कोविड-19 के मसले पर चीन का दोष सिद्ध करने को आतुर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

सी एम पपनैं

विश्व का सबसे शक्तिशाली व स्मृद्ध राष्ट्र अमेरिका कोरोना विषाणु संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित राष्ट्रों मे से एक है। अमेरिका में कोरोना संक्रमण के लोगों की संख्या दस लाख से ऊपर पहुच चुकी है। दुनिया भर में आए 31 लाख संक्रमण के मामलों का करीब एक तिहाई अमेरिका से है। 59,000 हजार लोगों की हुई मौत, दुनिया भर में हुई कुल मौतो 2,13,000 का एक चौथाई का आंकड़ा अकेले अमेरिका से है। संक्रमण व मौतों के बढ़ते क्रम मे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार चीन की करामात को दोहरा रहे हैं। जल्द ही विश्व के राष्ट्रों के सम्मुख चीन को बेनकाब करने को आतुर हैं।

इतिहास गवाह है, शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका एक बार जो ठान लेता है, उसे पूर्ण कर ही दम लेता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण उसने 2001 मे न्यूयार्क शहर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले के मुख्य दोषी अल कायदा आतंकी संगठन सरगना ओसामा बिन लादेन को ढूढ़ व मारकर कर दिखाया था। वह खूंखार आतंकी सरगना जो विश्व के देशों में आतंक फैलाने का दोषी था, गलती से साजिसन अमेरिकी न्यूयार्क शहर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को ध्वस्त करने का दुस्साहस कर बैठा था।

महाशक्तिशाली खुफिया एजेंसी सीआईए सदा अमेरिकी राष्ट्र की सिरमौर रही है। विश्व की बहुचर्चित व सबसे बड़े बजट वाली एजेंसी के नाम से जानी जाती रही है। उक्त एजेंसी को श्रेय जाता है, विश्व के देशों का सिरदर्द बन चुके खूंखार अल कायदा आतंकी संगठन सरगना ओसामा बिन लादेन को 2 मई 2011 को बेखबर पाकिस्तान के ऐबटावाद मे ढूढ़, नोसेना की खास फोर्स सील कमांडो द्वारा चलाए गए आपरेशन ‘नेपच्युन स्पीयर’ द्वारा अंजाम दे, उसकी लाश को अंजान समुद्र की गहराई मे दफन कर देने का।

एक बार पुनः विश्व की इस सबसे शक्तिशाली अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के सम्मुख चुनोती खड़ी है, कोविड-19 फैलाने वाले राष्ट्र की बदनियती को प्रमाण सहित सामने लाने की। विश्व के समस्त राष्ट्रों के सम्मुख अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने की।

अमेरिका कोविड-19 फैलाने के मामले मे चीन को बेनकाब करने के लिए निश्चय ही अपनी परिपक्व खुफिया एजेंसी सीआईए की मदद से चीन की बदनियती पर अंकुश व उसकी आंतरिक गतिविधियों पर गिद्ध दृष्टि रख, विश्व के राष्ट्रों के सम्मुख उसके कारनामो का खुलासा करने की पूर्ण क्षमता रखता है। इसी क्षमता व मिल रही खुफिया जानकारी के बल अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार चीन को कोविड-19 फैलाने का दोषी मान रहे हैं।

कोविड-19 फैलने के शुरुआती दौर मे कयास लगाया जा रहा था, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक अर्थव्यवस्था की होड़ मे प्रथम स्थान पर टिके रहने हेतु चीन को कोरोना का दोषी ठहरा, कुटिल चाल चल रहे हैं। ट्रंप द्वारा बार-बार दम ठोक कर चीन की कभी माफ न करने वाली करतूत को दोहराया जाना उसकी खुफिया एजेंसी की पुख्ता जानकारी का होना माना जा सकता है। जिसे अमेरिका को प्रमाण सहित विश्व के देशों के सम्मुख सिद्ध करना है, वह जो कह रहा है, सच है।

पुख्ता जानकारी के बल ही डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन पर गैर जिम्मेदार तरीके से काम करने, संगठन की बैठक चीन के प्रभाव में आकर न बुलाने का खुला आरोप लगाया था। संगठन को अमेरिका द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता को बंद करने के एलान के पीछे पुख्ता जानकारी का होना माना जा सकता है। सहायता बंद करने के पीछे कारण बताया गया था, जब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन कोविड-19 की समीक्षा नही कर लेता, तब तक पचास करोड़ अमेरिकी डॉलर की धनराशि पर रोक जारी रहेगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वित्त पोषण पर रोक लगाने के बाद संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस, 27 देशों के संगठन यूरोपीय संघ प्रमुख जोसेप बोरेल तथा जर्मनी के विदेश मंत्री हेईको मास द्वारा बयान जारी कर कहा गया था, यह समय संगठन के संसाधन को कम करने का नही है, क्यों कि यह संस्था अभी कोविड-19 की महामारी से लड़ रहा है। अमेरिका द्वारा प्रमुख राष्ट्रों व संगठन की बातों को अनसुना करने के कारणों को उसके द्वारा जोर-शोर से कही जा रही बातों से जाना जा सकता है।

वैश्विक फलक पर कोविड-19 के बढ़ते क्रम के बावजूद ताज्जुब किया जा रहा था, आखिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस वैश्विक संकट पर बैठक आयोजित क्यों नही कर रहा है। माह मार्च मे चीन की अध्यक्षता समाप्त होते ही कोविड-19 से उत्पन्न संकट पर वीडियो कांफ्रैंनसिंग के जरिए डोमिनिकन गणराज्य की अध्यक्षता मे पहली बैठक बुलाई जा सकी थी। हालांकि बैठक मे एकजुटता दिखा, एकता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया। उक्त संकट को एक पीढ़ी की लड़ाई और इस तरह की समस्या को निपटने को संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य करार दिया गया। उक्त संकट को पहला और सबसे बड़ा स्वास्थ संकट बता, इसके प्रभावो को दूरगामी बताया गया। महामारी को अंतरराष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए बड़ा खतरा बताया गया। सामाजिक अशांति और हिंसा बढ़ने तथा महामारी से लड़ने की क्षमता कमजोर होने की आशंका जाहिर की गई। सामने आई कमजोरियों और तैयारियो के अभावो के संकेतो की ओर विश्व के राष्ट्रों का ध्यान यह कह कर आकर्षित किया गया, जैव आतंकवादी हमलों के क्या परिणाम हो सकते हैं, राज्येतर समूह उन खतरनाक वायरस तक पहुंच हासिल कर, विश्वभर में समाज को इसी तरह तबाह कर सकते हैं, के बावत चेताया गया।

विश्व स्वास्थ संगठन की मारियावान केरखोच ने भी महामारी के बढ़ते संकट पर अपने बयान मे कहा था, संक्रमण जारी रहने के दौरान हर मामले और मौत को पहचानना चुनोतीपूर्ण होता है। कई देशों में ऐसी परिस्थिति पैदा हुई। उन्हे पीछे मुड़ कर अपने रिकार्ड की समीक्षा करनी होगी। कई देश चीन की तरह अपने लोगो की मृतक संख्या को संसोधित कर सकते हैं। इसी मसले पर विश्व स्वास्थ्य संगठन आपात मामलो के निर्देशक माइकल रेयान ने भी कोविड-19 से हुई मृतको की संख्या पर अपील जारी कर कहा था, सभी देश उक्त स्थिति का सामना करेंगे, सभी राष्ट्र जल्द से जल्द सटीक आंकड़े मुहैया करवाए।

कोविड-19 की वैश्विक भयावह स्थिति को देख, संयुक्त राष्ट्र की इकाई विश्व खाद्द्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) प्रमुख डेविड विसले ने भी अपने बयान मे भुखमरी व गरीबी की आशंका जता अवगत कराया था, पूरे विश्व में 82 करोड़ लोग भुखमरी से पीड़ित हैं, जो 2020 तक दस करोड़ और बढ़ जायेंगे। उन्होंने कहा था, विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार सरकार का पहला काम जनता को भरपेट खाना देना है। जब नागरिक भूख से नही लड़ पायेगा तो कोविड-19 से लड़ने का सवाल ही पैदा नही होता। मध्य वर्ग के लिए भी इधर कुआं उधर खाई की बात उन्होंने कही थी।

डेविड विसले ने बयान में कहा था, कोविड-19 वैश्विक महामारी न सिर्फ उन धनी देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है, बल्कि संवेदनशील व संघर्षग्रस्त देशों पर भी असर डाल रही है, जहा लाखों लोग भुखमरी का सामना करने को मजबूर हो जायेंगे। इसलिए आपूर्ति श्रखंला को बरकरार रखना जरूरी है। इसमे कई संभावित बाधाए हैं, जैसे निर्यात पर लगे प्रतिबंध, सीमाओं व बंदरगाहों को बंद करना, खेत में फसलों का न उपजना, सड़कों को बंद रखना। डेविड विसले के बयान के मुताबिक, बुरी से बुरी स्थिति में करीब 36 देशों में अकाल पड़ सकता है। पहले ही लाखों लोग भुखमरी के कगार पर चल रहे हैं।

वैश्विक फलक पर गठित समस्त संगठन प्रमुखों के बयानों के बीच अमेरिका सहित विश्व के राष्ट्रों को चीन की एक महिला लेखिका फैंग-फैंग की डायरी से चीन द्वारा विश्व के देशों के सम्मुख छिपाई गई करतूतों के सच को जानने का मौका मिला, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन के खिलाफ कही जा रही बातों को बल मिलने लगा।

कोरोना विषाणु संक्रमण जनक चीन के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र बुहान का सच चीनी महिला लेखिका फैंग-फैंग की ‘बुहान डायरी’ से उजागर हुआ। इस लेखिका द्वारा डायरी के 64 ऑनलाइन पोस्ट डाले गए थे। लेखिका ने जो प्रत्यक्ष देखा, सुना उसे डायरी में अंकित किया। जब दुनिया कोरोना को ठीक से जान भी नहीं पाई थी, तभी से इस लेखिका ने चीनी डॉक्टरों के हवाले से दुनिया को बता दिया था, बीमारी संक्रामक है।

बुहान मे जहां वर्ष में करीब दो करोड़ लोगों का आवागमन होता है। दुनिया की पांच सौ बड़ी कम्पनियों मे से दो सौ तीस ने बुहान मे निवेश कर रखा है। इसी बुहान शहर से एक दिसंबर को कोरोना का पहला मरीज मिला था। लगाए जा रहे कयासों के मुताबिक कोरोना विषाणु संक्रमण बुहान शहर की ही वायरोलॉजी प्रयोगशाला से बाहर आया था। इस महामारी को चीन ने अंतर्राष्ट्रीय जगत के साथ 12 जनवरी को काफी दिन निकल जाने के बाद सांझा किया था। तब तक चीन मे अंतरराष्ट्रीय उड़ाने चलायमान थी। 23 फरवरी से चीन ने पूर्णबंदी की थी। नतीजन उससे पहले ही कोरोना विषाणु संक्रमण चीन से निकल कर दुनिया के बहुतेरे देशों में फैल चुका था।

फैंग-फैंग की ‘बुहान डायरी’ जिसमे बुहान शहर का सच लिखा गया था, जर्मन व अंग्रेजी में छप चुकी है। खबरों के मुताबिक शुरू मे चीन के लोग इस लेखिका के दिवाने हो गए थे। बाद के दिनों में यही लेखिका खलनायक बना दी गई। उसे जान से मारने की धमकी मिलने लगी। दरअसल डायरी मे चीन में घटी सच्ची घटनाऐ आलेखित थी, जिसमे बुहान की स्थिति, चीनी अधिकारियों की करतूत, अस्पतालों में कोरोना संक्रमितो की दुर्दशा, श्मशान व कब्रिस्तानों मे फैले मातम के बारे में विस्तार से लिखा गया था।

चीन द्वारा दस दिन के भीतर मध्य हुवेई प्रांत में बनाए गए अस्थाई अस्पताल में तैनात 42 हजार चिकित्सको और चिकित्सा कर्मियों को कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए तैनात करने की खबर पर भी अमेरिका सहित विश्व के देशों की जानने की ललक से इंकार नहीं किया जा सकता, कि आखिर आनन-फानन में यह सब कैसे हुआ। साथ ही चीन द्वारा भारत सहित अनेकों देशों को कोरोना विषाणु संक्रमण की जांच हेतु भेजी गई पीपीई किटो के मानक के अनुरूप नही पाए जाने पर भी वैश्विक पटल पर सवाल खड़े हुए हैं। जिस पर सोचा जा सकता है, अमेरिकी राष्ट्रपति चीन द्वारा सप्लाई की गई पीपीई जांच किटो की सच्चाई को खंगालने का प्रयत्न अपने स्तर पर यह सोच जरूर करेंगे कि कही सप्लाई की गई निम्न स्तर की जांच किटे किसी साजिश का हिस्सा तो नही थी।

कोविड-19 की भयावह स्थिति से गुजर रहा अमेरिका कभी नही चाहेगा कि उसकी अर्थव्यवस्था बिगड़े। उसे किसी अन्य देश का मुंह ताकना पड़े। महामारी से हो रहे भारी नुकसान के बावजूद अमेरिका ने अपनी अर्थव्यवस्था के डगमगाने पर अपने कई राज्यो कैलिफोर्निया, वाशिंगटन, टेक्सास तथा पेन्सिलवेनिया की आर्थिक गतिविधियों को बहाल करने के लिए चरणवद्ध तरीके से प्रतिबंधों को फिर से खोलने की दिशा में अलग-अलग रास्ते अख्तियार करने का साहस पूर्ण कदम उठा लिया है।

अब देखना रह गया है, कि आखिर कब तक अमेरिका चीन की कोविड-19 फैलाने की साजिश का पर्दाफाश प्रमाण सहित दुनिया के सामने लाने मे सफल होता है। जैसा कि अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह रहे हैं, वैश्विक इस महामारी की साजिश का जनक चीन है।

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