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80वां स्वतंत्रता दिवस: तिरंगे के साथ लौट आईं बचपन की वो मीठी यादें

अमर चंद्र

 

दिल्ली।समस्त देशवासियों तथा ‘अमर संदेश’ समाचार पत्र और amarsandesh.com के सुधी पाठकों, शुभचिंतकों एवं विज्ञापनदाताओं को 80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।

आज पूरा देश आजादी के 80वें वर्ष का गौरवपूर्ण उत्सव मना रहा है। लाल किले की प्राचीर पर लहराता तिरंगा केवल हमारी स्वतंत्रता का प्रतीक नहीं, बल्कि उन अनगिनत वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान की अमर कहानी है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

15 अगस्त 1947 को भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की। उसी ऐतिहासिक दिन से लाल किला देश के स्वतंत्रता दिवस समारोह का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री द्वारा तिरंगा फहराना और राष्ट्र को संबोधित करना आज हमारी राष्ट्रीय परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।

आज जब तिरंगे को निहारता हूं तो मन बरबस अपने बचपन की उन यादों में लौट जाता है। 15 अगस्त का इंतजार कुछ अलग ही होता था। सुबह-सुबह स्कूल जाने की खुशी, स्कूल परिसर की साफ-सफाई, हाथों में तिरंगा, देशभक्ति के गीत, भाषण और फिर राष्ट्रगान के बाद मिलने वाला वह छोटा-सा बूंदी का लड्डू जिसकी मिठास का इंतजार पूरे साल रहता था।

तब शायद हमें यह एहसास नहीं था कि हमारे हाथ में लहराता वह छोटा-सा तिरंगा कितने बड़े संघर्ष और बलिदान की निशानी है। आज जब पीछे मुड़कर उन दिनों को याद करता हूं तो लगता है कि वह लड्डू भले ही छोटा था, लेकिन उस दिन की खुशी बहुत बड़ी थी।

आजादी हमें यूं ही नहीं मिली। इसके पीछे असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष, जेलों की यातनाएं, परिवारों से बिछड़ने का दर्द और देश के लिए अपना जीवन न्योछावर करने वाले वीरों की अमर गाथाएं हैं। उनके बलिदान ने हमें वह भारत दिया, जिसमें हम आज स्वतंत्र होकर अपने सपनों को आकार दे पा रहे हैं।

आज भारत निरंतर आगे बढ़ रहा है। नई पीढ़ी नए सपनों के साथ विकसित भारत के संकल्प की ओर बढ़ रही है। ऐसे समय में हमारी जिम्मेदारी केवल आजादी का उत्सव मनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि देश की एकता, अखंडता, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने में भी होनी चाहिए।

आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम अपने वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करें। अपने बच्चों को आजादी का इतिहास बताएं, उन्हें तिरंगे का सम्मान सिखाएं और संकल्प लें कि अपने कर्म, ईमानदारी और जिम्मेदारी से भारत को और मजबूत बनाएंगे।

बचपन में हाथ में था छोटा-सा तिरंगा,

आज उसी तिरंगे में पूरा भारत दिखाई देता है।

वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को शत-शत नमन।

जय हिंद! जय भारत!

अमर संदेश परिवार

amarsandesh.com

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