राष्ट्रीय

जन – केद्रित और मानवता प्रथम दृष्टिकोण भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मार्गदर्शक– सुधाकर दलेला

Amar sandesh नई दिल्ली। नई दिल्ली ब्रिक्स सिविल फोरम 2026 का आज नई दिल्ली में शुभारंभ हुआ। इसमें ब्रिक्स देशों के सिविल सोसायटी संगठनों, थिंक टैंकों, शैक्षणिक संस्थानों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया। फोरम में सहयोग को सुदृढ़ करने तथा सतत विकास के लिए व्यावहारिक एवं जन-केंद्रित समाधानों को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। लचीलापन, नवाचार और सततता के लिए विकास का स्थानीयकरण विषय पर आयोजित यह दो दिवसीय फोरम भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के व्यापक सहयोग एजेंडे में योगदान देने के साथ-साथ ब्रिक्स देशों के बीच अनुभवों, ज्ञान और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। यह फोरम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (RIS) वर्ष 2016 से भारत में ब्रिक्स सिविल फोरम की नोडल संस्था के रूप में कार्य कर रहा है।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में जन-केंद्रित सहयोग पर जोर —
फोरम के उद्घाटन संबोधन में श्री सुधाकर दलेला, सचिव (ER) एवं ब्रिक्स शेरपा, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार ने ब्रिक्स सहयोग को सुदृढ़ करने में विद्वानों, विशेषज्ञों, विचारकों और सिविल सोसायटी संगठनों के बीच संवाद एवं सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच जन-से-जन संपर्क, आपसी समझ और व्यापक सहयोग को बढ़ावा देने में ब्रिक्स सिविल फोरम की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। फोरम के विषय का उल्लेख करते हुए श्री दलेला ने ऐसे विकास समाधानों की आवश्यकता पर जोर दिया, जिनमें स्थानीय अनुभवों, सामुदायिक भागीदारी और व्यावहारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के “मानवता प्रथम” तथा जन-केंद्रित दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत प्रस्तावित 400 से अधिक बैठकों में से 350 से अधिक बैठकें अब तक आयोजित की जा चुकी हैं, जिनसे विभिन्न क्षेत्रों में ठोस परिणाम सामने आए हैं।

श्री दलेला ने कहा कि सिविल सोसायटी की भागीदारी ब्रिक्स देशों के बीच विश्वास, आपसी समझ और साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उन्होंने विचारों और चर्चाओं को व्यावहारिक साझेदारियों और ऐसे समाधानों में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिनसे समुदायों को ठोस लाभ मिल सके। उन्होंने उभरते बाजारों और विकासशील देशों के बीच ब्रिक्स सहयोग के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह समूह संवाद, सहयोग तथा अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण वैश्विक आर्थिक एवं शासन व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सात कार्य समूहों के माध्यम से लगभग 80 प्रतिनिधियों की भागीदारी– प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रो. सचिन कुमार शर्मा, महानिदेशक, RIS ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकास समाधानों तथा समकालीन विकास चुनौतियों से निपटने में सामुदायिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सिविल फोरम ब्रिक्स देशों के सिविल सोसायटी संगठनों और अन्य हितधारकों के बीच अनुभवों तथा नवाचारों को साझा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
ब्रिक्स सिविल फोरम के कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही, जिन्होंने विभिन्न सत्रों में अपने महत्वपूर्ण विचार और नीतिगत दृष्टिकोण साझा किए। इनमें सुश्री अपर्णा राय, संयुक्त सचिव (PP&R), विदेश मंत्रालय; श्री शंभु एल. हक्की, भारत के ब्रिक्स सूस-शेरपा एवं विदेश मंत्रालय में बहुपक्षीय आर्थिक संबंधों के संयुक्त सचिव; तथा श्री राजीव बोड़वाड़े, संयुक्त सचिव [MER-III], विदेश मंत्रालय शामिल रहे।

वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता ने ब्रिक्स सिविल फोरम के विचार-विमर्श को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के व्यापक उद्देश्यों और प्राथमिकताओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग और साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा को समृद्ध किया। इन कार्य समूहों ने जून और जुलाई 2026 के दौरान व्यापक विचार-विमर्श और परामर्श की प्रक्रिया आयोजित की, जिसका उद्देश्य फोरम की चर्चाओं में व्यापक भागीदारी और सार्थक विचार-विमर्श सुनिश्चित करना था।
प्रो. शर्मा ने ब्रिक्स सिविल फोरम के साथ RIS के दीर्घकालिक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि RIS वर्ष 2016 से भारत की सिविल फोरम प्रक्रिया की नोडल संस्था के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान सरकार को RIS द्वारा दिए जा रहे निरंतर सहयोग का भी उल्लेख किया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में आठ से अधिक मंत्रालयों के साथ सहभागिता शामिल है। दो दिवसीय कार्यक्रम में दो पूर्ण सत्र, सात कार्य समूह बैठकें, दो राउंडटेबल और एक समापन सत्र शामिल हैं, जिनमें लगभग 70–80 वक्ता भाग ले रहे हैं।

वरिष्ठ विदेश मंत्रालय अधिकारियों की सहभागिता —
ब्रिक्स सिविल फोरम के कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की भी सक्रिय सहभागिता रही, जिन्होंने विभिन्न सत्रों में अपने महत्वपूर्ण विचार और नीतिगत दृष्टिकोण साझा किए। इनमें सुश्री अपर्णा राय, संयुक्त सचिव (PP&R), विदेश मंत्रालय; श्री शंभु एल. हक्की, भारत के ब्रिक्स सूस-शेरपा एवं विदेश मंत्रालय में बहुपक्षीय आर्थिक संबंधों के संयुक्त सचिव; तथा श्री राजीव बोड़वाड़े शामिल रहे। वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता ने ब्रिक्स सिविल फोरम के विचार-विमर्श को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के व्यापक उद्देश्यों और प्राथमिकताओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग और साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा को समृद्ध किया।

व्यावहारिक सहयोग और विकास परिणामों पर केंद्रित चर्चा

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. शेषाद्रि चारी, सदस्य, गवर्निंग काउंसिल, RIS ने विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अनुसंधान एवं नीतिगत संवाद के प्रति RIS की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने साझा विकास चुनौतियों से निपटने के लिए लोगों, संस्थानों और समुदायों के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा अनुभवों और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करने के महत्व पर जोर दिया। डॉ. चारी ने कहा कि ब्रिक्स सिविल फोरम सिविल सोसायटी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य हितधारकों के बीच संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है तथा व्यापक ब्रिक्स सहयोग प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फोरम के विचार-विमर्श से रचनात्मक और दूरदर्शी सिफारिशें सामने आएंगी, जो साझा हित के क्षेत्रों को समाहित करते हुए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने में योगदान देंगी।

सात विषयगत क्षेत्रों में होगा विचार-विमर्श–

सिविल फोरम के सात कार्य समूह स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, वित्त, पारिस्थितिकी, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं सामाजिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इन कार्य समूहों में ब्रिक्स देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और साझेदारी के अवसरों की पहचान पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
दो दिवसीय ब्रिक्स सिविल फोरम 2026 में ब्रिक्स देशों के सिविल सोसायटी संगठनों, थिंक टैंकों, शैक्षणिक संस्थानों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों सहित सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लिया। विभिन्न सत्रों, कार्य समूहों और राउंडटेबल के माध्यम से प्रतिभागियों ने साझा विकास प्राथमिकताओं, सहयोग के अवसरों तथा व्यावहारिक समाधानों पर विचार-विमर्श किया।

दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन एक भव्य सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ, जिसमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता को प्रदर्शित करने वाली प्रस्तुतियों ने प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम ने ब्रिक्स देशों के बीच जन-से-जन संपर्क, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी समझ की भावना को और सुदृढ़ किया।

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