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जमा से लेकर युवाओं की बैंकिंग, किसानों के कर्ज और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक पर बनेगी ठोस रणनीति
Amar sandesh नई दिल्ली।देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और प्रमुख सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के शीर्ष अधिकारी 17 और 18 अगस्त को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय विचार-विमर्श सम्मेलन में एक साथ जुटेंगे। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) की ओर से आयोजित पीएसबी सम्मेलन में बैंकिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आम लोगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर व्यापक चर्चा होगी।
सम्मेलन में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी भी उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित न रहकर ऐसी व्यावहारिक और समयबद्ध रणनीतियां तैयार करना है, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों, युवाओं, किसानों, छोटे कारोबारियों और समाज के जरूरतमंद वर्गों तक पहुंच सके।
सात अहम मुद्दों पर होगी विशेष चर्चा
सम्मेलन में बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े सात महत्वपूर्ण विषयों को केंद्र में रखा गया है। इनमें जमा जुटाना, युवाओं के लिए बेहतर बैंकिंग सुविधाएं, निवेश चक्र को आसान बनाना, वैश्विक क्षमता केंद्रों को बढ़ावा देना, कृषि एवं बागवानी से जुड़ी मूल्य श्रृंखला का बुनियादी ढांचा मजबूत करना, क्रेडिट कार्ड कारोबार को नए सिरे से तैयार करना और प्राथमिकता क्षेत्र को ऋण उपलब्ध कराना शामिल हैं।
इन विषयों पर विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि अपने अनुभव और सफल प्रयोग साझा करेंगे। कोशिश यह होगी कि जो व्यवस्थाएं किसी बैंक या वित्तीय संस्थान में बेहतर परिणाम दे रही हैं, उन्हें व्यापक स्तर पर अपनाने योग्य बनाया जा सके।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी रहेगा जोर
सम्मेलन में कृषि और बागवानी क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। फसल तैयार होने के बाद उसके भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में जरूरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर चर्चा होगी।
इसी तरह प्राथमिकता क्षेत्र को मिलने वाले ऋण के माध्यम से उन लोगों तक औपचारिक बैंकिंग और कर्ज की सुविधा पहुंचाने पर जोर रहेगा, जो अभी भी पर्याप्त वित्तीय सेवाओं से दूर हैं।
युवाओं के लिए बैंकिंग उत्पादों को बनाया जाएगा उपयोगी
बदलती जरूरतों को देखते हुए युवाओं के लिए बैंकिंग सेवाओं और उत्पादों को अधिक उपयोगी बनाने पर भी विचार होगा। सम्मेलन में इस बात पर चर्चा की जाएगी कि बैंकिंग व्यवस्था युवाओं की बदलती आर्थिक जरूरतों, रोजगार, उद्यमिता और डिजिटल वित्तीय व्यवहार के अनुरूप किस तरह बेहतर सेवाएं उपलब्ध करा सकती है।
लगभग 125 वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल
पीएसबी सम्मेलन में लगभग 125 प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ नाबार्ड, एक्जिम बैंक, सिडबी, एनएचबी, आईआईएफसीएल, आईएफसीआई और एनएबीएफआईडी जैसे सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और कार्यकारी निदेशक शामिल होंगे।
इसके अलावा भारतीय बैंक संघ (IBA) और वित्तीय सेवाएं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मेलन में भाग लेंगे।
मंथन का लक्ष्य नीतियों का असर जमीन पर दिखे
सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह होगा कि बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में किए जाने वाले नीतिगत और संस्थागत बदलावों का असर केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसके मापने योग्य और जन-केंद्रित परिणाम सामने आएं।
सस्ते और आसान कर्ज की उपलब्धता बढ़ाने, निवेश परियोजनाओं को समय पर आगे बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, युवाओं को बेहतर बैंकिंग सुविधा देने और वंचित वर्गों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने जैसे मुद्दों पर व्यावहारिक पहल तैयार करना सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य रहेगा।
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