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पॉलिसी, क्लेम या भुगतान में आ रही है परेशानी तो जानिए अपने अधिकार और शिकायत का आसान रास्ता
Amar sandesh नई दिल्ली। देश में बीमा पॉलिसियों की संख्या बढ़ने के साथ पॉलिसीधारकों के सामने दावा भुगतान में देरी, गलत तरीके से क्लेम खारिज करने, गलत जानकारी देकर पॉलिसी बेचने और अन्य सेवा संबंधी समस्याएं भी सामने आती हैं। ऐसे मामलों में आम लोगों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि शिकायत कहां और कैसे दर्ज कराई जाए।
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने पॉलिसीधारकों की शिकायतों के समाधान के लिए समयबद्ध व्यवस्था तय की है। इसके तहत सबसे पहले संबंधित बीमा कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी (GRO) से संपर्क करना होता है। बीमा कंपनी के प्रत्येक कार्यालय में शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त किया जाना अनिवार्य है।
बीमा कंपनी को 14 दिन में देना होगा समाधान
बीमा कंपनी को उसके डिजिटल माध्यम, पत्र, कॉल सेंटर या अन्य माध्यम से मिली शिकायत को अपनी शिकायत प्रबंधन प्रणाली में दर्ज करना होता है। शिकायत मिलने की तत्काल पुष्टि करने के साथ 14 दिन के भीतर शिकायत का समाधान उपलब्ध कराना होता है।
यदि बीमा कंपनी से तय समय में जवाब नहीं मिलता या पॉलिसीधारक कंपनी के जवाब से संतुष्ट नहीं है, तो वह आईआरडीएआई की शिकायत व्यवस्था का सहारा ले सकता है।
बीमा भरोसा पोर्टल पर दर्ज करें शिकायत
आईआरडीएआई ने पॉलिसीधारकों की शिकायतों के लिए ‘बीमा भरोसा’ पोर्टल बनाया है। इस पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने के साथ उसकी स्थिति पर भी नजर रखी जा सकती है।
बीमा भरोसा पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें
इसके अलावा पॉलिसीधारक 155255 या 1800-4254-732 टोल-फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। शिकायत ई-मेल के जरिए complaints@irdai.gov.in पर भी भेजी जा सकती है। डाक या ई-मेल से प्राप्त शिकायतों को भी बीमा भरोसा पोर्टल पर दर्ज किया जाता है।
पहले कंपनी, फिर आईआरडीएआई
पॉलिसीधारकों को ध्यान रखना चाहिए कि बीमा कंपनी के खिलाफ शिकायत होने पर पहले संबंधित कंपनी के शिकायत निवारण प्रकोष्ठ से संपर्क करना जरूरी है। यदि वहां से उचित समय में समाधान नहीं मिलता अथवा जवाब से संतुष्टि नहीं होती, तभी आईआरडीएआई की शिकायत निवारण व्यवस्था में शिकायत आगे बढ़ाई जा सकती है।
आईआरडीएआई का कॉल सेंटर बहुभाषी है और 12 भाषाओं में सहायता उपलब्ध कराता है।
आम पॉलिसीधारकों के लिए संदेश: बीमा से जुड़ी किसी समस्या में परेशान होकर चुप न बैठें। अपनी शिकायत का रिकॉर्ड रखें, बीमा कंपनी से प्राप्त शिकायत संख्या सुरक्षित रखें और जरूरत पड़ने पर बीमा भरोसा पोर्टल के माध्यम से शिकायत की स्थिति पर नजर रखें।
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