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Amar sandesh नई दिल्ली।वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में मानव संसाधन क्षमता को मजबूत करने के लिए सुनियोजित और लक्षित कदम उठाए हैं। कार्यबल विस्तार, परिचालन दक्षता में सुधार और शासन-उन्मुख सुधारों के जरिए बैंकिंग व्यवस्था को अधिक सशक्त और ग्राहक-केंद्रित बनाने की दिशा में प्रयास तेज किए गए हैं।
डीएफएस के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भर्ती प्रक्रिया बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) के माध्यम से संचालित की जाती है, जिससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और मानकीकरण सुनिश्चित होता है। यह प्रणाली बैंकों की जरूरतों के अनुरूप योग्य उम्मीदवारों के चयन में अहम भूमिका निभा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 50,552 उम्मीदवारों का चयन कर उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं। इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में यह संख्या 30,827 थी, जो 2024-25 में बढ़कर 37,860 हो गई थी। लगातार बढ़ती भर्ती संख्या यह दर्शाती है कि सरकार बैंकिंग क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ठोस रणनीति पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बड़े पैमाने पर भर्ती से बैंकों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और कर्मचारियों पर कार्यभार का दबाव कम होगा। साथ ही ग्राहक सेवाओं में तेजी आएगी और दूरदराज एवं कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार संभव होगा। इससे वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा और आम लोगों की ऋण तक पहुंच आसान होगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पर्याप्त, कुशल और भविष्य के लिए तैयार मानव संसाधनों से लैस करने के लिए प्रतिबद्ध है।यह कदम देश की आर्थिक गतिविधियों को गति देने और समावेशी विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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