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ग्रामीण भारत में बढ़ते मधुमेह पर केंद्र का फोकस, डॉ. जितेंद्र सिंह बोले रोकथाम बने राष्ट्रीय प्राथमिकता

ग्रामीण भारत में डायबिटीज पर केंद्र का फोकस, डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुरू किया डिजिटल पोर्ट

RSSDI के ग्रामीण आउटरीच डिजिटल पोर्टल और ‘विश्वास’ डायबिटीज जागरूकता वीडियो लाइब्रेरी का शुभारंभ

 

Amar sandesh नई दिल्ली।ग्रामीण भारत में तेजी से बढ़ते मधुमेह के मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने चिंता जताते हुए प्रिवेंटिव हेल्थकेयर यानी बीमारी से पहले बचाव और समय पर जांच को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने पर जोर दिया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमेह की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए सामुदायिक भागीदारी, आधुनिक तकनीक और विश्वसनीय स्वास्थ्य आंकड़ों का प्रभावी इस्तेमाल जरूरी है।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (RSSDI) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘डायबिटीज रूरल आउटरीच डिजिटल पोर्टल’ और ‘विश्वास’ (VISHWAS) डायबिटीज जागरूकता वीडियो लाइब्रेरी का शुभारंभ किया।

युवा भारत को स्वस्थ रखना जरूरी

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम उम्र की है। ऐसे में देश की युवा आबादी को मधुमेह और अन्य ऐसी बीमारियों से बचाना, जिनकी रोकथाम संभव है, विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि भारत अब स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि इन उपलब्धियों का लाभ शहरों के साथ-साथ गांवों और कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों तक भी पहुंचे।

समय पर जांच और लगातार निगरानी पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ग्रामीण भारत अब मधुमेह की चुनौती से अछूता नहीं है। बीमारी की शुरुआती पहचान, समय पर उपचार, जीवनशैली में सुधार और नियमित फॉलो-अप से मधुमेह और उससे होने वाली जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने RSSDI के ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा गांवों को गोद लेकर जागरूकता, स्क्रीनिंग, उपचार और फॉलो-अप की व्यवस्थित व्यवस्था तैयार करना ग्रामीण लोगों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। यह कार्यक्रम अब तक कई राज्यों के करीब 30 गांवों तक पहुंच चुका है और भविष्य में इसका विस्तार करने की योजना है।

डिजिटल पोर्टल से मजबूत होगा स्वास्थ्य रिकॉर्ड

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नया डिजिटल पोर्टल ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमेह से जुड़े मामलों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मरीजों का पंजीकरण, उपचार का विवरण, नियमित फॉलो-अप और कार्यक्रम की निगरानी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संभव होग

उन्होंने कहा कि इस तरह तैयार होने वाला बिना पहचान वाला वास्तविक स्वास्थ्य डेटा भविष्य में बीमारी के पैटर्न को समझने और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर स्वास्थ्य नीतियां एवं उपचार मॉडल तैयार करने में मदद कर सकता है।

सरकार, विशेषज्ञ और तकनीकी संस्थाएं मिलकर करें काम

केंद्रीय मंत्री ने मधुमेह सहित अन्य गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए सरकारी एजेंसियों, शिक्षण संस्थानों, तकनीकी संस्थाओं, निजी क्षेत्र और स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य अब अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने से नहीं, बल्कि मेडिकल साइंस, इंजीनियरिंग, तकनीक और डिजिटल नवाचार को साथ लाने से मजबूत होगा।

स्थानीय भाषाओं में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की जरूर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को भारत की भाषाई और क्षेत्रीय विविधता के अनुरूप बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म तभी वास्तव में उपयोगी साबित होंगे, जब उनकी जानकारी देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों की स्थानीय भाषा और बोलियों में आसानी से समझी जा सके।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता के लिए बेहद जरूरी है।

मधुमेह से लड़ाई केवल डॉक्टरों की जिम्मेदारी नहीं

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मधुमेह आज देश के सामने प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य संबंधी अंतर भी कम हो रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मधुमेह की रोकथाम और उससे होने वाली जटिलताओं से बचाव केवल डॉक्टरों की जिम्मेदारी नहीं हो सकता। इसके लिए व्यक्ति, परिवार, समुदाय, स्वास्थ्यकर्मी और संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।

‘विश्वास’ से गांवों तक पहुंचेगी जागरूकता

RSSDI के ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रम और ‘विश्वास’ पहल का उद्देश्य ग्रामीण लोगों तक मधुमेह के प्रति जागरूकता, शुरुआती जांच, उपचार, नियमित फॉलो-अप और डिजिटल स्वास्थ्य संसाधन पहुंचाना है। डिजिटल पोर्टल के माध्यम से लाभार्थियों के पंजीकरण और उपचार संबंधी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने के साथ-साथ भविष्य की जनस्वास्थ्य योजनाओं और शोध के लिए उपयोगी डेटा तैयार किया जा सकेगा।

कार्यक्रम में RSSDI के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुज माहेश्वरी, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. राकेश पारिख, IDF दक्षिण-पूर्व एशिया के अध्यक्ष डॉ. बंशी साबू और NABH के अध्यक्ष रिजवान कोइता सहित मधुमेह एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ और प्रमुख हितधारक मौजूद रहे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने उम्मीद जताई कि RSSDI सरकारी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, तकनीकी भागीदारों और स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग से इस ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रम को मधुमेह और अन्य गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं प्रबंधन का देशव्यापी, टिकाऊ और प्रभावी मॉडल बनाएगा।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए नई प्रतिबद्धता का आह्वान करते हुए कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान, डिजिटल तकनीक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ देश के हर गांव और हर नागरिक तक पहुंचना चाहिए।

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