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श्रीमती मधु भट्ट के नेतृत्व में भव्य हरेला हरियाली महोत्सव, संस्कृति, पर्यावरण और जनभागीदारी का बना प्रेरक संगम
Amar sandesh दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड सरकार के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उत्तराखंड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद तथा संस्कृति विभाग के तत्वावधान में आयोजित हरेला हरियाली महोत्सव-2026 ने प्रकृति संरक्षण, लोक संस्कृति और सतत विकास का सशक्त संदेश दिया। परिषद की उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) श्रीमती मधु भट्ट के नेतृत्व में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व राज्यपाल, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड एवं पद्म भूषण श्री भगत सिंह कोश्यारी ने हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, जिम्मेदारी और जीवन मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने सभी लोगों से कम से कम एक पौधा लगाने और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षण देने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और जनसंकल्प से ही सफल हो सकता है।
श्री कोश्यारी ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति और प्रकृति एक-दूसरे की पूरक हैं। हरेला जैसे लोकपर्व आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और सुरक्षित भविष्य का संदेश देते हैं। उन्होंने श्रीमती मधु भट्ट द्वारा आयोजित हरेला हरियाली महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में पर्यावरण चेतना, सांस्कृतिक जागरूकता और लोक परंपराओं के संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनते हैं। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए मधु भट्ट एवं उनकी पूरी टीम को बधाई भी दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना तथा उत्तराखंड की पारंपरिक वाद्य ध्वनियों के साथ हुआ। इस अवसर पर, पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, महामंत्री (भाजपा) श्रीमती आदिति रावत, राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) भुवन विक्रम डबराल, राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) श्री नेमवाल तथा राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) श्री अशोक शाही सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
“हरेला प्रकृति, संस्कृति और सतत विकास” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति का प्रभावशाली संदेश दिया।
महोत्सव के दौरान “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधारोपण कराया गया तथा उपस्थित सभी लोगों को पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, सामाजिक सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक शिक्षकों, विद्यार्थियों, कलाकारों और समाजसेवियों को सम्मानित भी किया गया।
समापन अवसर पर श्रीमती मधु भट्ट ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, सहयोगी संस्थाओं, मीडिया प्रतिनिधियों एवं स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हरेला केवल पौधारोपण का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का उत्सव है। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना जितना आवश्यक है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उनका संरक्षण करना है। उन्होंने अधिक से अधिक जनभागीदारी के साथ हरित, स्वच्छ और पर्यावरण-संतुलित उत्तराखंड के निर्माण का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है और हरेला महोत्सव इसी सामूहिक संकल्प का प्रतीक बनकर उभरा।
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