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अब अपनी भाषा में होगी बैंकिंग! पीएनबी की नई पहल से करोड़ों ग्राहकों को मिलेगा बड़ा फायदा

डिजिटल इंडिया ‘भाषिणी’ के साथ समझौता, अब कई भारतीय भाषाओं में आवाज़ और टेक्स्ट के जरिए मिलेंगी बैंकिंग सेवाएं

 

Amar sandesh नई दिल्ली, 16 जुलाई। देश के अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने डिजिटल बैंकिंग को अधिक सरल, समावेशी और ग्राहक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बैंक ने डिजिटल इंडिया ‘भाषिणी’ प्रभाग (DIBD) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के बाद पीएनबी के ग्राहक अब कई भारतीय भाषाओं में आवाज़ और टेक्स्ट के माध्यम से आसानी से बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।

नई दिल्ली स्थित पीएनबी के कॉर्पोरेट कार्यालय में हुए इस समझौते के दौरान बैंक के कार्यपालक निदेशक एम. परमसिवम, डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग तथा पीएनबी के मुख्य महाप्रबंधक (डिजिटल बैंकिंग ट्रांसफॉर्मेशन) आतिश कुमार राउत उपस्थित रहे।

इस साझेदारी के तहत भाषिणी की अत्याधुनिक बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक को पीएनबी के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि के ग्राहक अपनी पसंदीदा भारतीय भाषा में सहज, सुरक्षित और सुविधाजनक बैंकिंग सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे। बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आसान होने से डिजिटल समावेशन को भी नई गति मिलेगी।

पीएनबी के कार्यपालक निदेशक एम. परमसिवम ने कहा कि यह साझेदारी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से समावेशी डिजिटल परिवर्तन का मजबूत उदाहरण है। इससे भाषा की बाधाएं समाप्त होंगी और देश के हर नागरिक तक डिजिटल बैंकिंग सेवाओं की पहुंच आसान होगी।

डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग के सीईओ अमिताभ नाग ने कहा कि आवश्यक बैंकिंग सेवाओं के लिए भाषा कभी भी बाधा नहीं बननी चाहिए। पीएनबी के साथ यह साझेदारी ‘वॉइस-फर्स्ट’ बहुभाषी बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करेगी और ग्राहकों को उनकी अपनी भाषा में डिजिटल बैंकिंग का सहज अनुभव प्रदान करेगी।

पीएनबी के मुख्य महाप्रबंधक आतिश कुमार राउत ने कहा कि बैंक सुरक्षित, सरल और ग्राहक-केंद्रित डिजिटल सेवाएं देने के लिए लगातार प्रयासरत है। भाषिणी के साथ यह सहयोग आधुनिक एआई तकनीक के माध्यम से बैंक की डिजिटल सेवाओं को और अधिक प्रभावी, समावेशी तथा उपयोगकर्ता अनुकूल बनाएगा।

पीएनबी की यह पहल न केवल डिजिटल बैंकिंग को नई दिशा देगी, बल्कि देश के करोड़ों ग्राहकों को अपनी मातृभाषा में बैंकिंग सेवाओं का लाभ दिलाकर वित्तीय समावेशन को भी मजबूत करेगी।

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