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“बांज है तो पानी है” – धुरी फाउंडेशन का पर्यावरण के लिए प्रेरणादायक वृक्षारोपण अभिया

*संस्थापक सुरेंद्र हालसी का संकल्प – “बांज को बचाना, पहाड़ को संवारना”**

Amar sandesh दिल्ली/नैनीताल। उत्तराखंड की हरी-भरी पहाड़ियों में जीवनदायिनी वृक्ष प्रजाति बांज को बचाने के लिए “धुरी फाउंडेशन” ने एक प्रेरणादायक पहल की शुरुआत की है। पर्यावरण संतुलन, जल संरक्षण और पहाड़ी संस्कृति के प्रतीक बांज के संरक्षण हेतु फाउंडेशन द्वारा बेतालघाट ब्लॉक के लेधरा वन पंचायत क्षेत्र में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत 400 बांज और 50 तेजपत्ता के पौधों का रोपण किया गया। फाउंडेशन के अध्यक्ष सुरेंद्र हालसी ने बताया कि यह केवल एक वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक संरक्षण अभियान है। लगाए गए सभी पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी फाउंडेशन द्वारा ली गई है। इसके लिए एक स्थानीय व्यक्ति की नियुक्ति भी की गई है जो इन पौधों की नियमित निगरानी करेगा।

श्री हालसी ने कहा,बांज हमारे पहाड़ की आत्मा है। यह न केवल वातावरण को ठंडक देता है, बल्कि वर्षाजल को रोकने और धरती के गर्भ में पहुंचाने का भी कार्य करता है। अगर बांज बचेगा, तो पहाड़ बचेगा, पानी बचेगा और हमारा भविष्य भी।”

कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता उल्लेखनीय रही। इस पुनीत कार्य में सुरेंद्र हालसी, दलीप नेगी, सुलभ बोहरा, वन रक्षक मदन मोहन जोशी, ध्यान सिंह हालसी, रमेश नेगी, लक्ष्मण सिंह, प्रताप सिंह, धाम सिंह, राकेश नेगी, कुलदीप हालसी, मंजू पंत, हर्षित, सुमित, लक्की, भूमि सहित अनेक पर्यावरण प्रेमियों ने भाग लिया।

धुरी फाउंडेशन की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक संवेदनशील प्रयास है, बल्कि उत्तराखंड की पारंपरिक जैव विविधता को पुनर्जीवित करने की ओर एक मजबूत कदम भी है।

हम सब मिलकर संकल्प लें – “जहां बांज, वहां जीवन”

र्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता उल्लेखनीय रही। इस पुनीत कार्य में सुरेंद्र हालसी, दलीप नेगी, सुलभ बोहरा, वन रक्षक मदन मोहन जोशी, ध्यान सिंह हालसी, रमेश नेगी, लक्ष्मण सिंह, प्रताप सिंह, धाम सिंह, राकेश नेगी, कुलदीप हालसी, मंजू पंत, हर्षित, सुमित, लक्की, भूमि सहित अनेक पर्यावरण प्रेमियों ने भाग लिया।

धुरी फाउंडेशन की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक संवेदनशील प्रयास है, बल्कि उत्तराखंड की पारंपरिक जैव विविधता को पुनर्जीवित करने की ओर एक मजबूत कदम भी है।

हम सब मिलकर संकल्प लें – “जहां बांज, वहां जीवन”

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