‘रास्ता’ तथा ‘सार्वभौमिक’ द्वारा बालिका दिवस पर अनूठी पहल 

सी एम पपनैं
नई दिल्ली। लोगो के बीच चेतना जगा, समाज में बालिकाओं के अधिकारो को लेकर जागरूकता पैदा करने। उन्हे नया अवसर मुहैया कराने। मानवीय अधिकारों की प्राप्ति। लैंगिग असमानता को लेकर जागरूकता पैदा करने तथा बालिकाओं के लिए बेहतरीन आजीविका सुनिश्चित करने के मकसद से, कई स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं। उक्त सहायता समूहों मे ‘रास्ता’ तथा ‘सार्वभौमिक’ संस्थाओं का नाम भी अग्रिम पांत मे रखा जा सकता है।
24 जनवरी राष्ट्रीय बालिका दिवस के सु-अवसर पर बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली 1994 मे स्थापित संस्था ‘रास्ता’ द्वारा मंडी हाउस स्थित एलटीजी सभागार में संस्था की पच्चीसवी वर्षगाठ पर मुख्य अतिथि डॉ पायल कनोडिया, संस्था अध्यक्ष पी सी नैलवाल, टीवी अभिनेत्री प्रियंका जोशी तथा अन्य अनेकों प्रबुद्ध अतिथियो की उपस्थिति मे तेरहवा बालिका दिवस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर मनाया गया।
इस अवसर पर जन जागरूकता बढ़ाने हेतु, ‘रास्ता’ संस्था मे शिक्षा ग्रहण कर रही बालिकाओं द्वारा प्रभावशाली व मनोहारी गीतो व नृत्यों की प्रस्तुतियां सुप्रसिद्ध कोरियोग्राफर राजेन्द्र सिंह बिष्ट के सानिध्य मे मंचित की गई।
इस अवसर पर ‘रास्ता’ अध्यक्ष पी सी नैलवाल, सचिव (सीईओ) के सी पंत, मुख्य अतिथि पायल कनोडिया तथा प्रियंका जोशी द्वारा अपने संबोधन मे बालिकाओं व अतिथियो से खचाखच भरे सभागार मे व्यक्त किया गया, बालिकाओं को हर क्षेत्र मे अपनी प्रतिभा दिखाने और निखारने के बराबर अवसर ‘रास्ता’ परिवार द्वारा शिक्षा के माध्यम से दिया जा रहा है। स्वास्थ के क्षेत्र मे मिड डे मील के साथ-साथ स्वास्थ शिविर लगाए जा रहे हैं। खतरनाक बीमारियों के बारे मे बालिकाओं को अवगत करा, जागरूक किया जा रहा है।
संस्था पदाधिकारियो द्वारा अवगत कराया गया, ‘रास्ता’ परिवार द्वारा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोसाइटियों के लिए शोध कार्य किए जाते रहे हैं। बालिकाओं की शिक्षा के क्षेत्र मे 2006 से संस्था निरंतर कार्यरत है। 2007 से खोड़ा (गाजियाबाद) मे अनोपचारिक शिक्षा केंद्र बालिकाओं के शिक्षा व स्वास्थ के क्षेत्र मे कार्य कर रहा है। अभी तक एक हजार बालिकाओं को सार्टिफिकेट दिए जा चुके हैं। नों सौ बालिकाऐं वर्तमान में शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। अवगत कराया गया, मुश्किले बहुत हैं। संस्था की अपनी स्कूल इमारत नही है, जिस कारण स्कूल किराये की बिल्डिंग मे चलायमान है। ‘रास्ता’ शिक्षा केंद्रों को आठवी तक मान्यता मिली हुई है।
वक्ताओ द्वारा 2011 की जनगणना के मुताबिक बालिकाओं का लिंगानुपात एक हजार लड़को मे नों सौ चालीस का होना तथा बालिकाओं की शिक्षा प्रतिशत दर लड़कों के अनुपात मे बहुत कम होने पर चिंता व्यक्त की गई। समाज की जागरूक पर बल दिया गया।
अतिथि वक्ताओ ने व्यक्त किया, सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान संवैधानिक विकल्प के साथ-साथ सामाजिक दर्शन व अभियान है, जिसकी महत्ता को समाज को समझना होगा। समाज में वह हर कुरीति खत्म करनी होगी जो बालिकाओं की प्रगति को बाधित कर रही है। समाज मे बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के लिए शिक्षा का बोध जरूरी है, जिस पर ‘रास्ता’ परिवार निष्ठा पूर्वक कार्य कर रहा है, जो सराहनीय है।
बालिका दिवस के अवसर पर ‘रास्ता’ परिवार द्वारा मुख्य व विशिष्ट अतिथियो के साथ-साथ रवींद्र त्यागी, विनीत काक्से, ईरम, नीलम, चंद्रमोहन पपनैं, विराट विक्रम तथा विनीता सिंह को सम्मान स्वरूप प्लान्ट भेट किए गए।
‘रास्ता’ की वर्ष 2018-2019 की वार्षिक रिपोर्ट का लोकार्पण मुख्य अतिथि के सानिध्य में संस्था पदाधिकारियो के हाथों सम्पन्न किया गया। उक्त वार्षिक रिपोर्ट में संस्था द्वारा बालिकाओं के उत्थान हेतु किए गए कार्यो व मिली उपलब्धियों को प्रकाशित किया गया है।
‘रास्ता’ परिवार मे शिक्षा ग्रहण कर रही बालिकाओं द्वारा गीतों व नृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियां मंचित की गई।
1-भोला भंडारी बम भोला भंडारी…ओम नमः शिवाय…।
वंदना से आरंभ हुए बालिकाओं के अन्य प्रभावशाली प्रस्तुतियों मे-
2- चलो स्कूल चले हम…।
3- टिक टिक टिक प्लाष्टिक..
4- आकांशा मोहंती (11वी कक्षा छात्रा) का कत्थक तथा
5- सत्यभामा गीत नाट्य, तथा
6- बंगाल की हल्दी नृत्य ने श्रोताओं के मध्य प्रभावशाली छाप छोड़ी।
‘रास्ता’ शिक्षा केंद्र मे आठवी की छात्रा रितु तथा एक अन्य स्कूली छात्रा की अभिभावक मां मधुमती द्वारा संस्था के द्वारा किए गए परोपकारी कार्यो के बावजूद अवगत कराया गया।
गढवाल भवन में शिक्षा के क्षेत्र मे कार्यरत ‘सार्वभौमिक’ संस्था द्वारा ‘सशक्त बेटी सशक्त समाज’ थीम पर आधारित चार भागों मे विभक्त कार्यक्रमो का आयोजन बालिका दिवस पर किया गया। ‘नौनी’ पर कविता पाठ। बालिकाओं पर तनाव प्रबन्धन तथा किशोरावस्था परिवर्तन पर वार्ता। फिजियोथेरेपिष्ट व योगाथेरेपिष्ट द्वारा योगाभ्यास तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम राकेश गुसांई के संगीत निर्देशन तथा लक्ष्मी रावत पटेल के नृत्य निर्देशन मे मंचित किए गए। शास्त्रीय गायिका मधु बेरिया बिष्ट शाह द्वारा गायन प्रस्तुत किया गया।
बालिका दिवस आयोजन के मुख्य अतिथि उद्योग जगत से जुड़े के सी पांडे के सानिध्य में उत्तराखंड के प्रबुद्ध साहित्यकारो, पत्रकारों, रंगकर्मियों तथा समाज सेवियो की बड़ी संख्या मे उपस्थित रही।
‘सार्वभौमिक’ संस्था अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट तथा महासचिव शर्मिला दत्त अमोला द्वारा मुख्य अतिथि व उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनो का आयोजन मे पहुचने पर अभिनन्दन किया गया। विगत दिनों विद्वान साहित्यकार डॉ गंगा प्रसाद विमल, शास्त्रीय गायिका मीरा गैरोला व हेमा गुसाई के निधन पर संस्था की ओर से दुःख व्यक्त कर, भावभिनी श्रद्धाजंलि अर्पित की गई। संस्था पदाधिकारियो द्वारा अवगत कराया गया, ‘सार्वभौमिक’ के आगामी कार्यक्रमो मे पहाड़ो मे बालिका विकास पर प्रोजेक्ट तथा मेंटल हैल्थ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संस्था को विगत वर्षों मे मिली उपलब्धियों के बारे मे भी उक्त संस्था पदाधिकारियो द्वारा अवगत कराया गया।
आयोजित बालिका दिवस कार्यक्रम का श्रीगणेश प्रबुद्ध अतिथियो द्वारा दीप प्रज्वलन की रश्म, संस्कृति गैरोला तथा सार्वभौमिक के कलाकारों द्वारा सरस्वती वंदना से की गई। ‘सार्वभौमिक’ पदाधिकारियो द्वारा मुख्य अतिथि के सी पांडे का शाल ओढा, पुष्पगुच्छ तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।
बालिका दिवस की बेला पर मुख्य अतिथि के सी पांडे ने व्यक्त किया, ‘सार्वभौमिक’ ने महिलाओं को आगे रख जो पहल की है, सराहनीय व प्रेरणादायी है। कहा, उस कार्यक्रम की कोई शोभा ही नहीं है, जहां महिलाऐ न हो। व्यक्त किया गया, महिलाओं को समानता का दर्जा मिलना आवश्यक है, तभी भारत तरक्की करेगा। 21वी सदी मे पहुच जाने पर भी बालिका दिवस मनाए जाने पर मुख्य अतिथि ने आश्चर्य व्यक्त किया। समाज की नाकामी व कुरीतियों को कोसा। प्रश्न किया, इन विषंगतियो से कब छुटकारा मिलेगा?
नोनियों को समर्पित ब्रह्मानंद कगड़ियाल, रमेश चंद्र घिल्डियाल तथा डॉ सतीश कालेश्वरी द्वारा काव्य पाठ किया गया।
रमेश चंद्र घिंडियाल की नोनियों को समर्पित कविता-
मेरे मन के आंगन में अभी भी खेलती है मेरी बच्ची…अभी भी खेलती है मेरी बच्ची…वो वक्त बहुत पीछे छूट चुका है, अब तो जवान हो चुकी होगी मेरी बच्ची…क्या मुझे पहचान पायेगी मेरी बच्ची…जब तक मेरी आंखे खुली हैं, तब तक मेरी बच्ची क्या ओझल हो पायेगी, मेरी नजरो से।
श्रोताओं द्वारा सराही गई।
प्रो.मोनिका रिखी (अरविंदो कालेज, डीयू) तथा प्रो.सुनीता देवी (एनसीईआरटी) ने अपने वक्तव्यो मे स्ट्रेस मैनेजमेंट (अवसाद मुक्ति) पर ज्ञानवर्धक व सुरुचिपूर्ण वक्तव्य दिए। व्यक्त किया, लैंगिंग भेदभाव बहुत बड़ी समस्या है। बालिकाओं को असमानता का सामना करना पड़ता है। उनका जीवन तनावमय है, फिर भी उनमे सहन शक्ति ज्यादा होती है। जो हम न कर पाए, वह हमे अपनी बच्चियों की जिंदगी के लिए करना चाहिए।
व्यक्त किया गया, जीवन में कई उतार चढ़ाव आते हैं। सामाजिक जिम्मेवारियों मे बदलाव होते रहते हैं। सभी समस्याऐ हमे मिलकर परिपक्वता की ओर बढ़ाती हैं। हार मानने से समस्याऐ महिलाओं में बढ़ती हैं। वर्तमान में तनाव बढ़ रहे हैं। तनाव को मैनेज करना सीखना होगा। लड़कियों को समर्थन, नए अवसर प्रदान करता है। सोशियल मीडिया वर्तमान में प्रभावशाली है। महिलाओं की शारीरिक, स्वास्थ, शिक्षा, रोजगार इत्यादि की बारे मे सोच बढ़ रही है। सोच से बाहर निकल अच्छा जीवन जिया जा सकता है।
व्यक्त किया गया, बच्चा घर परिवार से ही सीखता है। अपने बड़ो को अब्जॉर्ब करता है। व्यक्ति का झुकाव जेंडर की ओर ज्यादा होता है। स्त्री सशक्त है। लड़की की अच्छी पालना, दो घरो को बेहतर व मजबूत बनाती है। विज्ञापन बच्चों व समाज में गलत भाव पैदा कर रहे हैं। बच्चों से सवाल कीजिए तभी वह आगे बढ़ेगा। बच्चों की लाइफ में मीडिया बहुत बड़े स्तर पर प्रभावी है। अनेकों उदाहरणों के साथ, बच्चों के व्यवहार व उनमे सुधार की बाते विद्ववान प्रोफेसरो द्वारा सुझाई गई। साथ ही श्रोताओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विशेषज्ञ प्रोफेसरों द्वारा सटीक तौर पर दिए गए।
डॉ हिमानी बिष्ट एवं स्तुति दत्त द्वारा योग शिक्षा व पुरुषों की महिलाओं के प्रति सोच व व्यवहार पर वक्तव्य दिया गया। व्यक्त किया गया, जब आदमी बदलेगा तब औरत बदलेगी। सभागार में बैठे प्रबुद्ध जनों को स्वस्थ जीवन जीने हेतु योग का महत्व बताया व योग करवाया गया।
स्क्रीन पर हेमा गुसाई को समर्पित गीत-
….भगवान् को वरदान छो यो नोनी…पढ़ी लिखी जाली नोनी हमारी…श्रोताओं के बीच हेमा गुसाई के यादगार चित्रों के साथ प्रदर्शित किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे पुष्पाजोशी के सानिध्य में बालिकाओं के नृत्य समूह द्वारा ‘पीतल की मेरी गागरी’ गीत मे मनोहारी नृत्य झलक प्रस्तुत की गई। गायिका मधु बेरिया द्वारा  गीत-
सुआ बडि गोछा झक झोरा, मैल जांण छी केदान्यू ओर, पहाड़ का हरिया सेरा रुपाई है रे छा…।
तथा कार्यक्रम समापन पर लक्ष्मी रावत पटेल द्वारा नारी शक्ति पर कोरियोग्राफ नृत्य गीत-
कोमल है तू, कमजोर नही।
शक्ति नाम ही नारी है ..।
बेहद प्रभावशाली अंदाज मे प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम मे प्रतिभाग करने वाले सभी प्रबुद्ध जनों को आयोजक संस्था द्वारा पुष्पगुच्छ व स्मृतिचिन्ह भेट किए गए।
आयोजित बालिका दिवस कार्यक्रम का मंच संचालन संस्था अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट द्वारा बखूबी किया गया।
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