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एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस से टूट चुका था आत्मविश्वास, मैक्स अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. दीपक कुमार अरोड़ा के उपचार से सामान्य जीवन की ओर लौटा
अमर चंद्र
नई दिल्ली। कहते हैं कि डॉक्टर केवल शरीर का इलाज करते हैं, लेकिन कुछ मरीज ऐसे भी होते हैं जिनके उपचार की शुरुआत ऑपरेशन से नहीं, बल्कि उम्मीद जगाने से होती है। 23 वर्षीय आकाश पुंडीर की कहानी भी ऐसी ही है, जिसने गंभीर बीमारी, असहनीय दर्द और मानसिक अवसाद के बीच जीने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। लेकिन आधुनिक चिकित्सा, सफल सर्जरी और एक चिकित्सक के भरोसे ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। आज वही युवक छह सप्ताह के भीतर फिर अपने पैरों पर खड़ा होकर सामान्य जीवन की ओर लौट चुका है। 
दिल्ली निवासी आकाश इतिहास विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे थे। कुछ वर्ष पहले तक उनका जीवन सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे पैरों में दर्द शुरू हुआ। समय के साथ रीढ़ की हड्डी और जोड़ों में जकड़न इतनी बढ़ गई कि उनका शरीर एक ओर झुकने लगा। चलना, बैठना, उठना, करवट बदलना और यहां तक कि रात में सोना भी कठिन हो गया। दर्द इतना असहनीय था कि उन्हें कई तकियों का सहारा लेकर सोना पड़ता था। बीमारी बढ़ने के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास भी टूटता चला गया।
परिजनों के अनुसार, आकाश ने घर से बाहर निकलना लगभग बंद कर दिया था। वे लोगों से मिलना-जुलना नहीं चाहते थे। मोहल्ले के कुछ लोग उनके चलने के तरीके का मजाक उड़ाते थे, जिससे उनका मन और अधिक टूट गया। धीरे-धीरे उन्होंने रिश्तेदारों और दोस्तों से दूरी बना ली। कई बार उन्होंने अपनी मां से कहा कि उन्हें किसी आश्रम में छोड़ दिया जाए क्योंकि अब वे परिवार पर बोझ बन चुके हैं और कभी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाएंगे।
परिवार ने उन्हें स्वस्थ करने के लिए कई अस्पतालों और विशेषज्ञों से उपचार कराया, लेकिन कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। अंततः एक परिचित की सलाह पर उन्हें मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. दीपक कुमार अरोड़ा के पास ले जाया गया।
जांच में पता चला कि आकाश एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस के गंभीर चरण में हैं। बीमारी उनकी रीढ़ और कई जोड़ों को बुरी तरह प्रभावित कर चुकी थी। इसके बाद डॉ. अरोड़ा ने आधुनिक तकनीक से सर्जरी की योजना बनाई और सबसे पहले मरीज के मन में विश्वास पैदा करने का प्रयास किया।
“सबसे पहले मरीज के मन में उम्मीद लौटानी जरूरी थी” : डॉ. दीपक कुमार अरोड़ा
डॉ. दीपक कुमार अरोड़ा कहते हैं, “जब आकाश पहली बार मेरे पास आए, तब उनकी शारीरिक स्थिति जितनी गंभीर थी, उससे कहीं अधिक उनकी मानसिक स्थिति चिंताजनक थी। एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस के कारण उनकी रीढ़ और कई जोड़ बुरी तरह प्रभावित हो चुके थे। वे बिना सहारे बिस्तर से उठ भी नहीं सकते थे और दैनिक जीवन की लगभग हर गतिविधि के लिए परिवार पर निर्भर थे। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती उनकी मानसिक स्थिति थी। उन्होंने जीने की इच्छा लगभग छोड़ दी थी। ऐसे मरीजों का इलाज केवल ऑपरेशन से शुरू नहीं होता, बल्कि पहले उनके मन में यह विश्वास जगाना होता है कि उनकी जिंदगी यहीं खत्म नहीं हुई है। मैंने उनसे सिर्फ इतना कहा ‘पहले अस्पताल में भर्ती हो जाइए, बाकी चिंता मेरी है।’ हमारा उद्देश्य केवल सफल सर्जरी करना नहीं था, बल्कि उन्हें फिर से आत्मविश्वास और सामान्य जीवन लौटाना भी था। आज उन्हें अपने पैरों पर चलते देखकर एक चिकित्सक के रूप में सबसे बड़ी संतुष्टि मिलती है।”
डॉ. अरोड़ा के मार्गदर्शन में आधुनिक तकनीक से सर्जरी की गई। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और रिकवरी उम्मीद से कहीं बेहतर रही। कुछ ही दिनों में आकाश ने सहारे से चलना शुरू कर दिया और मात्र छह सप्ताह में वे सामान्य गतिविधियों की ओर लौटने लगे।
“डॉक्टर ने सिर्फ इलाज नहीं किया, मुझे जीने की उम्मीद लौटा दी” : आकाश पुंडीर
आकाश पुंडीर कहते हैं, “एक समय ऐसा था जब मुझे लगता था कि अब मैं कभी सामान्य जीवन नहीं जी पाऊँगा। दर्द इतना अधिक था कि उठना-बैठना, चलना और सोना तक मुश्किल हो गया था। लोगों की बातें सुनकर मैंने खुद को घर में बंद कर लिया था। भविष्य पूरी तरह अंधकारमय दिखाई देता था। लेकिन जब डॉ. दीपक अरोड़ा से मिला तो पहली बार लगा कि शायद मैं ठीक हो सकता हूँ। उन्होंने केवल मेरा इलाज नहीं किया, बल्कि मेरे भीतर जीने की उम्मीद और आत्मविश्वास वापस लौटा दिया। आज मैं बिना सहारे चल रहा हूँ, अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ और सामान्य जीवन जी रहा हूँ। जब अपनी पुरानी तस्वीरें और वीडियो देखता हूँ तो विश्वास ही नहीं होता कि कभी मेरी हालत इतनी गंभीर थी। अब मुझे भविष्य से डर नहीं लगता, बल्कि नए सपने दिखाई देते हैं।
“आज लगता है जैसे हमें हमारा बेटा वापस मिल गया” : आकाश की माता
आकाश की माता भावुक होकर कहती हैं, “हमने अपने बेटे के इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन हर जगह निराशा ही हाथ लगी। बीमारी ने उसके शरीर के साथ-साथ उसका मन भी तोड़ दिया था। उसने लोगों से मिलना-जुलना छोड़ दिया था और कई बार कहता था कि उसे किसी आश्रम में छोड़ दें, क्योंकि वह खुद को परिवार पर बोझ समझने लगा था। जब हम डॉ. दीपक कुमार अरोड़ा के पास पहुंचे तो पहली बार किसी डॉक्टर ने हमें भरोसा दिलाया कि हमारा बेटा फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। उनके शब्दों ने ही हमारे परिवार में उम्मीद जगा दी। आज जब मैं अपने बेटे को बिना सहारे चलते, मुस्कुराते और सामान्य जीवन जीते देखती हूं तो ऐसा लगता है कि हमें हमारा बेटा दोबारा मिल गया है। हमारे लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।
डॉ. दीपक कुमार अरोड़ा के अनुसार एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस एक गंभीर सूजन संबंधी बीमारी है, जो समय पर पहचान और विशेषज्ञ उपचार न मिलने पर मरीज की जीवनशैली को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि यदि बीमारी का समय रहते निदान हो जाए और सही विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में उपचार किया जाए, तो आधुनिक सर्जरी और समुचित पुनर्वास के माध्यम से मरीज सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है।
आज आकाश पुंडीर बिना सहारे चलते हैं, अपनी पढ़ाई कर रहे हैं और अपने भविष्य को लेकर आशावान हैं। उनकी कहानी केवल एक सफल सर्जरी की नहीं, बल्कि उस विश्वास की भी कहानी है, जो एक संवेदनशील चिकित्सक अपने मरीज के मन में जगाता है। यह उदाहरण बताता है कि आधुनिक चिकित्सा, सही समय पर उपचार, परिवार का साथ और डॉक्टर का भरोसा मिल जाए तो सबसे कठिन बीमारी के बाद भी जीवन को नई दिशा दी जा सकती है।
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