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पांच वर्षों में भाजपा ने महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार विहीन और विकास से परिपूर्ण शासन दिया : अमित शाह

केन्द्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  अमित शाह ने मुंबई, महाराष्ट्र के श्री शनमुखानंद चंद्रसेकरेंद्र सरस्वती नाट्यगृह (सायन) में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति के ऐतिहासिक निर्णय पर आयोजित व्याख्यान को संबोधित किया और कहा कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35 (A) के हटने से प्रदेश के विकास के द्वार खुल गए हैं। हम जम्मू-कश्मीर के विकास और वहां के निवासियों के उत्थान के लिए कटिबद्ध हैं। ज्ञात हो कि धारा 370 के उन्मूलन की जानकारी देश के जन-जन तक पहुंचाने के लिए और इस बदले हुए परिप्रेक्ष्य में देश के प्रत्येक नागरिक को जम्मू-कश्मीर की जनता के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का बोध कराने हेतु भारतीय जनता पार्टी ने 01 सितंबर 2019 से 30 सितंबर 2019 तक पूरे देश में व्यापक जनसंपर्क एवं जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया है जिसके तहत देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। श्री शाह ने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा में पूर्ण बहुमत की भारतीय जनता पार्टी सरकार बनना तय है। कांग्रेस और एनसीपी भले ही अलग-अलग राग अलापें लेकिन महाराष्ट्र में एनडीए सरकार तीन चौथाई बहुमत से जीत हासिल करेगी। जिस प्रकार केंद्र में मोदी सरकार और प्रदेश में देवेन्द्र सरकार पांच साल चली है, उससे महाराष्ट्र की जनता भाजपा में अपनी आशाओं, आकांक्षाओं और सपनों को साकार होता हुआ देख रही है। महाराष्ट्र की जनता ने यह तय कर लिया है कि  देवेन्द्र फड़णवीस पुनः प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35 (A) को हटाने के भागीरथ प्रयास को पूरा कर देश के जन-जन की आकांक्षा को पूरा करने का कार्य किया है। धारा 370 और 35 (A) जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ जुड़ाव और देश की एकता व अखंडता के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा थी। जब तक धारा 370 था, जम्मू-कश्मीर के लिए हमें बार-बार कहना पड़ता था कि जम्मू-कश्मीर हिंदुस्तान का अभिन्न अंग है। आज हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि जम्मू-कश्मीर हिंदुस्तान का अभिन्न अंग है क्योंकि अब धारा 370 और 35 (A) अस्तित्व में नहीं है। एक देश में एक विधान, एक प्रधान और एक निशान के नारे को लेकर जन संघ और भारतीय जनता पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। पहले जम्मू-कश्मीर जाने के लिए भारतीय नागरिकों को भी परमिट लेना पड़ता था। जम्मू-कश्मीर को हिंदुस्तान के साथ अखंड रूप से जोड़ने के लिए हमारे प्रथम अध्यक्ष डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी जम्मू-कश्मीर गए लेकिन शेख अब्दुल्ला सरकार ने उन्हें जेल में डाल दिया जहां रहस्यमय परिस्थितियों में उनका देहावसान हो गया। हमने हिंदुस्तान की एकता और अखंडता के लिए आंदोलनों की शुरुआत की और पहला बलिदान दिया। राहुल गाँधी पर हमलावर होते हुए श्री शाह ने कहा कि राहुल गाँधी कहते हैं कि धारा 370 एक राजनीतिक मुद्दा है। राहुल गाँधी, आप आज राजनीति में आये हैं लेकिन हमारी तीन-तीन पीढ़ियों ने जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ अक्षुण्ण रखने के लिए बलिदान दिया है। हम हमेशा इसके लिए आंदोलनरत रहे। यह राजनीतिक मुद्दा कतई नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के लिए जम्मू-कश्मीर में धारा 370 और 35 (A) को रखना राजनीतिक मुद्दा था और आज भी है जबकि इसे हटाना भारतीय जनता पार्टी के लिए भारत माँ को एक और अखंड बनाने का संकल्प है और यही हमारे प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  का भी संकल्प है। राहुल गाँधी, आपको इसमें राजनीति दिखती है जबकि हमें धारा 370 और 35 (A) के हटाने के निर्णय में देशभक्ति दिखाई देती है, यही तो फर्क है भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में।  राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि देश की आजादी के बाद 600 से अधिक रियासतों को भारत के साथ जोड़ने का बीड़ा उठाया लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जबकि जम्मू-कश्मीर का मसला पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने पास रखा। परिणाम यह हुआ कि आज समग्र हिंदुस्तान में जम्मू-कश्मीर को छोड़ कर कहीं कोई भी समस्या नहीं है। जब 20 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने कबीलाई सेना की आड़ में जम्मू-कश्मीर पर हमला किया और जम्मू-कश्मीर के महाराजा ने भारत के साथ जुड़ने का प्रस्ताव रखते हुए सहायता माँगी तो हम जीतते-जीतते पाकिस्तान में काफी अंदर तक पहुँच गए थे लेकिन पंडित नेहरू के अचानक युद्ध विराम की घोषणा के कारण पाक अधिकृत कश्मीर को हिंदुस्तान के साथ जोड़ने का स्वप्न अधूरा रह गया। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर का मुद्दा होता ही नहीं यदि पंडित नेहरू ने अचानक युद्ध विराम न किया होता। इतना ही नहीं, पंडित नेहरू संयुक्त राष्ट्र के चार्टर 35 के तहत जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को यूएन ले गए और जिसका परिणाम यह हुआ कि जम्मू-कश्मीर एक विवादित क्षेत्र बन गया। सरदार पटेल की असामयिक मृत्यु के पश्चात् शेख अब्दुल्ला और पंडित नेहरू के बीच एक असंवैधानिक ‘दिल्ली समझौता’ हुआ जिसके कारण धारा 370 और 35 (A) की नींव पड़ी, साथ ही जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद, अलगाववाद और भ्रष्टाचार अपनी जड़ें गहरी करता चला गया और पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करने का मौक़ा मिल गया। इसी के कारण अपने ही देश में दोहरी नागरिकता की परिस्थिति उत्पन्न हुई। और तो और, जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थियों और देश के अन्य भागों से आ कर बसने वालों के राजनैतिक और कानूनी अधिकार भी न के बराबर रह गए। वे न तो चुनाव लड़ सकते थे और न ही मतदान कर सकते थे। पधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  ने संसद की सम्मति से धारा 370 और 35 (A) को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को उनका अधिकार प्रदान किया है। श्री शाह ने कहा कि 90 के दशक में हजारों कश्मीरी पंडितों, सूफी संतों और सरदारों को जम्मू-कश्मीर से विस्थापित होने के लिए मजबूर होना पड़ा। इतना ही नहीं, 1989 से लेकर आज तक हमारे 40 हजार नागरिक जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए। कांग्रेस और एनसीपी को केवल सत्ता चाहिए, इसलिए उन्हें हमारे 40 हजार नागरिकों की शहादत की तकलीफ नहीं होती जबकि हमारे सीने में यह दर्द दिन-रात सुलगता रहता है। मुझे विश्वास है कि कुछ समय बाद ही जम्मू-कश्मीर आतंकवाद से पूर्णतया मुक्त होकर विकास के रास्ते पर तेज गति से चल पड़ेगा। जब संसद में धारा 370 और 35 (A) को निरस्त करने के लिए बहस चल रही थी तो कांग्रेसी दोनों सदनों में हिंदुस्तान को डराने की कोशिश कर रहे थे कि धारा 370 और 35 (A) के हटने से हिंदुस्तान रक्तरंजित हो जायेगा, खून की नदियाँ बहेगी जबकि पांच अगस्त 2019 से आज तक जम्मू-कश्मीर में एक भी गोली चलानी नहीं पड़ी है और न ही इसके कारण किसी की भी मृत्यु हुई है। आखिर कांग्रेस, एनसीपी और उसकी साथी पार्टियां अपनी तुच्छ राजनीति के लिए डराती किसे है?   गृह मंत्री ने कहा कि धारा 370 और 35 (A) के हटने के पश्चात् जम्मू-कश्मीर में चहुँ ओर शांति है। अब केवल 10 थाने में ही प्रतिबंधित धाराएं रह गई हैं। लगभग 99% लैंडलाइन काम कर रहे हैं, लगभग 67% मोबाइल भी अब काम करने लगे हैं। कर्फ्यू ख़त्म हो गया है, व्यापार शुरू हो गया है और जम्मू-कश्मीर के सेब भी जल्द ही बाजारों में दस्तक देंगे। उन्होंने कहा कि धारा 370 और 35 (A) के हटने के कारण जम्मू-कश्मीर को काफी फायदा पहुंचा है। प्रदेश के कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण मिलने की शुरुआत हुई है। अब जम्मू-कश्मीर में एट्रोसिटीज एक्ट भी लागू होगा, सफाई कर्मचारी आयोग और मानवाधिकार आयोग का भी गठन होगा। साथ ही, अब प्रदेश में बाल विवाह का भी क़ानून होगा। जम्मू-कश्मीर में केवल तीन परिवार ने शासन को अपने हाथों में ले रखा था और उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो का गठन भी प्रदेश में नहीं होने दिया ताकि उनके भ्रष्टाचार पर कोई ऊँगली न उठे।

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए 2.27 लाख करोड़ रुपये की राशि दी। यदि यह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ा होता तो यह पैसा जम्मू-कश्मीर के लोगों तक पहुंचता और घर-घर विकास होता। धारा 370 और 35 (A) जम्मू-कश्मीर की भाषा अथवा संस्कृति के संरक्षण के लिए नहीं बल्कि तीन राजनीतिक घरानों के भ्रष्टाचार का राजनैतिक कवच था।   श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  के आने के बाद देश की सभी परिवारवादी पार्टियों की नींव हिलने लगी है। कांग्रेस, एनसीपी और तमाम ऐसी पार्टियों में डर घर कर गया है। अब जम्मू-कश्मीर में भी परिवारवादी पार्टियों का सफाया तय है। महाराष्ट्र की जनता से अपील करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि जब संसद में धारा 370 की समाप्ति को लेकर बहस चल रही थी तो कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने इसका पुरजोर विरोध किया था। कांग्रेस और एनसीपी महाराष्ट्र में जब प्रदेश की जनता से वोट मांगने आयें तो स्पष्ट करें कि वे धारा 370 के पक्ष में हैं या इसके हटने के विरोध में। महाराष्ट्र की जनता को यह जानने का अधिकार है। राहुल गाँधी तो आज भी धारा 370 के हटने का विरोध कर रहे हैं। उन्हें यह याद होना चाहिए कि बांग्लादेश के लिए पाकिस्तान से लड़ाई के समय श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने इंदिरा गाँधी जी का समर्थन किया था क्योंकि यह देश का मामला था। जब 1994 में जम्मू-कश्मीर पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार प्रस्ताव लेकर सदन में आई, तब भी भारतीय जनता पार्टी ने उसका समर्थन किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री  नरसिम्हा राव के आग्रह पर श्रद्धेय अटल जी यूएन में जम्मू-कश्मीर पर भारत का पक्ष रखने के लिए गये थे। जब मामले देशहित के हों तो दलों की राजनीति नहीं करते बल्कि दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर स्टैंड लेते हैं। हालांकि राहुल गाँधी का देशहित के निर्णय पर विरोध पहली बार नहीं है। जब हमने देश के दुश्मनों के खिलाफ पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक किये तो राहुल गाँधी ने सबूत मांगने शुरू कर दिए, इसका विरोध किया। याद कीजिये जब जेएनयू में ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ के देशद्रोही नारे लग रहे थे, तब भी राहुल गाँधी राष्ट्र विरोधी तत्वों के समर्थन में खड़े हो गए थे और आज भी कांग्रेस एवं एनसीपी निर्लज्ज होकर देश के एकता व अखंडता के खिलाफ बातें कर रही है। श्री शाह ने कहा कि हमारे देवेन्द्र फड़णवीस जी ने पांच वर्षों में भ्रष्टाचार विहीन शासन दिया है, विकास से परिपूर्ण शासन दिया है, महाराष्ट्र का गौरव बढ़ाया है, देश के नंबर वन प्रदेश के रूप में महाराष्ट्र को प्रतिष्ठित किया है। आज महाराष्ट्र शिक्षा के मामले में देश में तीसरे स्थान पर और निवेश के क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है। विगत पांच वर्षों में महाराष्ट्र का कृषि विकास दर भी बढ़ा है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि धारा 370 के हटने के बाद यह पहला चुनाव है। एक ओर भारत माता को सर्वस्व मानने वाली भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी हैं तो वहीं दूसरी ओर केवल अपने परिवार को ही सर्वस्व मानने वाली कांग्रेस, एनसीपी और उसकी सहयोगी पार्टियां। महाराजा छत्रपति शिवाजी की धरती पर महाराष्ट्र की जनता ने धारा 370 को हटाने का विरोध कर हिंदुस्तान को बदनाम करने वाली पार्टियों को सबक सिखाने का मन बनाते हुए उन्हें अपनी जगह दिखाने का निर्णय ले लिया है। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से जन-जन में धारा 370 को हटाने के राष्ट्र एकता के सदेश और छत्रपति शिवाजी के स्वराज को सिंचित करने का आह्वान किया।

 

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