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Amar sandesh नई दिल्ली। कोयला मंत्रालय ने ‘आत्मनिर्भर भारत: ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला’ विषय पर हितधारकों के परामर्श सत्र का आयोजन करते हुए वाणिज्यिक कोयला खदानों की 15वें दौर की नीलामी का शुभारंभ किया। इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया।
पूरे दिन चले इस परामर्श सत्र में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और हितधारकों ने भाग लिया। इसमें सुधारों, तकनीकी प्रगति, कोयला गैसीकरण, स्थिरता और समावेशी विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई, जो भारत के कोयला क्षेत्र के भविष्य को आकार दे रहे हैं।
कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिरिक्त सचिव एवं नामित प्राधिकरण रुपिंदर बरार, कोयला नियंत्रक सजीश कुमार एन, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
सचिन विक्रम देव दत्त ने वाणिज्यिक कोयला खदानों की 15वीं नीलामी का शुभारंभ करते हुए बताया कि इस चरण में कुल 11 कोयला ब्लॉक पेश किए जा रहे हैं, जिनमें 7 पूर्ण रूप से अन्वेषित और 4 आंशिक रूप से अन्वेषित खदानें शामिल हैं। इनमें 3 खदानें कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत और 8 खदानें खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत पेश की जा रही हैं। इस चरण में 1 कोकिंग कोयला ब्लॉक और 10 गैर-कोकिंग कोयला ब्लॉक शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, 13वें चरण के दूसरे प्रयास के तहत 6 कोयला खदानें भी नीलामी के लिए प्रस्तुत की जा रही हैं। ये खदानें झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे कोयला/लिग्नाइट समृद्ध राज्यों में स्थित हैं, जिनसे निवेश आकर्षित होने, घरेलू कोयला उपलब्धता बढ़ने और रोजगार सृजन की उम्मीद है।
अब तक कोयला मंत्रालय 13 चरणों की नीलामी के माध्यम से 135 कोयला खदानों की सफल नीलामी कर चुका है, जिनकी कुल पीक रेटेड क्षमता लगभग 325 मिलियन टन प्रति वर्ष है।
अपने संबोधन में विक्रम देव दत्त ने कहा कि कोयला क्षेत्र में किए गए संरचनात्मक सुधार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जिनमें पारदर्शिता, दक्षता और क्षेत्र की पूर्ण क्षमता को उभारने पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में वाणिज्यिक कोयला खनन व्यवस्था की शुरुआत एक परिवर्तनकारी कदम साबित हुई, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ी, निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित हुई और घरेलू उद्योगों के लिए कोयले की उपलब्धता में सुधार हुआ।
उन्होंने कहा कि नीलामी के प्रत्येक चरण में भागीदारी बढ़ रही है, जो हितधारकों के बीच बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण पर जोर देते हुए उन्होंने मंत्रालयों, राज्य सरकारों और उद्योग के बीच समन्वित प्रयासों को आवश्यक बताया, ताकि प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम कर अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा सके।
कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने मंत्रालय की प्राथमिकताओं में स्थिरता, सामुदायिक कल्याण और तकनीकी उन्नति को रेखांकित करते हुए वैज्ञानिक खदान बंदी और खनन के बाद भूमि के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खनन के बाद की भूमि को जीवंत आवासों में परिवर्तित कर पर्यावरणीय पुनर्स्थापन और सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही, सीएसआर पहलों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई, ताकि स्थानीय समुदाय विकास से लाभान्वित हो सकें।
तकनीकी क्षेत्र में उन्होंने कोयला गैसीकरण को स्वच्छ और अधिक कुशल विकल्प बताते हुए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ जैसे नीतिगत समर्थन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भूमिगत कोयला गैसीकरण ब्लॉक पहले के नीलामी चरणों में पहले ही पेश किए जा चुके हैं और बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाना आवश्यक है।
कोयला मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव सुश्री रुपिंदर बरार ने अपने उद्घाटन भाषण में विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि स्थिरता को उत्पादन के पैमाने के साथ मिलकर चलना चाहिए। उन्होंने पारदर्शिता, नीतिगत स्थिरता और कारोबार में सुगमता को निवेश आकर्षित करने और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के प्रमुख कारक बताया।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक होने के बावजूद इस क्षेत्र में और संभावनाएं मौजूद हैं, जिससे रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है।
नवाचार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने सतही और भूमिगत कोयला गैसीकरण मार्गों का उल्लेख किया और बताया कि ‘अंडरग्राउंड कोल गैसीकरण’ के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं, जबकि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ का ढांचा भी प्रदान किया है।
उन्होंने वैज्ञानिक खदान बंदी और खनन के बाद भूमि के जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे खनन क्षेत्रों को समुदायों के लिए संपत्ति में बदला जा सकता है और पारिस्थितिक बहाली के साथ दीर्घकालिक सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी बल दिया।
परामर्श सत्र के विभिन्न चरणों में तकनीक, नवाचार, कोयला गैसीकरण, पुनर्वास, भूमि पुनः उपयोग, श्रमिक कल्याण, सीएसआर और हरित खनन प्रथाओं पर गहन चर्चा हुई। इन सत्रों ने एक आधुनिक, जिम्मेदार, भविष्य के लिए तैयार और आत्मनिर्भर कोयला क्षेत्र के लिए समग्र रोडमैप प्रस्तुत किया।
कोयला मंत्रालय ने कहा कि 15वीं वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी निवेश के नए अवसर खोलने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तैयार है।
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