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Amar sandesh दिल्ली/बेंगलुरु। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) की ओर से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों में आरक्षण नीति को प्रभावी और एकसमान तरीके से लागू करने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। 20-21 अगस्त 2026 को बेंगलुरु स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ कॉलेज में आयोजित इस कार्यशाला में वित्तीय क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
यह कार्यशाला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य सरकारी आरक्षण नीति को सही तरीके से लागू करने के साथ-साथ सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों में कर्मचारियों और लाभार्थियों से जुड़े कल्याणकारी उपायों को मजबूत करना है।
कार्यशाला के पहले दिन 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) तथा भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के वरिष्ठ मानव संसाधन अधिकारी और मुख्य संपर्क अधिकारी (CLO) शामिल रहे। इसके अलावा सभी 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, 7 सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां और 7 सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
विशेषज्ञों ने आरक्षण से जुड़े नियमों और उनके व्यावहारिक अमल पर जानकारी दी। चर्चा में यह भी विचार किया गया कि आरक्षण नीति लागू करते समय संस्थानों को किन व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और उन्हें किस तरह दूर किया जा सकता है।
कार्यशाला में गोलमेज चर्चा और सवाल-जवाब सत्र भी हुआ। इसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और वित्तीय सेवा क्षेत्र में आरक्षण नीति को अधिक प्रभावी एवं एकसमान तरीके से लागू करने के उपायों पर चर्चा की।
कार्यशाला के दूसरे दिन दिव्यांगजनों के लिए वित्तीय सेवाओं को अधिक आसान और सुलभ बनाने के मुद्दे पर विशेष चर्चा की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांगजन भी बैंकिंग, बीमा और अन्य वित्तीय सेवाओं का आसानी से लाभ उठा सकें।
वित्त मंत्रालय की इस पहल को सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों में समान अवसर, समावेशिता और सरकारी कल्याणकारी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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