प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में अमर संदेश के सेमिनार में दिखी राष्ट्रहित की चिंता, भगत सिंह कोश्यारी और सुषमा रावत ने दिया ऊर्जा बचत का मंत्र
राष्ट्र के ज्वलंत मुद्दे पर अमर संदेश समाचार पत्र द्वारा आयोजित सेमिनार में शिरकत की पद्मभूषण भगत सिंह कोश्यारी व ओएनजीसी अन्वेषण प्रमुख रही सुषमा रावत ने
सी एम पपनै
नई दिल्ली। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया मुख्य सभागार में 24 मई को दिल्ली से प्रकाशित सुप्रसिद्ध अमर संदेश समाचार पत्र द्वारा महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा पद्मभूषण प्राप्त माननीय भगत सिंह कोश्यारी की प्रभावी उपस्थिति तथा मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता ओएनजीसी सेवानिवृत निर्देशक (अन्वेषण) सुषमा रावत की उपस्थिति में “राष्ट्र में ऊर्जा एवं सार्वजनिक पेट्रोलियम क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका” विषय पर प्रभावशाली व ज्ञानवर्धक सेमिनार एवं ऊर्जा सुरक्षा सम्मान-2026 का आयोजन बड़ी संख्या में उपस्थित जानेमाने पत्रकारों, लेखकों, संस्कृति कर्मियों व अनेकों सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रबुद्ध जनों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया।
राष्ट्र ऊर्जा सार्वजनिक पेट्रोलियम कंपनियों कि भूमिका विषय पर आयोजित सेमिनार का श्रीगणेश मंचासीन मुख्य व विशिष्ठ अतिथियों सुषमा रावत सेवानिवृत निर्देशक ओएनजीसी, दुर्गा सिंह भंडारी सेवानिवृत जीएम (एचआर) ओएनजीसी व संचालक मौल्यार रिसोर्स फाउंडेशन, डॉ. के सी पांडे अध्यक्ष भारतीय जादूगर संघ, प्रोफेसर रवि शर्मा श्रीराम कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय, सी एम पपनै वरिष्ठ पत्रकार व अध्यक्ष सुविख्यात सांस्कृतिक संस्था पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली, अमर चंद्र व निम्मी ठाकुर मुख्य संपादक क्रमशः अमर संदेश मीडिया ग्रुप व पॉलिटिकल ट्रस्ट इत्यादि इत्यादि द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर तथा आयोजक अमर संदेश समाचार पत्र प्रमुख अमर चंद्र द्वारा सभी मंचासीन मुख्य व विशिष्ठ अतिथियों व सभागार में उपस्थित सभी पत्रकारों व अन्य प्रबुद्ध जनों का स्वागत अभिनंदन कर, सभी मंचासीन मुख्य व विशिष्ठ अतिथियों का दुपट्टा ओढ़ा कर, स्मृति चिन्ह व ऊर्जा परिचायक पौंधा प्रदान कर स्वागत अभिनंदन किया गया।
वर्तमान ज्वलंत मुद्दे पर आयोजित सेमिनार “राष्ट्र में ऊर्जा एवं सार्वजनिक पेट्रोलियम क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका” विषय पर सभी मंचासीनों के साथ-साथ अन्य प्रमुख वक्ताओं वरिष्ठ पत्रकार क्रमशः सुनील नेगी, सुजीत ठाकुर, उत्तराखंड की अनेकों सामाजिक संस्थाओं से जुड़े चार्टड अकाउंटेंट राजेश्वर पैन्यूली इत्यादि इत्यादि द्वारा बेबाक होकर संबंधित सेमिनार विषय पर ज्ञानवर्धक विचार व्यक्त किए गए।
वक्ताओं द्वारा संबंधित विषय पर बोलते हुए कहा गया, वर्ष 1947 से पूर्व कोई उद्यम नहीं था। देश को मिली आजादी के बाद देश के नेतृत्व ने समझदारी व विवेक से कार्य कर नीति नियोजन किया। वर्ष 1956, 1965, के बाद देश में परिवर्तन हुआ। वर्ष 1970 में घरेलू उपयोग हेतु एलपीजी आई। वर्ष 1984 में ऑयल के साथ गैस की ओर भी बढ़े। देश के सम्मुख चुनौती रही, 75 फीसद ऑयल तथा 50 फीसद गैस बाहरी देशों से आयात की जाती थी। वक्ताओं द्वारा कहा गया राष्ट्र हित में देश में स्थापित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बड़ा और प्रभावी कार्य करते हैं। 
वक्ताओं द्वारा कहा गया, आयोजित सेमिनार सामरिक विषय से जुड़ा है। जो स्थिति वर्तमान में बनी है हमें भविष्य के लिए सावधान करने के साथ-साथ जागृत भी करता है। हमें भविष्य पर दृष्टि डालनी चाहिए। हमारे भंडार सीमित हैं। 
वक्ताओं द्वारा अवगत कराया गया, सूर्य से जुड़ा अक्षय ऊर्जा का श्रोत बड़ा है। उक्त ऊर्जा को संचित करना सीख जाए तो बड़ी उम्मीद जग सकती है। कहा गया, भारत ने सौर ऊर्जा में छलांग लगाई है। चालीस गुना हम आगे बढ़े हैं। इस श्रोत में और अधिक काम करने की जरूरत है। वक्ताओं द्वारा कहा गया, एक बूंद पेट्रोल और एक यूनिट बिजली बचाने के लिए हमे सोचना होगा, प्रयास करना होगा। 
वक्ताओं द्वारा कहा गया, ऋगवेद में पहली रचना ही ऊर्जा से है, जिसमें अग्नि का आह्वान किया गया है। सूर्य का प्रातः आह्वान किया जाता है, जिससे पौंधो का विकास होता है जो हमारे खान-पान का माध्यम बनता है। कहा गया, बिना ऊर्जा के जीवन संभव नही है। ऊर्जा उत्पादन और वितरण से जुड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हमारी रीढ़ की हड्डी के समान हैं। छोटा सा प्रयास हमारी ऊर्जा को बचा सकता है। 
वक्ताओं द्वारा बेबाक होकर कहा गया, ऊर्जा संकट है नहीं, बनाया गया है या करवाया जा रहा है। ऊर्जा से जुड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का देश के विकास में बड़ा हाथ रहा है। ईंधन के रूप में चीड़ के पेड़ों से स्वाभाविक रूप में बड़ी तादात में गिरे पिरूल का बड़े स्तर पर ईंधन के रूप में प्रयोग कर ऊर्जा की प्राप्ति की जा सकती है। उत्तराखंड के जंगलों में लग रही आग पर नियंत्रण व हिमालयी पर्यावरण व जलवायु विविधता की रक्षा की जा सकती है। 
महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व पद्म भूषण माननीय भगत सिंह कोश्यारी द्वारा कहा गया, अमर संदेश समाचार पत्र प्रमुख अमर चंद्र के कार्यक्रम छोटे होते हैं, छोटा ही बड़ा होता है। कहा गया, सेमिनार का विषय रोचक और महत्वपूर्ण है। उदाहरण पेश करते हुए भगत सिंह कोश्यारी द्वारा कहा गया, मोदी जी ने हर घर शौचालय की बात कही थी। अगर 75 फीसद कार्य हो चुका है तो अच्छी बात है। सौर ऊर्जा पर बहुत काम हुआ है। उक्त क्षेत्र में भारत विश्व का नेतृत्व कर रहा है। कहा गया, गडकरी जी ने एक व्यक्ति को रिक्शा खींचते हुए देखा, उन्होंने उस पर मनन कर ई-रिक्शा की कल्पना की उस सोच को धरातल पर उतारा आज बड़ी संख्या में जगह-जगह ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं।
पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र भगत सिंह कोश्यारी द्वारा कहा गया, जब वे महाराष्ट्र के राज्यपाल थे, प्रातः सैर पर निकलते थे। सूर्य का प्रकाश छा जाने पर जल रही स्टेट लाईट पर उन्होंने संबंधित विभाग को निर्देश दिया, बेकार में जल रही स्टेट लाईटें बंद होने से बिजली की बचत हुई। इसी तरह पानी बिना वजह बहता रहे यह भी ठीक नहीं है। देख परख कर ही निर्णय लिए जाते हैं। जन का जागरूक होना जरूरी है।
श्री कोश्यारी द्वारा कहा गया, जीवन में ईमानदारी से चलना चाहिए। आयोजित गोष्ठी के माध्यम से जो विचार निकले आशा करता हूं उत्तराखंड के लिए वे लाभदायक होंगे। इस अवसर पर श्री कोश्यारी जी द्वारा कहा गया, वे स्वयं सांसद होने के नाते संसदीय एनर्जी बोर्ड के सदस्य रहे, उस नाते उन्होंने कहा था, उत्तराखंड स्थित बदरीनाथ धाम की बेहद ठंड वाली पहाड़ी में से एक जगह पर खौलता हुआ पानी निकलता है जो अचंभित करता है। इसी तरह तेल और गैस का भी है, खोज जरूरी है। कहा गया, हो रहे उत्पादन क्षेत्रों में कैसे आगे बढ़े देखना होगा। गोष्ठी में जो भी अच्छे विचार निकलेंगे उत्तराखंड के लिए लाभदायक होंगे। उक्त प्रभावशाली विचारों के साथ ही कोश्यारी जी ने अपना संबोधन समाप्त किया।

मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता ओएनजीसी सेवानिवृत निर्देशक सुषमा रावत द्वारा संगोष्ठी विषय पर बोलते हुए कहा गया, उत्तराखंड अंचल से उनका बड़ा जुड़ाव रहा है। आयोजित सेमिनार में पूर्व वक्ताओं की बातों में कुछ तथ्य रहे कुछ भ्रम रहा। उन्होंने कहा, बिजली उत्पादन में 74 फीसद एनर्जी में कोयले की प्रमुख भूमिका रही है। सोलर कूकर से सौर ऊर्जा संकलन और संवर्धन शुरू हुआ था। असम के डिगबोई में हाथियों द्वारा किए जा रहे लदान कार्य के दौरान उनके पैरों में सने पदार्थ से पता चला उक्त स्थान पर तेल है जो प्रचुर मात्रा में शताब्दी से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बाद भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है। 
मुख्य वक्ता के नाते सुषमा रावत द्वारा अवगत कराया गया, भारत में दो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा ऑयल वितरण कार्य किया गया ओएनजीसी और वर्मा ऑयल। अवगत कराया गया, वर्तमान में ऊर्जा के क्षेत्र में कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम कार्य कर रहे हैं। कच्चा तेल रिफाइंड कर हमारा देश उसे निर्यात भी करता है, उक्त ऑयल का कुछ भाग फर्टिलाइजर में भी लगता है। अवगत कराया गया, ओएनजीसी के माध्यम से बाहरी पंद्रह देशों में कुछ ब्लॉक हैं जहां हमने तेल खोजा है। अवगत कराया गया, एक जमाने में ओएनजीसी में विभिन्न तकनीक वर्ग के करीब 46 हजार कर्मचारी कार्यरत थे। ओएनजीसी ग्रुप ऑफ कम्पनीज है जिसमें चौदह कंपनियां हैं। ये सब इंटीग्रेटेड एनर्जी कम्पनिया हैं। ओएनजीसी ग्रीन में सोलर है। कई देशों व देश के राज्यों में कार्य हेतु कंपनी ने हाथ बढ़ाया है।



