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संविधान के चित्रों में समाहित है भारत की सनातन संस्कृति और गौरवशाली इतिहास:– मुकेश भारद्वाज

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में ‘हमारा संविधान, हमारा गौरव’ पुस्तक का विमोचन और परिचर्चा संपन्न

डॉ. के सी पांडेय,

नई दिल्ली। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (IGNCA) के जनपद सम्पदा प्रभाग द्वारा ‘ज्ञानपथ शृंखला’ के अंतर्गत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय संविधान की मूल प्रति में शामिल चित्रों पर आधारित पुस्तक ‘हमारा संविधान, हमारा गौरव’ का विमोचन एवं परिचर्चा आयोजित की गई। संभवतः यह पहली ऐसी पुस्तक है जो पूर्णतः संविधान के उन 22 चित्रों पर केंद्रित है, जिन्हें अक्सर विमर्श से बाहर रखा जाता है। इसे दिल्ली के धनहरी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है।

पुस्तक के लेखक मुकेश भारद्वाज ने लेखन प्रक्रिया के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि इस कार्य को पूर्ण करने में उन्हें ढाई वर्ष का समय लगा। उन्होंने कहा, “जब मैंने संविधान के चित्रों का गहन अध्ययन किया, तो पाया कि ये केवल कलाकृतियाँ नहीं हैं, बल्कि ये देश के नागरिकों को हमारी वैज्ञानिक वैदिक सभ्यता, सनातन संस्कृति और राष्ट्रवादी परंपराओं की याद दिलाने का एक जीवंत प्रयास हैं।”

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारत विकास परिषद के उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री विक्रांत खंडेलवाल ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास केवल दो ही चीजों को अमर रखता है—एक महान निर्माण और दूसरी कालजयी रचना। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक संविधान के माध्यम से भारत के क्रमिक विकास की कहानी कहती है।

जनपद संपदा प्रभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. के. अनिल कुमार ने जोर देते हुए कहा कि यह पुस्तक केवल कानूनी दस्तावेज़ (संविधान) के बारे में नहीं है, बल्कि यह हमारी उस संस्कृति की संवाहिका है जो हजारों वर्षों से अटूट है।

मुख्य अतिथि एवं दिल्ली नगर निगम की शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने कहा, “अक्सर संविधान की धाराओं पर तो खूब चर्चा होती है, लेकिन इसमें शामिल चित्रों के महत्व को भुला दिया गया था। यह पुस्तक उस शून्यता को भरने का काम करती है।” वहीं, दिल्ली नगर निगम के उप महापौर जय भगवान यादव ने लेखक की सराहना करते हुए कहा कि सनातन सभ्यता की रक्षा का दायित्व हम सभी का है और मुकेश भारद्वाज ने इस पुस्तक के माध्यम से अपने नागरिक कर्तव्य का बखूबी निर्वहन किया है।

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