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साधारण से असाधारण तक: चंद्र बल्लभ टम्टा उत्तराखंड की आवाज को राष्ट्रीय पहचान देने वाला नाम

दिल्ली एनसीआर में रहकर भी जड़ों से जुड़ाव, समाज सेवा, संस्कृति और स्वाभिमान की मिसाल

अमर चंद्र

नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड की मिट्टी में जन्मे लोग अपनी सादगी, मेहनत और संस्कारों के लिए पहचाने जाते हैं। इन्हीं गुणों को आत्मसात करते हुए अल्मोड़ा की धरती से निकलकर दिल्ली एनसीआर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले चंद्र बल्लभ टम्टा आज एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जो समाज सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण और सामुदायिक नेतृत्व का पर्याय बन गया है।
एक साधारण परिवार से निकलकर अपनी मेहनत और दूरदर्शी सोच के बल पर उन्होंने न केवल व्यावसायिक क्षेत्र में सफलता हासिल की, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी हमेशा प्राथमिकता दी। दिल्ली एनसीआर में संचालित उनकी कंपनी में लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारी उत्तराखंड के हैं। यह केवल रोजगार देने का कार्य नहीं, बल्कि अपने प्रदेश के लोगों को आगे बढ़ाने की सोच का जीवंत उदाहरण है।
चंद्र बल्लभ टम्टा का मानना है कि उत्तराखंड का हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी जिले से हो वह पूरे प्रदेश का प्रतिनिधि है। यही सोच उन्हें 13 जिलों के लोगों को एक सूत्र में जोड़ने की प्रेरणा देती है। वे हर जरूरतमंद के साथ खड़े रहते हैं और हर वर्ग के लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं।
सांस्कृतिक क्षेत्र में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय भव्य उत्तराखंड महोत्सव ने राजधानी में उत्तराखंड की संस्कृति को एक नई पहचान दी। इसके अलावा मंडी हाउस जैसे सांस्कृतिक केंद्रों पर उत्तराखंड के लोक कलाकारों को मंच प्रदान करना, उनके कला-सम्मान और पहचान को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास रहा है।
इतना ही नहीं, उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक कलाकारों के लिए उन्होंने जो कार्य किए, उन्हें आज भी समाज में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में याद किया जाता है। उनके प्रयासों ने कई कलाकारों को नई दिशा और पहचान दी।
समाज के शिल्पकार वर्ग के उत्थान के लिए भी चंद्र बल्लभ टम्टा ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। “शिल्पकार टाइम्स” अखबार का संचालन करके उन्होंने समाज के लोगों को अपनी आवाज उठाने का एक मजबूत मंच प्रदान किया है। यह केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि समाज के अधिकारों, सम्मान और जागरूकता की लड़ाई का माध्यम बन चुका है।
मृदुभाषी स्वभाव और स्पष्ट दृष्टिकोण उनके व्यक्तित्व की खास पहचान है। वे केवल बातें नहीं करते, बल्कि जमीन पर उतरकर कार्य करने में विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि वे हर वर्ग के लोगों के बीच सम्मान और विश्वास के साथ देखे जाते हैं।
चंद्र बल्लभ टम्टा आज उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो छोटे शहरों और साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि अगर नीयत साफ हो और सोच समाज के लिए हो, तो कोई भी व्यक्ति अपने क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है।
दिल्ली एनसीआर में रहकर भी अपने उत्तराखंड से उनका जुड़ाव आज भी उतना ही गहरा है, जितना अपने गांव की मिट्टी से होता है। यही जुड़ाव उन्हें खास बनाता है और यही उन्हें एक सच्चा सामाजिक योद्धा भी बनाता है।
कहानी।

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