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गढ़वाल हितैषिणी सभा की गोष्ठी में उमड़ा जनसैलाब, वक्ताओं ने कहा“अब गांव की पहचान और राजनीतिक अस्तित्व बचाने की लड़ाई”
Amar sandesh नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में रविवार को ज्येष्ठ माह की तपती दोपहरी के बीच गढ़वाल भवन में उस समय जनसैलाब उमड़ पड़ा, जब गढ़वाल हितैषिणी सभा द्वारा दस सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी “अपनी गणना, अपने गांव” में बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने भाग लिया। भीषण गर्मी भी पहाड़ और गांव बचाने की भावना के आगे फीकी पड़ती नजर आई।
कार्यक्रम का शुभारंभ सभा अध्यक्ष सूरत सिंह रावत एवं महासचिव पवन कुमार मैठानी के नेतृत्व में दीप प्रज्ज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। गोष्ठी का संचालन भी पवन कुमार मैठानी ने प्रभावशाली ढंग से किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. हरेंद्र असवाल के संबोधन से हुआ। उन्होंने “अपनी गणना, अपने गांव” अभियान के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि पहाड़ की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान बचाने का माध्यम है।
गोष्ठी में उस समय भावनात्मक माहौल बन गया जब प्रसिद्ध गढ़वाली कवि डॉ. पृथ्वी सिंह केदारखंडी ने अपनी मार्मिक कविता—
“पुंगड़ा नी रयांन अब खल्यांण गौं मा,
बिरान हुयां छन मकान गौं-गौं मा”
का पाठ किया। कविता ने खाली होते गांवों की पीड़ा और पलायन की सच्चाई को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं उत्तराखंड से पहुंचे “अपनी गणना अपने गांव” अभियान के मुख्य संयोजक जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि यदि प्रवासी उत्तराखंडवासी अपनी जनगणना गांव में नहीं करवाएंगे तो आने वाले समय में पंचायतों, विधानसभा सीटों और स्थानीय नेतृत्व पर संकट गहरा सकता है। उन्होंने हर प्रवासी परिवार से अपील की कि वे इस बार अपने पूरे परिवार की गणना अपने मूल गांव में जाकर
करवाएं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुरेश बंदूनी ने कहा कि केवल जनगणना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर प्रवासी परिवार को अपने गांव या आसपास स्थायी आवास भी बनाना चाहिए ताकि गांवों से जुड़ाव बना रहे और आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों को पहचान सकें।
गोष्ठी में पूर्व दर्जा राज्य मंत्री उत्तराखंड सरकार मथुरा दत्त जोशी, महावीर केमवाल, गंभीर सिंह नेगी, सर्वेश्वर बिष्ट, सुरेशानंद बसलियाल, विनोद नौटियाल, देवेंद्र जोशी, बिशन सिंह राणा एवं चंदन सिंह गुसाईं सहित अनेक सामाजिक और बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों ने अपने विचार रखे।
सभा अध्यक्ष सूरत सिंह रावत ने कहा कि गढ़वाल हितैषिणी सभा हमेशा समाज और उत्तराखंड के हितों से जुड़े मुद्दों पर मुखर रही है और आगे भी जनता के सरोकारों की आवाज बुलंद करती रहेगी।
कार्यक्रम में सूरत सिंह रावत, पवन कुमार मैठानी, बृजमोहन उप्रेती, उदय सिंह नेगी, रामचंद्र सिंह भंडारी, कमल सिंह रावत, विजय सिंह नेगी, धन सिंह नेगी, राकेश गौड़, कवि जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’, वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश ध्यानी सहित बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडवासी मौजूद रहे।
सभा उपाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह नेगी के स्वागत संबोधन और सचिव देवेश नौटियाल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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