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धन-शोधन पर कसा शिकंजा: वित्तीय खुफिया इकाई-भारत और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के बीच ऐतिहासिक समझौता

सूचना आदान-प्रदान और समन्वय को मिलेगा बल, वित्तीय अपराधों के विरुद्ध सशक्त पहल

Amar sandesh नई दिल्ली।देश में धन-शोधन और वित्तीय अपराधों के विरुद्ध लड़ाई को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वित्तीय खुफिया इकाई-भारत और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के बीच एक व्यापक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिससे दोनों संस्थाओं के बीच सूचना आदान-प्रदान और समन्वय को नई गति मिलेगी।
इस समझौते पर वित्तीय खुफिया इकाई-भारत के निदेशक अमित मोहन गोविल,और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के पूर्णकालिक सदस्य संदीप प्रधान ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता देश में वित्तीय खुफिया सहयोग के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।
समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थाएं अपने-अपने अभिलेखों में उपलब्ध प्रासंगिक सूचनाओं और खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान करेंगी। साथ ही, धन-शोधन निवारण नियमों के अंतर्गत विनियमित तथा प्रतिवेदन करने वाली संस्थाओं द्वारा वित्तीय खुफिया इकाई-भारत को सूचना प्रेषण की प्रक्रिया को और अधिक सरल तथा प्रभावी बनाया जाएगा। यह पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एगमोंट समूह के सूचना विनिमय सिद्धांतों के अनुरूप विदेशी वित्तीय खुफिया इकाइयों के साथ सहयोग को भी सुदृढ़ करेगी।
समझौते के अंतर्गत प्रशिक्षण और जन-जागरूकता कार्यक्रमों पर विशेष बल दिया जाएगा। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा विनियमित संस्थाओं के बीच धन-शोधन निवारण तथा आतंकवाद के वित्तपोषण की रोकथाम संबंधी क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने हेतु दोनों संस्थाएं प्रत्येक तीन माह में बैठकें आयोजित करेंगी।
यह सहयोग केवल सूचना आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभिन्न वित्तीय क्षेत्रों में धन-शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े जोखिमों और कमजोरियों का आकलन, संदिग्ध लेनदेन के लिए चेतावनी संकेतों की पहचान और उनका प्रसार, तथा प्रतिवेदन करने वाली संस्थाओं द्वारा नियमों के पालन की निगरानी भी इसमें शामिल होगी। यह समस्त कार्य धन-शोधन निवारण अधिनियम और संबंधित नियमों के अंतर्गत किया जाएगा।
वित्तीय खुफिया इकाई-भारत की भूमिका
वित्तीय खुफिया इकाई-भारत एक केंद्रीय राष्ट्रीय संस्था है, जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित सूचनाओं को प्राप्त करने, उनका विश्लेषण करने तथा उन्हें संबंधित एजेंसियों तक प्रेषित करने का कार्य करती है। साथ ही, यह देश में धन-शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण के विरुद्ध प्रयासों का समन्वय भी करती है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड का दायित्व
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड, वर्ष 1992 के अधिनियम के अंतर्गत स्थापित एक वैधानिक नियामक संस्था है, जो देश के प्रतिभूति बाजार का विनियमन और पर्यवेक्षण करती है तथा निवेशकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करती है। यह बाजार में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुव्यवस्थित संचालन बनाए रखने के लिए एक सुदृढ़ व्यवस्था प्रदान करती है।

वित्तीय खुफिया इकाई-भारत और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के बीच हुआ यह समझौता न केवल वित्तीय अपराधों के विरुद्ध देश की लड़ाई को और अधिक प्रभावी बनाएगा, बल्कि एक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय वित्तीय व्यवस्था के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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