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भारत का लोकतंत्र और जनसांख्यिकी विश्व के लिए आशा की किरण है: –प्रधानमंत्री
Amar sandesh नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज संसद परिसर में 2026 के बजट सत्र के आरंभ से पहले मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण को 140 करोड़ देशवासियों के विश्वास, उनके परिश्रम और युवाओं की आकांक्षाओं की सशक्त अभिव्यक्ति बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति ने सत्र और वर्ष 2026 की शुरुआत में ही संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के समक्ष कई मार्गदर्शक बिंदु रखे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्राध्यक्ष द्वारा सरल और स्पष्ट शब्दों में व्यक्त अपेक्षाओं को सभी सांसदों ने गंभीरता से लिया होगा, जिससे यह बजट सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन गया है।
श्री मोदी ने कहा कि यह बजट सत्र 21वीं सदी की पहली तिमाही के समापन और दूसरी तिमाही के आरंभ का प्रतीक है। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आने वाले 25 वर्ष निर्णायक हैं और यह बजट सदी की दूसरी तिमाही का पहला बजट है।
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार बजट प्रस्तुत किया जाना भारत के संसदीय इतिहास में एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष की शुरुआत भारत के लिए बेहद सकारात्मक रही है और आज एक आत्मविश्वासी भारत विश्व के लिए आशा और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और देश की नई संभावनाओं को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यह मुक्त व्यापार समझौता महत्वाकांक्षी भारत, आकांक्षावान युवाओं और आत्मनिर्भर भारत के लिए एक बड़ा अवसर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने उद्योग जगत और निर्माताओं से आह्वान किया कि वे इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं और आत्मसंतुष्ट न हों। उन्होंने कहा कि 27 यूरोपीय देशों के विशाल बाजार में भारतीय उत्पाद कम लागत पर पहुंचेंगे, लेकिन वहां टिके रहने के लिए गुणवत्ता सर्वोपरि होगी। उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद न केवल बाजार दिलाएंगे, बल्कि भारतीय ब्रांड पर वैश्विक विश्वास भी मजबूत करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह समझौता मछुआरों, किसानों, युवाओं और सेवा क्षेत्र से जुड़े उन लोगों के लिए भी नए अवसर लेकर आया है, जो वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने इसे एक प्रतिस्पर्धी, आत्मविश्वासी और उत्पादक भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही राष्ट्रीय ध्यान बजट पर केंद्रित रहता है, लेकिन सरकार की पहचान सुधार, प्रभावी क्रियान्वयन और परिवर्तन रही है। देश अब दीर्घकालिक लंबित समस्याओं से आगे बढ़कर दीर्घकालिक और स्थायी समाधानों की ओर बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार प्रौद्योगिकी को अपनाएगी और उसकी शक्ति का उपयोग करेगी, लेकिन मानव-केंद्रित दृष्टिकोण से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यही सरकार की प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का लोकतंत्र और उसकी जनसंख्या आज पूरी दुनिया के लिए आशा का स्रोत हैं। संसद लोकतंत्र का मंदिर है और यहां लिए गए निर्णय न केवल देश, बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी सकारात्मक संदेश देंगे।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों से समाधान-आधारित सोच, निर्णायक कदम और योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी सुनिश्चित करने में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह समय व्यवधान का नहीं, बल्कि संकल्प और समाधान का है।
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