Post Views: 0
डॉ. के सी पांडेय
अमर संदेश समाचार पत्र वरिष्ठ सलाहकार
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में जुटे देश-विदेश के दिग्गज; पारंपरिक सेप्टिक टैंक का बनेगा प्रभावी विकल्प
नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026। देश में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट जल प्रबंधन को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से आज रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (DRDE), ग्वालियर तथा डाइकी एक्सिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में इंडिया हैबिटेट सेंटर (IHC) में एक राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया।
यह कार्यशाला DRDO द्वारा विकसित ‘हाई-परफॉर्मेंस बायोडाइजेस्टर (HPBD–VIKASA™️)’ तकनीक के व्यापक प्रसार, उपयोगिताओं और इसके व्यावहारिक अनुभवों पर गहन विचार-विमर्श करने के लिए आयोजित की गई थी।
क्या है HPBD–VIKASA™️ और क्यों है खास?
इस तकनीक के आविष्कारक और DRDE ग्वालियर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए.के. गोयल ने विस्तृत प्रस्तुति (PPT) के माध्यम से बताया कि यह तकनीक मानव मल और ब्लैकवॉटर (टॉयलेट अपशिष्ट) के ऑन-साइट (स्थान पर ही) प्रभावी उपचार के लिए तैयार की गई है।
यह तकनीक ब्लैकवॉटर में मौजूद उच्च बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (COD) को काफी हद तक घटा देती है, जिससे उपचारित जल को पुनर्चक्रित (Recycle) कर पुनः उपयोग में लाया जा सकता है। यह प्रणाली केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के कड़े पर्यावरणीय मानकों पर पूरी तरह खरी उतरती है।
हरियाणा के पलवल में होगा निर्माण; 50 शुरुआती इकाइयाँ होंगी स्थापित
कार्यशाला में शामिल हुए डाइकी एक्सिस जापान के प्रेसिडेंट एवं CEO श्री हिरोकी ओगामे ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया:
“HPBD–VIKASA™️ तकनीक का निर्माण डाइकी एक्सिस इंडिया के पलवल (हरियाणा) स्थित अत्याधुनिक संयंत्र में किया जाएगा। शुरुआती चरण में 50 HPBD इकाइयाँ भारतीय सेना, रक्षा प्रतिष्ठानों, रेलवे, सार्वजनिक शौचालयों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थापित की जाएंगी। इन सभी शुरुआती परियोजनाओं का स्वतंत्र थर्ड-पार्टी मूल्यांकन भी कराया जाएगा।”
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह तकनीक भविष्य में पारंपरिक सेप्टिक टैंक प्रणाली का स्थान लेगी और भारत में स्वच्छता अभियान के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगी।
कहाँ-कहाँ होगी इस तकनीक की उपयोगिता?
HPBD–VIKASA™️ एक विकेंद्रीकृत (Decentralized) तकनीक है, जो विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए वरदान है जहाँ सीवरेज नेटवर्क उपलब्ध नहीं है या जिसका निर्माण आर्थिक रूप से संभव नहीं है। इसके प्रमुख अनुप्रयोगों में शामिल हैं:
सैन्य बल व सीमावर्ती क्षेत्र: रक्षा प्रतिष्ठान, सीमा चौकियाँ और BRO के निर्माण स्थल।
शहरी व ग्रामीण आवास: सीवरेज लाइन से वंचित गाँव, आवासीय कॉलोनियाँ और अपार्टमेंट complex।
संस्थान व सार्वजनिक स्थल: स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, अस्पताल, सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक शौचालय।
पर्यटन व आपातकालीन क्षेत्र: धार्मिक/पर्यटन स्थल, आपदा राहत शिविर और श्रमिक बस्तियाँ।
समाज और पर्यावरण को मिलेंगे बड़े फायदे
यह तकनीक न केवल भूजल और मिट्टी को दूषित होने से बचाती है, बल्कि जलजनित बीमारियों के फैलाव को भी रोकती है। इसके अलावा, यह पहल भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन और संयुक्त राष्ट्र (UN) के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूरा करने में सीधी भूमिका निभाती है:
SDG-3: उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण
SDG-6: स्वच्छ जल और स्वच्छता
SDG-11: सतत शहर और समुदाय
SDG-13: जलवायु कार्रवाई
दिग्गज हस्तियों और विशेषज्ञों की रही उपस्थिति
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश-विदेश के कई शीर्ष अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया:
डाइकी एक्सिस समूह: श्री हिरोकी ओगामे (CEO, डाइकी एक्सिस जापान), श्री रियो वाज़ा (MD, डाइकी एक्सिस इंडिया), श्री कमल तिवारी (Director & CEO), श्री के.सी. पांडे, श्री चिराग सुथार (R&D प्रमुख), श्री वी.पी. तिवारी और सुश्री नेहा।
DRDO–DRDE: डॉ. ए.के. गोयल और डॉ. विजय पाल।
अन्य प्रमुख प्रतिनिधि: डॉ. एन.बी. मजूमदार व श्री अजय कुमार (सुलभ इंटरनेशनल), सुश्री साक्षी गुडवानी व श्री विवेक पांडे (गेट्स फाउंडेशन), कर्नल संदीप सक्सेना (MES मुख्यालय), श्री मनोज राय (डायरेक्टर, आर्मी कमांड लखनऊ), श्री प्रशांत मीणा (BRO) और डॉ. रोहित कक्कड़ (CPHEEO, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय)।
कार्यशाला का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा इस बात की प्रतिबद्धता के साथ हुआ कि भारत को स्वच्छ और सतत बनाने के लिए HPBD–VIKASA™️ जैसी अत्याधुनिक भारतीय तकनीकों को पूरे देश में व्यापक रूप से लागू किया जाएगा।
Related