उत्तराखण्डपर्यटनराज्य

देवभूमि उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ी पर स्थित पांडवों की तपोस्थली माँ मानिला देवी मंदिर

                                                            शंकर सिंह अधिकारी मिनार
   देवभूमि उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ी पर स्थित पांडवों की तपोस्थली माँ मानिला देवी मंदिर प्रांगण(बिनायक श्रेत्र) ब्लॉक भिकियासैण, अल्मोडा (उत्तराखंड)  करीब 1800 मीटर की ऊँचाई पर स्थित माँ भगवती के रूप में प्रतिष्ठित सिद्धपीठ एक पवित्र रमणीय धार्मिक स्थल है, जहाँ माँ आदि शक्ति बैष्णवी और काली रुप में दो आमने सामने एक सीमित ऊँचाई की  पत्थरों से निर्मित मंदिर गर्भ में विराजमान हैं । माँ के पावन चरणों में पवित्र रामगंगा नदी बहती है  जो मंदिर स्थल से करीब 1000 मीटर नीचे है ।
पौराणिक कथाओं के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने  माँ भगवती के इस पवित्र धार्मिक स्थल पर धर्म की रक्षा और अपनी विजय सुनिश्चित हेतु तपस्या की थी । जिसका प्रमाण इस स्थल पर निर्मित  महाभारत शैली के दो मंदिर है जो  आज भी अपने मूल रूप में बिना किसी जींणोद्वार के विधमान है, जिन्हें पांडवों द्वारा अपने यहाँ प्रवास के दौरान निर्मित किया हुआ  कहा जाता है ।
पिछले दो दशक से इस मंदिर परिसर में श्रेत्र के निवासियों और दूसरे प्रदेशों के माँ के भक्तों के पारस्परिक सहयोग या व्यक्तिगत महादान से विभिन्न हिंदू देवी देवताओं के छोटे बड़े 8-10 मंदिर सहित संत मुनियों और भक्तों हेतु  7-8 विश्रामकक्ष और करीब 1000 भक्तों के बैठने की व्यवस्था हेतु एक भव्य सत्संग हाल बन गये है । जिससे यह स्थल धीरे धीरे उत्तराखंड का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बनने जा रहा है । इसके साथ साथ माँ नौ  दुर्गा का नव निर्मित भव्य मंदिर जो करीब 60 फुट ऊँचा और 40 फुट की गोल परिधि में है और पूरे उत्तराखंड में अपने आप में एक अद्भुत मंदिर रचना है से इस स्थल की प्रसिद्ध में चार चाँद लग गये है । नौ दुर्गा का ये अद्भुत मंदिर  पर्यटकों का आकर्षण का केन्द्र बनता जा रहा है । वैसे अभी इस मंदिर के बाहरी हिस्से में सौंदरीकरण, मंदिर के धरातल पर पानी का संगीतमय फव्वारा, मंदिर परिसर की चार-दिवारी, पुरे मंदिर परिसर का सौंदरीकरण और मंदिर स्थल के सड़क मार्ग पर मुख्य प्रवेश गेट के साथ  पैदल यात्रियों हेतु अलग से छोटे रास्ते का गेट आदि सहित कई जरूरी  काम होने है जो इसके उत्तराखंड के एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बनाने के श्रेत्र वासियों के संकल्प हेतु बहुत ही आवश्यक है ।  इसके अलावा भक्तों के विश्राम हेतु वर्तमान विश्रामकक्ष/ धर्मशाला को और अधिक कक्षों  और सुविधाओं वाला और इसके स्थल पर धार्मिक पर्यटकों हेतु जरूरी मूलभूत सुविधायें उपलब्ध करानी भी जरूरी है ।
       माँ मानिला देवी एक चमत्कारी आदि शक्ति माँ है जो अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती है और इसी चमत्कार की वजह से आपकी ख्याति और जय-जयाकार दिनों दिन सब तरफ फैल रही है।  श्रेत्रीय लोगों के अलावा दूर प्रदेशों से लोग बड़ी संख्या में  अपने वांछनीय मनोकामनों हेतु माता के दरबार में दर्शन करते हैं । पिछले लगभग 16-17 साल से इस पवित्र स्थल पर हर वर्ष   अगस्त माह में श्रेत्रीय निवासियों के पारस्परिक सहयोग से श्रीमद् भागवत महापुराण का आयोजन होता है । इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व भी है क्योंकि श्रेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी का जश्न ए मेला माँ मानिला देवी  के इसी पावन स्थल पर बड़े धूमधाम और हर्षोउल्लास से मनाया था और तभी से हर वर्ष 15 अगस्त का आजादी का ऐतिहासिक मेला लगता है ।
।।बोलो माँ मानिला देवी की जय।।
प्रमुख स्थानों से दूरी (लगभग  कि मी में ):
1• रामनगर (जिम कोर्बेट पार्क)  – 100
2• रानीखेत-  60
3• नैनीताल-  90
4• अल्मोडा-  80
नजदीक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल:
माँ  गर्जिया मंदिर  (रामनगर)
माँ मानिला देवी मंदिर  (सल्ट)
माँ  दुनागिरी मंदिर (द्वाराहाट)
माँ नैधना मंदिर(पाली-  द्वाराहाट)
माँ संतोषी मंदिर झंडीधार  (बाजन- बिनायक)
दर्शनीय हिमालय चोटियां:
त्रिशुल, नंदा देवी, पंचाचुली आदि।
नजदीक बजार:
भिकियासैण, मांसी, गनाई (चौखोटिया), द्वाराहाट,रानीखेत
नजदीक रेलवे स्टेशन: रामनगर
नजदीक हवाई अड्डा: पंतनगर
।।जय उत्तराखंड जय देवभूमि ।।
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