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Amar sandesh नई दिल्ली। लोकसभा में ‘द पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद एवं एआईसीसी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के करोड़ों युवाओं का शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से विश्वास उठ चुका है तथा सरकार जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है।
प्रियंका गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती उस छात्रा का उल्लेख करते हुए की, जो छात्र आंदोलन के दौरान घायल हुई थी। उन्होंने छात्रा की मां की पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि परिवार नेताओं की औपचारिक संवेदनाओं से अधिक न्याय चाहता है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस, वॉटर कैनन और अन्य बल प्रयोग की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना छात्रों का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में बड़ी संख्या में परीक्षा पत्र लीक हुए, जिससे करोड़ों विद्यार्थी प्रभावित हुए, लेकिन दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना था कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
कांग्रेस सांसद ने शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और बढ़ते आर्थिक दबाव का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए भारी आर्थिक बोझ उठाते हैं, लेकिन युवाओं को रोजगार और निष्पक्ष अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने शिक्षा बजट बढ़ाने, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करने और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देने की मांग की।
भाषण के दौरान प्रियंका गांधी ने सरकार से शिक्षा विशेषज्ञों, छात्रों, शिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर नई सोच के साथ शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश का युवा न्याय और पारदर्शिता चाहता है तथा उसके विश्वास को पुनः स्थापित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि छात्रों के सवालों को बल प्रयोग से दबाया नहीं जा सकता और लोकतंत्र में जवाबदेही सर्वोच्च होनी चाहिए। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के सपनों और भविष्य की रक्षा करना सभी जनप्रतिनिधियों की साझा जिम्मेदारी है।
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