Thursday, August 20, 2026
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ओडिशा की रामलीलाओं के जीवंत रंगों से रूबरू हुई दिल्ली: IGNCA में विशेष वृत्तचित्र का प्रदर्शन

डॉक्टर के सी पांडेय, नई दिल्ली।राजधानी स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के समवेत सभागार में शनिवार को ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की गूँज सुनाई दी। संस्थान के जनपद संपदा विभाग और मीडिया केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में विशेष वृत्तचित्र फिल्म “ओडिशा की रामलीलाएँ” की स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। इस फिल्म के माध्यम से भारत के पूर्वी तट पर स्थित ओडिशा राज्य की सदियों पुरानी और जीवंत प्रदर्शन परंपरा को बेहद बारीकी से पर्दे पर उतारा गया।


कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद संपदा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर के. अनिल कुमार के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने देश की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में दृश्य-श्रव्य दस्तावेजीकरण की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, “IGNCA भारत की जीवंत परंपराओं को संजोने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह वृत्तचित्र न केवल एक अद्भुत सांस्कृतिक प्रथा का दस्तावेजीकरण करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बीच हमारी जड़ों के प्रति सम्मान और समझ को भी गहरा करता है।”

श्री शंखजीत दे द्वारा निर्देशित यह फिल्म एक नृवंशविज्ञान संबंधी यात्रा की तरह है, जो ओडिशा के विभिन्न कस्बों और गांवों में प्रचलित रामलीला के विविध रूपों को दर्शाती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे ग्रीष्म ऋतु की शुरुआती रातों में ओडिशा का वातावरण संगीतमय रंगमंच, मनमोहक धुनों और विशिष्ट कथाकला से जीवंत हो उठता है। यह वृत्तचित्र इस बात की भी पड़ताल करता है कि आधुनिक समय की चुनौतियों के बावजूद यह प्राचीन कला रूप आज भी अपनी प्रासंगिकता और आकर्षण कैसे बनाए हुए है।

फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद निर्देशक शंखजीत दे ने दर्शकों के साथ एक संवाद सत्र का नेतृत्व किया। उन्होंने फिल्म निर्माण के दौरान के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि ओडिशा में रामलीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक गहरा अनुष्ठान है जो कलाकारों और दर्शकों को सामूहिक स्मृतियों और आध्यात्मिक आकांक्षाओं से जोड़ता है। उपस्थित दर्शकों और विद्वानों ने फिल्म की सराहना करते हुए इसे भारतीय प्रदर्शन कला परंपराओं के अन्वेषण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
IGNCA द्वारा निर्मित यह परियोजना केंद्र की उस प्रतिबद्धता को दोहराती है, जिसके तहत देश की लुप्तप्राय और जीवंत लोक कलाओं को डिजिटल माध्यम से संरक्षित किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने बताया कि फिल्म और आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल पर उपलब्ध है।

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