रदेशभर में खुशी की लहर है। लोक संगीत और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया जा रहा है। इस उपलब्धि को उत्तराखंड की लोक कला, लोकगीत और सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।रुद्रप्रयाग जनपद के टुखिंडा गांव की निवासी हेमा नेगी करासी वर्षों से उत्तराखंड की पारंपरिक जागर, मांगल, लोकगीत और लोक संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। अपनी मधुर आवाज़ और विशिष्ट गायन शैली के माध्यम से उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया है।

हेमा नेगी करासी अब तक 50 से अधिक एलबमों और 100 से अधिक गीतों को अपनी आवाज़ दे चुकी हैं। उनके द्वारा गाए गए जागर और लोकगीत उत्तराखंड के घर-घर में लोकप्रिय हैं। उन्होंने दुबई, जापान और न्यूजीलैंड सहित कई देशों में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्तराखंड की लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर प्रदेश का मान बढ़ाया है।

साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय पहचान बनाने वाली हेमा का जीवन संघर्ष और समर्पण की प्रेरणादायक कहानी है। मात्र चार वर्ष की आयु में पिता का साया उठ जाने के बाद उनकी माता बच्ची देवी ने कठिन परिस्थितियों में उनका पालन-पोषण किया। बचपन से ही लोक संस्कृति और संगीत के प्रति उनका लगाव उन्हें आज इस मुकाम तक लेकर आया है।

लोक संस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान के लिए उन्हें पहले भी अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रदान किया गया तीलू रौतेली पुरस्कार उनके प्रमुख सम्मानों में शामिल है। इसके अलावा देश-विदेश की विभिन्न संस्थाओं ने भी उनके कार्यों को सम्मानित किया है।

हेमा नेगी करासी के “उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार” के लिए चयन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लगा हुआ है। देश और विदेश में बसे उत्तराखंडवासियों सहित उनके प्रशंसक लगातार उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह खबर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे उत्तराखंड की लोक संस्कृति की बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं।

लोकगायिका हेमा नेगी करासी का कहना है कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, लोक कलाकारों और उन सभी लोगों का है जो अपनी संस्कृति को जीवित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वह अपनी लोक संस्कृति, लोकगीतों और जागर परंपरा को नई पीढ़ी तथा विश्व समुदाय तक पहुंचाने का कार्य पूरी निष्ठा से करती रहेंगी।

यह सम्मान निश्चित रूप से उत्तराखंड की लोक संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ युवा कलाकारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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