राष्ट्रीय

त्रिशक्ति नारी नाविक अभियान ‘समुद्र प्रदक्षिणा’: नारी शक्ति की लहरों पर सवार प्रेरणा

7 अप्रैल 2025 को एक ऐतिहासिक क्षण तब दर्ज हुआ, जब भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला अधिकारियों का एक अद्वितीय 12 सदस्यीय दल समुद्र की लहरों को चुनौती देने के लिए ‘त्रिशक्ति नारी नाविक अभियान – समुद्र प्रदक्षिणा’ पर निकला। यह अभियान न केवल साहसिक नौकायन यात्रा है, बल्कि यह भारत की नारी शक्ति की अजेय भावना और सशस्त्र बलों में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम भी है।

🚩 मुंबई से सेशेल्स तक – 4,000 समुद्री मील की प्रेरणादायक यात्रा

इस अभियान को कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग (CME) के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. रमेश ने मुंबई के नेवल सेलिंग सेंटर, कोलाबा से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अभियान का ध्येय 55 दिनों में लगभग 4,000 समुद्री मील की दूरी तय करते हुए मुंबई से सेशेल्स और फिर वापस मुंबई लौटना है।

यह बहुप्रतीक्षित जलयात्रा अभियान IASV त्रिवेणी नौका पर सवार होकर किया जा रहा है — यह नौका, भारतीय सशस्त्र बलों की तकनीकी उत्कृष्टता और समुद्री दक्षता की प्रतिक है।


👩‍✈️ तीनों सेनाओं की महिला योद्धाओं का साहसी दल

इस दल में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना की 12 चयनित महिला अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें 2 वर्षों तक कठोर समुद्री प्रशिक्षण प्रदान किया गया। मौसम की मार हो या लहरों की चुनौती, इन वीरांगनाओं ने हर परीक्षण को पार कर यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय नारी अब सीमाओं की परिभाषाओं से कहीं आगे निकल चुकी है।

इन अफसरों ने इससे पूर्व कई प्रशिक्षण यात्राओं में भाग लेकर समुद्री दिशा ज्ञान, नौकायन तकनीकों, यांत्रिक क्षमताओं और सहनशक्ति की पराकाष्ठा का परिचय दिया है।


🌊 ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ : नारी शक्ति का उत्सव, विरासत का सम्मान

यह अभियान केवल एक जलयात्रा नहीं है — यह भारतीय नारी की समुद्र जैसी गहराई और अडिग इच्छाशक्ति का उत्सव है। यह वीरांगनाएं उस परंपरा की उत्तराधिकारी हैं, जिसे रानी वेलु नचियार, रानी दुर्गावती और रानी लक्ष्मीबाई जैसी महावीर महिलाएं पीढ़ियों से जीवित रखती आई हैं।

‘समुद्र प्रदक्षिणा’ उन सभी भारतीय महिलाओं को समर्पित है जो सीमाओं को चुनौती देती हैं, समाज को प्रेरित करती हैं और राष्ट्र को गौरव प्रदान करती हैं।


📅 अंतिम पड़ाव: 30 मई 2025 को समापन समारोह

यह यात्रा 30 मई 2025 को भव्य ध्वजारोहण समारोह के साथ समाप्त होगी — एक ऐसा क्षण जो इतिहास में दर्ज होगा। इस यात्रा का उद्देश्य वर्ष 2026 में प्रस्तावित एक और भी साहसिक अंतर्राष्ट्रीय नौकायन अभियान की नींव रखना है।


भारत की प्रतिबद्धता: समावेशिता, उत्कृष्टता और आत्मविश्वास

इस अभियान के माध्यम से भारत ने एक बार फिर दुनिया को यह संदेश दिया है कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ नारा नहीं, राष्ट्र निर्माण का आधार है। यह केवल सैन्य कौशल का प्रदर्शन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का विस्तार है।

यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि जब देश की बेटियाँ लहरों पर निकलती हैं, तो वे सिर्फ नौकाएं नहीं चलातीं — वे इतिहास रचती हैं।

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