अन्य राज्यहमारी संस्कृति

समकालीन भारत में दलित विमर्श पर राष्ट्रीय मंथन, ‘शब्दभूमि’ संगोष्ठी में उभरी नई दिशा

शब्दभूमि प्रकाशन’ के मंच से दलित विमर्श के बहुआयामी प्रश्नों पर गहन मंथन

कोलकात्ता । डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा एक राष्ट्रीय स्तर की आभासीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। ‘समकालीन भारत में दलित विमर्श: चुनौतियाँ, संभावनाएँ और नए प्रतिरोध’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े विद्वानों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत संचालिका शालिनी सिंह ने बाबा साहेब अंबेडकर के जीवन, संघर्ष और उनके ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए किया। वक्ताओं ने उन्हें केवल भारतीय संविधान के शिल्पकार के रूप में ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों के प्रखर प्रवक्ता के रूप में याद किया।

दलित महिला विमर्श: अदृश्य पीड़ा का प्रश्न

श्री अग्रसेन महिला महाविद्यालय, आजमगढ़ के दिलीप कुमार ने ‘दलित महिलाओं की अदृश्य पीड़ा’ विषय पर बोलते हुए कहा कि भारतीय समाज में दलित महिला ‘जाति और जेंडर’ के दोहरे नहीं, बल्कि तिहरे शोषण (जाति, वर्ग और लिंग) का सामना करती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मुख्यधारा का स्त्री विमर्श अकसर जाति को नजरअंदाज करता है, जिससे दलित महिलाओं की पीड़ा अदृश्य बनी रहती है। दिलीप कुमार ने साहित्यिक उदाहरणों उर्मिला पवार, बेबी कांबले और महाश्वेता देवी के माध्यम से इस पीड़ा को सामने रखा।

दलित आंदोलन: सड़क से सोशल मीडिया तक

नौरंगी लाल राजकीय इंटर कॉलेज, अलीगढ़ के राजीव कुमार ने दलित आंदोलन के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए बताया कि अब आंदोलन केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया ने इसे वैश्विक स्वरूप दे दिया है। श्री कुमार ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने आवाज को तेज और व्यापक बनाया है और युवाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन फेक न्यूज़, ट्रोलिंग और सतही सक्रियता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं।

अंबेडकर और रामलिंग स्वामी: एक तुलनात्मक दृष्टि

गांधीग्राम ग्रामीण संस्थान, तमिलनाडु की डॉ. बी. मल्लिका ने डॉ. अंबेडकर और संत रामलिंग स्वामी के विचारों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। डॉ. मल्लिका ने आगे बताया कि अंबेडकर ने कानूनी और राजनीतिक माध्यम से सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी। वहीं रामलिंग स्वामी ने आध्यात्मिक और मानवीय करुणा के माध्यम से समानता का संदेश दिया। यह प्रस्तुति उत्तर और दक्षिण भारत के सामाजिक आंदोलनों के बीच सेतु का कार्य करती दिखाई दी।

दरभंगा, बिहार के आशीष अंबर ने संवैधानिक प्रावधानों की जमीनी वास्तविकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून में अधिकार होने के बावजूद उनका प्रभावी क्रियान्वयन अभी भी एक बड़ी चुनौती है। आगे कहा कि “समानता का अधिकार तभी सार्थक होगा जब न्याय तक पहुंच वास्तविक और सुलभ होगी।”

आज का दलित भारत: चुनौतियाँ और संभावनाएँ

गुरुग्राम की डॉ. शिखा ने शिक्षा, रोजगार और सामाजिक समानता के संदर्भ में वर्तमान दलित समाज की स्थिति का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और सरकारी अवसरों में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन सामाजिक भेदभाव और आर्थिक असमानता अब भी कायम है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

साहित्य में दलित विमर्श: हिंदी और बांग्ला दृष्टि

पश्चिम बंगाल के संजय शाह ने हिंदी और बांग्ला साहित्य में दलित विमर्श की उपस्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने प्रेमचंद, महाश्वेता देवी जैसे लेखकों के उदाहरण देते हुए बताया कि हिंदी साहित्य संवेदनात्मक यथार्थ प्रस्तुत करता है, जबकि बांग्ला साहित्य संघर्ष और प्रतिरोध की चेतना को मुखर करता है। अन्य वक्ताओं राहुल भिवा हातागले (महाराष्ट्र), अमन कुमार (झारखण्ड), नाहिदा गुलामदस्तगीर शेख (मुंबई), सेठी आशा दीनबंधु (गुजरात), सुलताना मुशताक अहमद खान (अहमदनगर), दुर्गावती कुमारी (पटना) इत्यादि ने अपना सुचिंतित वक्तव्य रखा।

दलित विमर्श अब केवल सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक, सांस्कृतिक और डिजिटल विमर्श भी बन चुका है।दलित महिलाओं की स्थिति सबसे जटिल और उपेक्षित बनी हुई है। संवैधानिक अधिकारों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। साहित्य और डिजिटल मीडिया दोनों परिवर्तन के सशक्त माध्यम हैं।

कार्यक्रम का संयोजन विनोद यादव ने किया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए गायत्री उपाध्याय ने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच सामाजिक चेतना को मजबूत करने और संवाद को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Share This Post:-
Post Views: 42 Views

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *