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संस्कृति, लोककला और परंपराओं को मिलेगा बड़ा मंच; आठ राज्यों में पर्यटन बढ़ाने के लिए केंद्र की योजनाओं से जुड़ रहा स्थानीय रोजगार और कारोबार
Amar sandesh नई दिल्ली।पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक त्योहारों और अनूठी जीवनशैली को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय मेलों और सांस्कृतिक आयोजनों को भी आर्थिक एवं संस्थागत सहयोग देना शुरू किया है। सरकार की इन पहलों का सीधा लाभ स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्पकारों, पर्यटन कारोबारियों, होटल-होमस्टे संचालकों, युवाओं और छोटे व्यवसायों तक पहुंचने की उम्मीद है।
पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में पर्यटन क्षमता को सामने लाने के लिए प्रचार अभियान, प्रदर्शनियों, सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और मेलों-त्योहारों के आयोजन में सहायता दी जा रही है।
2013 से हो रहा इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट
पूर्वोत्तर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने के उद्देश्य से पर्यटन मंत्रालय वर्ष 2013 से इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट (आईटीएम) का आयोजन कर रहा है। यह आयोजन पर्यटन से जुड़े खरीदारों, विक्रेताओं, मीडिया, सरकारी एजेंसियों और कारोबारियों को एक मंच पर लाता है।
पिछला इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट 13 से 16 नवंबर 2025 तक गंगटोक, सिक्किम में आयोजित हुआ था। इससे पूर्वोत्तर के पर्यटन कारोबारियों और उद्यमियों को घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिला।
मेले-त्योहार केवल उत्सव नहीं, रोजगार का भी जरिया
सरकार की ‘डोमेस्टिक प्रमोशन एंड पब्लिसिटी सहित हॉस्पिटैलिटी’ (डीपीपीएच) योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मेलों, त्योहारों तथा पर्यटन संबंधी आयोजनों के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाती है।
इस सहायता का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि किसी बड़े मेले या सांस्कृतिक आयोजन से केवल आयोजन स्थल ही नहीं, बल्कि आसपास के होटल, टैक्सी, रेस्तरां, दुकानदार, स्थानीय हस्तशिल्प विक्रेता, कलाकार और छोटे कारोबारी भी जुड़े होते हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।
हॉर्नबिल से लेकर वांगला और संगाई तक को मिला सहयोग
केंद्र की सहायता से पूर्वोत्तर के अनेक लोकप्रिय सांस्कृतिक आयोजनों को मजबूती मिली है। नागालैंड के हॉर्नबिल महोत्सव, मणिपुर के संगाई महोत्सव, मेघालय के वांगला और नोंगक्रेम नृत्य महोत्सव, मिजोरम के एंथुरियम और शीतकालीन महोत्सव, अरुणाचल प्रदेश के तवांग और ऑरेंज महोत्सव, सिक्किम के रेड पांडा विंटर फेस्टिवल, तथा त्रिपुरा के नीरमहल, दीवाली और चबीमुरा महोत्सव जैसे आयोजनों को विभिन्न वर्षों में वित्तीय सहायता दी गई है।
2025-26 में भी अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के कई सांस्कृतिक आयोजनों को केंद्र से सहायता मिली है। इससे स्थानीय परंपराओं और लोक संस्कृति को संरक्षित करने के साथ उन्हें बड़े पर्यटन बाजार से जोड़ने का रास्ता खुलता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी पूर्वोत्तर की पहचान
पर्यटन मंत्रालय ने सितंबर 2024 में इनक्रेडिबल इंडिया डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी वेबसाइट को नया रूप दिया। इसमें पूर्वोत्तर के पर्यटन स्थलों और आकर्षणों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जा रहा है। वेबसाइट पर हिंदी, अंग्रेजी और संयुक्त राष्ट्र की भाषाओं में पर्यटन संबंधी सामग्री उपलब्ध है।
सोशल मीडिया के माध्यम से भी पूर्वोत्तर के पर्यटन स्थलों, संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय आयोजनों को देश-विदेश के लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
पर्यटन ढांचे के विकास पर भी जोर
सरकार ने केवल प्रचार तक अपनी पहल सीमित नहीं रखी है। स्वदेश दर्शन 2.0, प्रसाद, पर्यटन अवसंरचना विकास के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता, राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता (एसएएससीआई) और चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) जैसी योजनाओं के माध्यम से पर्यटन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं को विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
स्वदेश दर्शन योजना को अब स्वदेश दर्शन 2.0 के रूप में पुनर्गठित किया गया है, जिसमें टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पर्यटन बढ़ेगा तो स्थानीय बाजार भी चलेगा
पूर्वोत्तर में पर्यटन बढ़ने का सबसे बड़ा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होटल और होमस्टे, स्थानीय परिवहन, रेस्तरां, हस्तशिल्प, बुनकर, स्थानीय खाद्य उत्पाद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जुड़े लोगों की आय के अवसर बढ़ सकते हैं।
यानी सरकार की ये योजनाएं केवल पर्यटकों को आकर्षित करने की पहल नहीं हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति को बाजार, कलाकारों को मंच और युवाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास भी हैं।
हवाई संपर्क को भी बनाया जा रहा आसान
पूर्वोत्तर के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के लिए क्षेत्रीय हवाई संपर्क को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। आरसीएस-उड़ान योजना के तहत पर्यटन मार्गों को शामिल किया गया है। इनमें डिब्रूगढ़-दिमापुर, दिमापुर-इम्फाल, अगरतला-आइजोल, डिब्रूगढ़-इम्फाल और होलोंगी-गुवाहाटी सहित कई मार्ग शामिल हैं।
बेहतर हवाई संपर्क से दूर-दराज के पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच आसान होने के साथ स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है
2025 में पूर्वोत्तर पहुंचे लाखों घरेलू पर्यटक
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में घरेलू पर्यटकों की यात्राओं की संख्या करोड़ों में रही। अकेले असम में करीब 90.55 लाख घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं, जबकि सिक्किम में करीब 16.55 लाख और मेघालय में करीब 18.48 लाख घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज हुईं।
इसी अवधि में पूर्वोत्तर में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही में भी सिक्किम, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों की उल्लेखनीय हिस्सेदारी रही।
जनवरी से जून 2026 के आंकड़े भी कई राज्यों में पर्यटन की मजबूत गतिविधि का संकेत देते हैं। इस अवधि में असम में करीब 46.04 लाख घरेलू पर्यटक यात्राएं, जबकि सिक्किम में करीब 23.52 लाख घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं।
स्वच्छ पर्यटन पर भी सरकार का जोर
पर्यटन स्थलों को स्वच्छ और पर्यटकों के लिए बेहतर बनाने के लिए पर्यटन मंत्रालय स्वच्छता कार्य योजना के तहत जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करता है। वर्ष 2025-26 में पर्यटक, छात्र और हितधारक जागरूकता की श्रेणियों में 200 गतिविधियां आयोजित की गईं।
इसके अलावा वर्ष 2025 में स्वच्छता पखवाड़ा के तहत 277 तथा स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत 244 गतिविधियां आयोजित की गईं।
संस्कृति बचेगी तो पर्यटन भी मजबूत होगा
पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ उसकी विविध लोकसंस्कृति है। अलग-अलग जनजातियों की परंपराएं, लोकनृत्य, संगीत, खान-पान, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्सव इस क्षेत्र को देश के दूसरे हिस्सों से अलग पहचान देते हैं।
ऐसे में मेलों और त्योहारों को सरकारी सहायता मिलना केवल आयोजन का खर्च उठाने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य स्थानीय संस्कृति को संरक्षित करना, उसे देश-दुनिया तक पहुंचाना और उससे जुड़े समुदायों के लिए आर्थिक अवसर पैदा करना है।
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की इन पहलों की जानकारी दी।
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